उत्तर प्रदेश में शारदीय नवरात्र की सप्तमी से नवमी तक 26 प्रमुख मंदिरों में देवी गीत और दुर्गा सप्तशती पाठ के आयोजन होंगे। मिशन शक्ति के तहत महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन का संदेश दिया जाएगा। कार्यक्रमों में 78 स्थानीय कलाकारों को मंच मिलेगा।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार शारदीय नवरात्र की सप्तमी, अष्टमी और नवमी के अवसर पर प्रदेश के 26 प्रमुख मंदिरों में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कराएगी। मिशन शक्ति के तहत होने वाले इन आयोजनों में पारंपरिक देवी गीतों का गायन और दुर्गा सप्तशती का पाठ प्रमुख आकर्षण होंगे। कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान तथा स्वावलंबन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ स्थानीय कलाकारों, विशेषकर महिला कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया जाएगा।
सप्तमी से नवमी तक मंदिरों में होंगे विशेष कार्यक्रम
शारदीय नवरात्र के दौरान उत्तर प्रदेश के प्रमुख देवी मंदिरों में शक्ति आराधना के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। योगी सरकार की ओर से मिशन शक्ति के तहत प्रस्तावित यह आयोजन शनिवार से सोमवार तक यानी सप्तमी से नवमी तक चलेगा। कार्यक्रमों में पारंपरिक देवी गीतों की प्रस्तुति और दुर्गा सप्तशती का पाठ कराया जाएगा।
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इन आयोजनों का उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देने के साथ महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है। सरकार का प्रयास है कि मंदिरों में होने वाले धार्मिक कार्यक्रम सामाजिक जागरूकता का माध्यम भी बनें।
78 स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मंच
इस आयोजन में स्थानीय कलाकारों की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है। प्रत्येक चयनित मंदिर में तीन कलाकार प्रस्तुति देंगे। इस तरह कुल 26 मंदिरों में 78 कलाकारों को अपनी कला दिखाने का अवसर मिलेगा। इनमें महिला कलाकारों की संख्या अधिक रखने पर जोर दिया जाएगा।
लखनऊ और प्रयागराज के चार मंदिरों में भी विशेष प्रस्तुतियां होंगी। इनमें लखनऊ के चंद्रिका देवी और संकटा देवी मंदिर तथा प्रयागराज के अलोपी देवी और ललिता देवी मंदिर शामिल हैं। इन चार मंदिरों में कुल 12 स्थानीय कलाकार प्रस्तुति देंगे। शेष 22 मंदिरों में भी तीन-तीन कलाकार कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, शारदीय नवरात्र आस्था, शक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा पर्व है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से धार्मिक आयोजनों को सामाजिक बदलाव से जोड़ने और महिला कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पारंपरिक देवी गीतों और लोक संस्कृति को प्रोत्साहन मिलने के साथ कलाकारों की आजीविका को भी सहारा मिल सकता है।
प्रदेश के 26 प्रमुख मंदिरों में होगा आयोजन
सरकार की ओर से जारी सूची के अनुसार, कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के 26 प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आयोजित किए जाएंगे। इनमें मीरजापुर का मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर, वाराणसी का विशालाक्षी मंदिर, सोनभद्र का ज्वाला देवी मंदिर, प्रयागराज का अलोपशंकरी देवी मंदिर, बलरामपुर का देवीपाटन मंदिर और सहारनपुर का शाकुंभरी देवी मंदिर शामिल हैं।
इसके अलावा सीतापुर के नैमिषारण्य स्थित ललिता देवी मंदिर, मथुरा का कात्यायनी देवी मंदिर, जौनपुर का मां शीतला चौकिया धाम, प्रतापगढ़ का बेल्हा देवी मंदिर, गोरखपुर का मां तरकुलहा देवी धाम और लखनऊ के चंद्रिका देवी व संकटा देवी मंदिर में भी कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
सूची में भदोही का सीता समाहित स्थल, कौशांबी का कड़ावासिनी मंदिर, वाराणसी का महालक्ष्मी देवी मंदिर, उन्नाव का चंद्रिका देवी मंदिर, औरैया का देवकाली मंदिर, मऊ का मां शीतला माता स्थल, चित्रकूट का मां सिंह वाहिनी काली देवी मंदिर, हमीरपुर का गायत्री शक्तिपीठ, जालौन के कोंच स्थित बैरागढ़ माता मंदिर, घाटमपुर की कुष्मांडा देवी और मैनपुरी व फिरोजाबाद के शीतला माता तथा चामुंडा देवी मंदिर भी शामिल हैं।
मिशन शक्ति के जरिए महिलाओं के सशक्तीकरण पर जोर
मिशन शक्ति के तहत आयोजित इन कार्यक्रमों में धार्मिक आस्था के साथ महिलाओं और बालिकाओं के अधिकारों तथा सामाजिक सुरक्षा से जुड़े संदेशों को भी प्रमुखता दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य सांस्कृतिक मंचों के जरिए सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की बात लोगों तक पहुंचाना है।
स्थानीय कलाकारों की भागीदारी से क्षेत्रीय लोक परंपराओं को आगे बढ़ाने और कलाकारों को सार्वजनिक मंच उपलब्ध कराने की भी योजना है। देवी गीतों और दुर्गा सप्तशती पाठ के माध्यम से नवरात्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ इन आयोजनों को सामाजिक जागरूकता से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।










