ईरान-इजरायल तनाव का बाजार पर दिखा असर, बजाज फाइनेंस के शेयर मार्च में 18% तक गिरे

ईरान-इजरायल तनाव का असर शेयर बाजार पर दिखा। बजाज फाइनेंस के शेयर मार्च में करीब 18% तक गिर गए। जानें बाजार में गिरावट की वजह और एक्सपर्ट की राय।

बजाज फाइनेंस के शेयरों का इन दिनों हाल बेहाल है। शुक्रवार को भी कंपनी के शेयर लगातार दूसरे सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। मार्च महीने में अब तक बजाज फाइनेंस के शेयर करीब 18 प्रतिशत तक टूट चुके हैं, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ है।

Bajaj Finance Share: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक शेयर बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच भारतीय शेयर बाजार में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसका सबसे बड़ा असर भारत की प्रमुख फाइनेंशियल कंपनी Bajaj Finance के शेयरों पर पड़ा है, जो मार्च 2026 में अब तक लगभग 18 प्रतिशत तक गिर चुके हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध की स्थिति, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशकों में डर का माहौल बना हुआ है, जिसके चलते फाइनेंशियल और बैंकिंग सेक्टर में तेज बिकवाली देखी जा रही है।

लगातार गिर रहे हैं बजाज फाइनेंस के शेयर

शेयर बाजार में हाल के सत्रों में बजाज फाइनेंस के शेयरों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार को भी कंपनी के शेयर दूसरे दिन नुकसान के साथ बंद हुए। मार्च महीने की शुरुआत से अब तक शेयर की कीमतों में लगभग 18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी का शेयर हाल ही में अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। इससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि बजाज फाइनेंस को लंबे समय से मजबूत प्रदर्शन करने वाली कंपनी माना जाता रहा है।

शेयरों में गिरावट के कारण कंपनी के मार्केट कैपिटलाइजेशन में भारी कमी आई है। अनुमान है कि ईरान-इजरायल संघर्ष शुरू होने के बाद से कंपनी के बाजार मूल्य में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ता है, तो निवेशक जोखिम वाले निवेश से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर जाते हैं। इसी वजह से फाइनेंस और बैंकिंग कंपनियों के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ता है।

युद्ध का असर तेल और गैस कीमतों पर

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है। ईरान और आसपास के क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादक क्षेत्रों में से एक हैं। किसी भी सैन्य तनाव का सीधा असर ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ता है। तेल की कीमत बढ़ने से भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है। इससे महंगाई, व्यापार घाटा और मुद्रा विनिमय दर पर असर पड़ता है, जो शेयर बाजार को कमजोर करता है।

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी Moody's Ratings ने चेतावनी दी है कि यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा चलता है और ऊर्जा कीमतें बढ़ती रहती हैं, तो भारत की अर्थव्यवस्था पर कई तरह का दबाव आ सकता है। एजेंसी के अनुसार:

  • महंगे ऊर्जा आयात से रुपये पर दबाव बढ़ेगा
  • महंगाई दर में वृद्धि हो सकती है
  • चालू खाता घाटा बढ़ सकता है
  • सरकार को सब्सिडी बढ़ानी पड़ सकती है
  • इससे वित्तीय और मौद्रिक नीति दोनों पर असर पड़ेगा

इन परिस्थितियों में निवेशकों का भरोसा कमजोर हो सकता है, जिससे शेयर बाजार में और गिरावट आ सकती है।

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