ईरान ने कहा है कि उसके लिए युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है। सेना लगातार निगरानी कर रही है और किसी भी नए हमले का जवाब नए हथियारों और रणनीति से देने की तैयारी में है।
ईरान/अमेरिका वॉर: iran ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह मौजूदा हालात को सामान्य नहीं मान रहा। ईरानी सेना के प्रवक्ता ने सरकारी मीडिया से बातचीत में कहा कि देश अब भी “युद्ध जैसी स्थिति” में है और संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
प्रवक्ता के अनुसार, सेना और सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे का तुरंत जवाब दिया जा सके। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दुश्मन की ओर से कोई नई सैन्य कार्रवाई होती है, तो ईरान “नए हथियारों, नई रणनीतियों और नए मोर्चों” पर जवाब देगा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और मध्य पूर्व की स्थिति वैश्विक चिंता का विषय बनी हुई है।
अमेरिका की लंबी नाकेबंदी की तैयारी
रिपोर्टों के मुताबिक, donald_trump ने अपने अधिकारियों को ईरान के खिलाफ लंबे समय तक आर्थिक और समुद्री नाकेबंदी की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं।
बताया जा रहा है कि अमेरिका ईरान के बंदरगाहों तक जहाजों की पहुंच सीमित कर उसकी तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करना चाहता है। इस रणनीति का मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाना बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन का मानना है कि दोबारा बड़े सैन्य हमले की तुलना में आर्थिक दबाव और नाकेबंदी कम जोखिम वाला विकल्प हो सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना वैश्विक चिंता का केंद्र
मध्य पूर्व का रणनीतिक समुद्री मार्ग strait_of_hormuz एक बार फिर वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार के केंद्र में आ गया है।
ईरान ने संकेत दिया है कि जब तक उस पर लगी पाबंदियां नहीं हटतीं, तब तक वह इस समुद्री मार्ग पर नियंत्रण बनाए रख सकता है। दूसरी ओर अमेरिका चाहता है कि पहले व्यापक समझौता हो, उसके बाद ही प्रतिबंधों में राहत दी जाए।
विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक तेल कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है।
तेल की कीमतों में लगातार उछाल
तनाव बढ़ने के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड का भाव 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मध्य पूर्व में स्थिति और बिगड़ती है, तो तेल की कीमतों में और तेजी देखी जा सकती है।

ईरान की अर्थव्यवस्था पर युद्ध का असर
ईरानी सरकार ने स्वीकार किया है कि संघर्ष के कारण देश में करीब 10 लाख नौकरियां खत्म हो चुकी हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहे, तो करोड़ों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
व्यापार, ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं।
परमाणु कार्यक्रम पर अटका विवाद
ईरान और अमेरिका के बीच सबसे बड़ा विवाद परमाणु कार्यक्रम को लेकर बना हुआ है।
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद करे, जबकि ईरान सीमित अवधि के लिए प्रतिबंधों की बात करता है। इसके अलावा अमेरिका ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को नियंत्रण में लेने की मांग कर रहा है, जिसे तेहरान ने खारिज कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी international_atomic_energy_agency की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के पास बड़ी मात्रा में एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे और अधिक शुद्ध किया गया, तो परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल की जा सकती है।
क्षेत्रीय प्रभाव और वैश्विक कूटनीति
ईरान पर अमेरिका का दबाव केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। वॉशिंगटन चाहता है कि ईरान क्षेत्रीय सहयोगी समूहों के समर्थन और मिसाइल कार्यक्रम को भी सीमित करे।
वहीं ईरान ने अमेरिका और इजराइल पर युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा मांगते हुए अरबों डॉलर के हर्जाने की बात कही है।
इस बीच, ईरान के पूर्व शाही परिवार से जुड़े रेजा पहलवी ने मौजूदा शासन पर दबाव बढ़ाने की वकालत की है, जिससे देश की आंतरिक राजनीति भी चर्चा में आ गई है।









