राजस्थान के झुंझुनूं में 21 जून को हुई हथियारबंद डकैती का पुलिस ने 12 दिनों में खुलासा कर दिया। उत्तर प्रदेश के अंतरराज्यीय गिरोह के छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच में 300 से अधिक सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की अहम भूमिका रही।
झुंझुनूं: राजस्थान के झुंझुनूं जिले में 21 जून की रात हुई हथियारबंद डकैती के मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराज्यीय अपराध गिरोह के छह कथित सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने घर में घुसकर परिवार को हथियारों के बल पर बंधक बनाया और नकदी, आभूषण, मोबाइल फोन तथा सीसीटीवी डीवीआर लेकर फरार हो गए थे।
लगभग 12 दिनों तक चली जांच के दौरान 30 से अधिक पुलिसकर्मियों की विशेष टीम ने 300 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया और उत्तर प्रदेश तक पीछा कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस अब गिरोह के नेटवर्क और अन्य संभावित वारदातों की भी जांच कर रही है।
21 जून की रात हुई थी हथियारबंद डकैती
पुलिस के अनुसार 21 जून की रात झुंझुनूं शहर के पीपली चौक क्षेत्र के मलसीसर रोड स्थित एक मकान में हथियारबंद नकाबपोश बदमाश घुस गए थे। आरोप है कि बदमाशों ने घर के सदस्यों को हथियार दिखाकर बंधक बनाया और घर में रखी नकदी, सोने-चांदी के आभूषण, मोबाइल फोन तथा सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सिस्टम (डीवीआर) लेकर फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई थी और पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच शुरू की।
पांच विशेष टीमें बनाकर शुरू की गई जांच
डकैती की घटना के बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में पांच विशेष जांच टीमों का गठन किया गया। करीब 30 पुलिसकर्मियों ने लगातार 12 दिनों तक दिन-रात जांच अभियान चलाया।
जांच के दौरान पुलिस ने झुंझुनूं और आसपास के क्षेत्रों में लगे 200 से 300 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया। इसके साथ ही मोबाइल लोकेशन, टोल प्लाजा डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का भी अध्ययन किया गया। इन्हीं तकनीकी जानकारियों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।
दो स्कॉर्पियो वाहनों से मिला अहम सुराग
जांच के दौरान पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल किए गए दो स्कॉर्पियो वाहनों की पहचान की। टोल प्लाजा और सीसीटीवी डेटा के विश्लेषण से पता चला कि दोनों वाहन झुंझुनूं से राजगढ़, भादरा, हिसार और सोनीपत होते हुए उत्तर प्रदेश के बागपत और मेरठ की ओर गए थे। यही जानकारी आगे की जांच में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुई और पुलिस ने उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर दबिश देकर आरोपियों तक पहुंच बनाई।
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उत्तर प्रदेश के छह आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राशिद कुरैशी, सत्तार, सरफराज उर्फ भुटन, जाहिद उर्फ लंबू, राजीव उर्फ राजू खट्टा और आरिफ के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार सभी आरोपी उत्तर प्रदेश के मेरठ, बागपत और हापुड़ जिलों के निवासी हैं और इन पर विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं।
पूर्व कबाड़ी ने तैयार की थी पूरी योजना
जांच में पुलिस को यह भी पता चला कि गिरोह का सदस्य आरिफ पहले झुंझुनूं में कबाड़ी का काम कर चुका था। स्थानीय क्षेत्र की जानकारी होने के कारण उसने कथित रूप से इस डकैती की योजना बनाई। पुलिस के अनुसार उसे संबंधित मकान और आसपास के इलाके की पूरी जानकारी थी। बताया जा रहा है कि आरिफ ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर वारदात की रणनीति तैयार की और फिर पूरी घटना को अंजाम दिया। हालांकि पुलिस अभी इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रही है।
आदतन अपराधियों से जुड़े होने की जांच
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में शामिल कुछ व्यक्तियों पर पहले से भी गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या यह गिरोह अन्य राज्यों में हुई समान घटनाओं में भी शामिल रहा है। आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड और अन्य राज्यों की पुलिस से भी जानकारी साझा की जा रही है।
दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश में दी गई दबिश
पुलिस टीमों ने अंतरराज्यीय समन्वय के तहत उत्तर प्रदेश के बागपत, मेरठ और दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में अभियान चलाया। पहले चरण में तीन आरोपियों को कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल किए गए वाहन के साथ गिरफ्तार किया गया। बाद में पूछताछ के आधार पर दूसरी टीम ने दिल्ली-अलवर एक्सप्रेसवे पर कार्रवाई करते हुए शेष तीन आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने दोनों स्कॉर्पियो वाहनों को जब्त कर लिया है और उनकी फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी।
तकनीक और समन्वय से मिली बड़ी सफलता
इस मामले में पुलिस की सफलता आधुनिक तकनीक और अंतरराज्यीय समन्वय का उदाहरण मानी जा रही है। सीसीटीवी फुटेज, टोल प्लाजा रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रैकिंग और मुखबिर तंत्र के संयोजन से पुलिस आरोपियों तक पहुंच सकी। विशेषज्ञों का मानना है कि संगठित अपराध से जुड़े मामलों में तकनीकी जांच और विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच बेहतर समन्वय अपराधियों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
जांच अभी भी जारी
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इस गिरोह का संबंध अन्य राज्यों में हुई डकैती या लूट की घटनाओं से भी है। इसके अलावा लूटा गया सामान, आर्थिक लेन-देन और गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों के बारे में भी जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।









