पहले MBBS, फिर IPS और IAS: डॉ. त्यागराजन एसएम को बिहार के बाद दिल्ली में मिली बड़ी जिम्मेदारी, जानिए उनका सफर

डॉ. त्यागराजन एसएम ने MBBS के बाद IPS और IAS बनकर बिहार में कई अहम पद संभाले। अब उन्हें दिल्ली के सहकारिता मंत्रालय में निदेशक नियुक्त किया गया है।
पहले MBBS, फिर IPS और IAS: डॉ. त्यागराजन एसएम को बिहार के बाद दिल्ली में मिली बड़ी जिम्मेदारी, जानिए उनका सफर
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डॉ. त्यागराजन एसएम का नाम उन प्रशासनिक अधिकारियों में शामिल है, जिनका करियर कई अलग-अलग क्षेत्रों से होकर गुजरा है। उन्होंने सबसे पहले चिकित्सा की पढ़ाई पूरी की, इसके बाद भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयनित हुए और फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में अपनी जगह बनाई। बिहार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम करने के बाद अब उन्हें केंद्र सरकार में नई जिम्मेदारी मिली है। उनकी नियुक्ति दिल्ली स्थित केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय में निदेशक के पद पर की गई है। चिकित्सा की पढ़ाई से शुरू होकर पुलिस सेवा और फिर प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने वाला उनका सफर युवाओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
डॉ. त्यागराजन एसएम की कहानी इसलिए भी खास मानी जाती है, क्योंकि उन्होंने एक ऐसे पेशे से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसमें लोगों की जान बचाने और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से समाज की मदद करने का अवसर मिलता है। एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने करियर को केवल चिकित्सा क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने सिविल सेवा में जाने का निर्णय लिया और इसके लिए कठिन प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू की। यूपीएससी जैसी परीक्षा में सफलता हासिल करना आसान नहीं होता। इसके लिए लंबे समय तक पढ़ाई, अनुशासन, धैर्य और लगातार मेहनत की जरूरत पड़ती है। डॉ. त्यागराजन ने इन चुनौतियों का सामना करते हुए पहले आईपीएस और फिर आईएएस अधिकारी बनने तक का सफर तय किया।
उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, डॉ. त्यागराजन एसएम का जन्म 20 दिसंबर 1984 को तमिलनाडु के कोयंबटूर में हुआ था। उन्होंने कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की। मेडिकल की पढ़ाई के दौरान उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं और लोगों की समस्याओं को करीब से समझने का अवसर मिला। हालांकि, आगे चलकर उन्होंने प्रशासनिक सेवा को अपना करियर बनाने का फैसला किया। सिविल सेवा में जाने का उनका निर्णय उनके पेशेवर जीवन में एक बड़ा बदलाव था। चिकित्सा के क्षेत्र में पढ़ाई करने के बाद पुलिस और प्रशासनिक सेवा में पहुंचना उनके करियर को दूसरे अधिकारियों से अलग पहचान देता है।
एमबीबीएस पूरा करने के बाद डॉ. त्यागराजन ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की। वर्ष 2010 में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा में सफलता मिली। आईपीएस के रूप में चयन के बाद उन्होंने पुलिस प्रशासन से जुड़े कार्यों का अनुभव प्राप्त किया। उनकी शुरुआती जिम्मेदारियों में ओडिशा में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में काम करना शामिल रहा। पुलिस सेवा के दौरान अधिकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और विभिन्न प्रशासनिक एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण काम करने होते हैं। इस अनुभव ने उनके प्रशासनिक करियर की नींव तैयार करने में भूमिका निभाई।
इसके बाद डॉ. त्यागराजन ने एक बार फिर सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की और वर्ष 2011 में भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चयनित हुए। उन्हें बिहार कैडर आवंटित किया गया। आईएएस में चयन के बाद उनका कार्यक्षेत्र बदल गया और उन्हें शासन, विकास योजनाओं, सरकारी नीतियों तथा जिला प्रशासन से जुड़े व्यापक विषयों पर काम करने का अवसर मिला। बिहार में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अलग-अलग पदों पर जिम्मेदारियां संभालीं और धीरे-धीरे राज्य के महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकारियों में अपनी पहचान बनाई।
करीब डेढ़ दशक के प्रशासनिक करियर में डॉ. त्यागराजन एसएम ने बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में काम किया। उनकी शुरुआती तैनाती पूर्णिया में सहायक कलेक्टर के रूप में हुई थी। इसके बाद उन्हें नगर प्रशासन से जुड़े कामों का भी अनुभव मिला। बिहारशरीफ नगर निगम में आयुक्त के रूप में काम करते हुए उन्हें शहरी प्रशासन, नागरिक सुविधाओं और स्थानीय निकायों के कामकाज से संबंधित विषयों पर जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिला। नगर निगमों में अधिकारियों की भूमिका केवल सरकारी योजनाओं को लागू कराने तक सीमित नहीं होती, बल्कि सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन, शहरी सुविधाओं और नागरिकों की शिकायतों के समाधान जैसे विषय भी उनके कार्यक्षेत्र का हिस्सा होते हैं।
नगर प्रशासन के अनुभव के बाद डॉ. त्यागराजन को जिलाधिकारी के रूप में काम करने का अवसर मिला। उन्होंने नालंदा, दरभंगा और गया जैसे महत्वपूर्ण जिलों में जिलाधिकारी की जिम्मेदारी संभाली। किसी जिले में डीएम का पद प्रशासनिक व्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण पदों में गिना जाता है। जिले में सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, विकास कार्यों की निगरानी, राजस्व प्रशासन, आपदा प्रबंधन, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और आम लोगों की समस्याओं का समाधान जिलाधिकारी की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होते हैं। इन जिम्मेदारियों के कारण अधिकारियों को अलग-अलग परिस्थितियों में निर्णय लेने और प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने का अनुभव मिलता है।
नालंदा में अपने कार्यकाल के दौरान डॉ. त्यागराजन ने विकास कार्यों और शहरी प्रबंधन से जुड़े विषयों पर ध्यान दिया। नालंदा ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण जिला है। यहां सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ स्थानीय सुविधाओं को बेहतर बनाए रखना भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होता है। ठोस कचरा प्रबंधन जैसे विषयों पर काम करना शहरी क्षेत्रों को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने की दिशा में जरूरी माना जाता है। उनके प्रशासनिक कार्यों के लिए वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री स्तर पर सम्मान मिलने का भी विभिन्न रिपोर्टों में उल्लेख किया गया है।
नालंदा के बाद डॉ. त्यागराजन ने दरभंगा में जिलाधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभाली। दरभंगा मिथिलांचल का प्रमुख केंद्र है और यहां स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, सड़क, ग्रामीण विकास तथा शहरी सुविधाओं से जुड़े अनेक विषय प्रशासन के सामने रहते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान देश के अन्य जिलों की तरह दरभंगा में भी स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया था। उस समय अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, ऑक्सीजन की उपलब्धता और जरूरी चिकित्सा संसाधनों की व्यवस्था प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती थी। डॉ. त्यागराजन ने दरभंगा में ऑक्सीजन संकट से निपटने के अनुभव को अपने कार्यकाल के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल किया था। इस तरह महामारी के दौरान प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच समन्वय का अनुभव भी उनके करियर का हिस्सा बना।

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