INS Samarthak: भारतीय नौसेना में शामिल हुआ नया पोत, समुद्री निगरानी से लेकर आपदा राहत तक करेगा मदद

INS Samarthak: भारतीय नौसेना में नया पोत शामिल किया गया है, जो समुद्री निगरानी, सुरक्षा और आपदा राहत जैसे अहम कार्यों में मदद करेगा। जानें INS समर्थक की

भारतीय नौसेना की ताकत में और इजाफा हुआ है। शुक्रवार को कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे पर युद्धपोत ‘आईएनएस समर्थक’ (INS Samarthak) को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया।

INS Samarthak Commissioned: भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में नया कदम उठाया गया है। कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे पर शुक्रवार को ‘आईएनएस समर्थक’ को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन की मौजूदगी में हुए इस समारोह के साथ नौसेना को एक बहुउद्देशीय पोत मिला है। 

इसे समुद्री निगरानी, मानवीय सहायता, आपदा राहत और अन्य महत्वपूर्ण अभियानों में इस्तेमाल करने की योजना है। स्वदेशी तकनीक और भारतीय रक्षा विनिर्माण की भागीदारी के लिहाज से भी इस पोत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या है आईएनएस समर्थक की खासियत?

आईएनएस समर्थक को बहुउद्देशीय पोत के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल सैन्य अभियानों में सहायता करना नहीं, बल्कि समुद्र में होने वाली विभिन्न गतिविधियों के दौरान नौसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाना भी है। आधुनिक उपकरणों और अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने की क्षमता के कारण यह पोत कई तरह के मिशनों में उपयोगी हो सकता है।

समुद्री क्षेत्र में निगरानी, जरूरत पड़ने पर राहत सामग्री पहुंचाने और संकट में फंसे लोगों की सहायता करने जैसे कार्यों में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इसके अलावा, समुद्र में किसी जहाज के खराब होने या तकनीकी समस्या आने की स्थिति में भी इस तरह के पोत उपयोगी साबित होते हैं।

समुद्री निगरानी और आपदा राहत में मिलेगी मदद

INS Samarthak: भारतीय नौसेना में शामिल हुआ नया पोत, समुद्री निगरानी से लेकर आपदा राहत तक करेगा मदद

आईएनएस समर्थक की प्रमुख भूमिकाओं में समुद्री निगरानी और मानवीय सहायता शामिल हैं। समुद्र में दुर्घटनाओं, प्राकृतिक आपदाओं या अन्य आपात स्थितियों के दौरान राहत एवं बचाव अभियान चलाने में यह सहायता कर सकता है। इसके अलावा, पोत का इस्तेमाल पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों में सहयोग के लिए भी किया जा सकता है। समुद्री क्षेत्रों में निगरानी और विभिन्न प्रकार के सहायक कार्यों के जरिए नौसेना की क्षमता बढ़ाने में इसकी भूमिका अहम हो सकती है।

समुद्र में आपात स्थिति के दौरान किसी एक पोत से कई तरह की सहायता उपलब्ध होना परिचालन के लिहाज से उपयोगी माना जाता है। इससे जरूरत के मुताबिक संसाधनों और कर्मचारियों को एक स्थान पर जुटाने में मदद मिल सकती है।

तोप और ड्रोन संचालन की सुविधा

आईएनएस समर्थक को हथियार प्रणालियों और ड्रोन संचालन जैसी क्षमताओं से लैस किए जाने की जानकारी दी गई है। इन सुविधाओं का इस्तेमाल निर्धारित सैन्य जरूरतों और मिशन के अनुरूप किया जा सकता है। ड्रोन समुद्री निगरानी और संबंधित अभियानों में उपयोगी साबित हो सकते हैं। पोत में समुद्र के भीतर से सामान निकालने और अन्य जहाजों को सहायता देने से जुड़े कार्यों की क्षमता भी बताई गई है। जरूरत पड़ने पर यह क्षतिग्रस्त जहाज को खींचने और उसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में मदद कर सकता है।

इसके अलावा, इसे ‘मदरशिप’ की भूमिका में भी इस्तेमाल करने की योजना है। इस तरह की भूमिका में एक पोत अन्य संसाधनों और अभियानों के समन्वय के लिए आधार उपलब्ध करा सकता है। हालांकि, किसी विशेष अभियान में इसकी वास्तविक भूमिका परिस्थितियों और उपलब्ध उपकरणों पर निर्भर करेगी।

‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा

आईएनएस समर्थक का निर्माण भारतीय कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी कलपुर्जों का इस्तेमाल किया गया है। इससे भारतीय रक्षा विनिर्माण क्षेत्र और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पोत की लंबाई लगभग 106 मीटर और चौड़ाई 16.8 मीटर बताई गई है। 

इसकी अधिकतम गति 15 नॉट यानी करीब 27.8 किलोमीटर प्रति घंटा है। ये विशेषताएं इसे समुद्र में विभिन्न प्रकार के सहायक और परिचालन संबंधी कार्यों के लिए तैयार किए जाने की ओर संकेत करती हैं।

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