दुधवा की हथिनी ‘भवानी’ होगी गोरखपुर शिफ्ट, ‘दुर्गा’ से बिछड़ने पर बढ़ी चिंता

दुधवा की अनाथ हथिनी भवानी को बेहतर देखभाल के लिए गोरखपुर भेजा जाएगा। विशेषज्ञों ने हथिनी दुर्गा से अलग होने पर उसके व्यवहार को लेकर चिंता जताई।

दुधवा टाइगर रिजर्व में पली अनाथ हथिनी ‘भवानी’ को बेहतर देखभाल के लिए गोरखपुर भेजने का फैसला लिया गया है। वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों ने उसके सामाजिक और भावनात्मक व्यवहार पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई है।

लखीमपुर खीरी: दुधवा टाइगर रिजर्व की अनाथ हथिनी ‘भवानी’ को बेहतर देखभाल के उद्देश्य से गोरखपुर स्थानांतरित किए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। बचपन से हथिनी ‘दुर्गा’ के संरक्षण में पली भवानी के स्थानांतरण की खबर के बाद वन्यजीव प्रेमियों ने उसके सामाजिक और भावनात्मक जीवन पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता व्यक्त की है।

अनाथ हथिनी को दुधवा में मिला था नया जीवन

दुधवा टाइगर रिजर्व की हथिनी ‘भवानी’ की कहानी वन्यजीव संरक्षण की सबसे भावनात्मक घटनाओं में से एक मानी जाती है। कुछ वर्ष पहले बिजनौर के जंगलों में अपनी मां से बिछड़ने के बाद करीब तीन सप्ताह की उम्र में इस नन्ही हथिनी को वन विभाग ने सुरक्षित बचाया था। उसकी उम्र बेहद कम थी और वह अपने दम पर जीवित रहने की स्थिति में नहीं थी। बेहतर देखभाल और संरक्षण के लिए उसे दुधवा टाइगर रिजर्व लाया गया, जहां उसकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया।

दुधवा की हथिनी ‘भवानी’ होगी गोरखपुर शिफ्ट, ‘दुर्गा’ से बिछड़ने पर बढ़ी चिंता

दुधवा पहुंचने के बाद वन अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल उसके भोजन और इलाज की नहीं थी, बल्कि उसे ऐसा वातावरण देना भी था जहां वह खुद को सुरक्षित महसूस कर सके। इसी दौरान दुधवा की हथिनी ‘दुर्गा’ ने उसे अपने झुंड का हिस्सा बना लिया। वनकर्मियों के अनुसार, दुर्गा ने भवानी की देखभाल बिल्कुल अपने बच्चे की तरह की। उसने उसे सुरक्षा दी, उसके साथ समय बिताया और धीरे-धीरे भवानी को सामान्य जीवन की ओर लौटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री योगी ने रखा था ‘भवानी’ नाम

दुधवा में रहते हुए यह अनोखा रिश्ता कई लोगों के लिए प्रेरणा बना। वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दुधवा टाइगर रिजर्व पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने दुर्गा के स्नेह में पल रही इस अनाथ हथिनी की कहानी सुनी और उससे प्रभावित होकर उसका नाम ‘भवानी’ रखा। इसके बाद यह नाम केवल एक पहचान नहीं रहा, बल्कि संघर्ष, संरक्षण और नए जीवन का प्रतीक बन गया।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भवानी ने दुधवा के प्राकृतिक माहौल में खुद को पूरी तरह ढाल लिया है। वह अब स्वस्थ है और सामान्य व्यवहार करती है। हालांकि उसकी देखभाल और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए उसे दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है।

बेहतर देखभाल के लिए गोरखपुर भेजने का फैसला

दुधवा प्रशासन ने 29 जून को प्रधान मुख्य वन संरक्षक को पत्र भेजकर भवानी को बेहतर देखभाल वाली जगह स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया था। इसके बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक अनुराधा वेमुरी ने उसे गोरखपुर भेजने के निर्देश जारी किए हैं। वन विभाग का कहना है कि यह फैसला भवानी की सुरक्षा और दीर्घकालिक देखभाल को ध्यान में रखकर लिया गया है।

हालांकि, इस निर्णय के बाद वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। उनका मानना है कि भवानी बचपन से जिस माहौल और हथिनी दुर्गा के साथ रही है, उससे अलग होने का असर उसके व्यवहार पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि हाथी अत्यंत सामाजिक और भावनात्मक स्वभाव के जीव होते हैं और वे अपने झुंड तथा साथियों से गहरा जुड़ाव बना लेते हैं।

विशेषज्ञों ने जताई व्यवहारिक बदलाव की आशंका

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, हाथियों की स्मरण शक्ति और सामाजिक संबंध बेहद मजबूत होते हैं। वे अपने परिवार और झुंड के सदस्यों के साथ लंबे समय तक भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखते हैं। ऐसे में किसी हाथी को उसके परिचित वातावरण और साथी से अलग करना उसके मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार को प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भवानी पहले ही अपनी मां से बिछड़ने जैसी कठिन परिस्थिति से गुजर चुकी है। बाद में उसे दुधवा में दुर्गा का साथ मिला, जिसने उसकी परवरिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसलिए स्थानांतरण की प्रक्रिया बेहद सावधानी से की जानी चाहिए ताकि उसे नए वातावरण में ढलने में किसी तरह की परेशानी न हो।

वन विभाग का कहना है कि गोरखपुर में भवानी की देखभाल के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। वहीं वन्यजीव प्रेमियों की उम्मीद है कि स्थानांतरण के दौरान उसकी भावनात्मक जरूरतों और व्यवहारिक पहलुओं का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा, ताकि वह नए स्थान पर भी सुरक्षित और स्वस्थ जीवन जी सके।

Leave a comment