ईरान की रक्षा में मोहम्मद अली जाफरी की मोजेक डिफेंस रणनीति का अहम योगदान, अमेरिका-इजराइल के लिए बना चुनौती

मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफरी ने ईरान की मोजेक डिफेंस रणनीति बनाई, जो अमेरिकी और इजराइली हमलों के बीच देश को जवाबी कार्रवाई में सक्षम बनाती है।

ईरान की 'मोजेक डिफेंस' रणनीति वरिष्ठ जनरल मोहम्मद अली जाफरी ने विकसित की। यह प्रणाली सेना को कई हिस्सों में बांटकर अमेरिकी और इजराइली हमलों के बावजूद ईरान को जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता देती है और कमांड सुरक्षित रहती है।

Iran News: ईरान ने अमेरिका और इज़राइल के हवाई हमलों के बावजूद जवाबी कार्रवाई करने की अपनी क्षमता बनाए रखी है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी सफलता के पीछे ईरान की विशेष सैन्य रणनीति 'मोजेक डिफेंस' है, जिसे वरिष्ठ ईरानी रणनीतिकार मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफरी ने विकसित किया है।

जाफरी का सैन्य करियर 

मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफरी को ईरान की 'मोजेक डिफेंस' रणनीति का मुख्य वास्तुकार माना जाता है। वे 2007 से 2019 तक इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स (IRGC) के प्रमुख रहे, जिसे ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य इकाई माना जाता है।

इस्लामिक क्रांति के बाद जाफरी ने कुर्दिस्तान क्षेत्र में खुफिया इकाई में काम शुरू किया और बाद में देश की सैन्य रणनीति को नया रूप देने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने ईरान-इराक युद्ध में भी हिस्सा लिया और धीरे-धीरे IRGC में ऊंचे पदों तक पहुंचे। 1992 में उन्हें IRGC की जमीनी सेना का कमांडर बनाया गया और बाद में संगठन की विशेष यूनिट 'सरअल्लाह' का नेतृत्व भी मिला।

ईरान की रक्षा में मोहम्मद अली जाफरी की मोजेक डिफेंस रणनीति का अहम योगदान, अमेरिका-इजराइल के लिए बना चुनौती

2005 में जाफरी को IRGC के रणनीतिक अध्ययन केंद्र का निदेशक बनाया गया। उन्होंने इस पद पर रहते हुए ईरान-इराक युद्ध और 2003 में अमेरिका के नेतृत्व में इराक पर हमले से सबक लेकर 'मोजेक डिफेंस' की अवधारणा तैयार की।

मोजेक डिफेंस रणनीति क्या है

'मोजेक डिफेंस' एक विशेष सैन्य रणनीति है, जिसमें पूरे रक्षा ढांचे को कई क्षेत्रीय और अर्ध-स्वतंत्र हिस्सों में बांटा जाता है। इसमें IRGC, बसीज बल, नियमित सेना, मिसाइल यूनिट, नौसेना और स्थानीय कमांड मिलकर एक बिखरी हुई लेकिन मजबूत व्यवस्था बनाते हैं।

इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य यह है कि अगर किसी एक हिस्से पर हमला होता है या शीर्ष नेतृत्व समाप्त हो जाता है, तब भी बाकी सैन्य इकाइयां युद्ध जारी रख सकें। दूसरे शब्दों में, ईरान की कमांड व्यवस्था को पूरी तरह नष्ट करना दुश्मन के लिए मुश्किल हो जाता है।

दूसरा लक्ष्य युद्ध के मैदान को जटिल बनाना है ताकि किसी भी शक्तिशाली देश के लिए युद्ध को जल्दी समाप्त करना आसान न हो। इस मॉडल में यह भी माना गया है कि यदि केंद्रीय नियंत्रण टूट भी जाए, तब भी क्षेत्रीय इकाइयां स्वतंत्र रूप से लड़ाई जारी रख सकती हैं।

रणनीति को अपनाने की वजह

ईरान की रक्षा में मोहम्मद अली जाफरी की मोजेक डिफेंस रणनीति का अहम योगदान, अमेरिका-इजराइल के लिए बना चुनौती

मोजेक डिफेंस की रणनीति अमेरिकी और इज़राइली हमलों से मिली सीख पर आधारित है। अमेरिका ने 2001 में अफगानिस्तान और 2003 में इराक पर हमला किया। इराक में सद्दाम हुसैन की सरकार का तेजी से गिरना ईरान के लिए बड़ा सबक था। इसके बाद ईरान ने अपनी सेना को केंद्रीकृत रखने के बजाय अलग-अलग हिस्सों में मजबूत करने की रणनीति अपनाई।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के अनुसार यह रणनीति दो दशकों के अध्ययन का परिणाम है। इसमें अमेरिका की सैन्य हारों और उनकी कमजोरियों से सीख लेकर ईरान की सुरक्षा ढांचे को मजबूत बनाया गया। उन्होंने कहा कि 'मोजेक डिफेंस' की वजह से युद्ध कब और कैसे खत्म होगा, इसका फैसला ईरान खुद कर सकता है।

अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बीच ईरान की प्रतिक्रिया

जब अमेरिका और इज़राइल ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत बड़े हवाई हमले शुरू किए, तो उम्मीद थी कि तेहरान की सरकार जल्दी बदल सकती है। लेकिन युद्ध शुरू होने के करीब दो हफ्ते बाद भी ईरान की इस्लामिक सरकार जवाबी कार्रवाई कर रही है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह क्षमता मोजेक डिफेंस रणनीति के कारण है। ईरान के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी स्थिति में देश अपनी सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमले जारी रख सके।

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