US-Israel Iran War के दौरान ईरान की लोकप्रिय धार्मिक ऐप BadeSaba को हैक कर लिया गया, जिससे यूजर्स को हथियार छोड़ने और मदद करने के संदेश भेजे गए। यह हमला साइबर युद्ध का हिस्सा माना जा रहा है। करीब 50 लाख डाउनलोड वाली ऐप पर विश्वास के कारण यह हमला संवेदनशील और प्रभावशाली साबित हुआ।
US-Israel Iran War: ईरान में लोकप्रिय धार्मिक ऐप BadeSaba को फरवरी के अंत में हैक किया गया। इस ऐप के जरिए यूजर्स को नमाज के समय और इस्लामिक कैलेंडर की जानकारी मिलती थी। हैकर्स ने संदेश भेजकर लोगों से हथियार छोड़ने और नागरिकों की मदद करने की अपील की। इस घटना ने ईरान में लाखों उपयोगकर्ताओं के बीच भ्रम और डर पैदा किया और साइबर फ्रंट पर युद्ध की नई चुनौती सामने ला दी।
ईरान में BadeSaba ऐप हुआ हैक
US-Israel Iran War के बीच ईरान की लोकप्रिय धार्मिक ऐप BadeSaba को हैक कर लिया गया। इस ऐप के जरिए यूजर्स को नमाज के समय और इस्लामिक कैलेंडर की जानकारी मिलती थी। फरवरी के अंत में हैकर्स ने इस ऐप पर लोगों को हथियार छोड़ने और मदद करने के मैसेज भेजे, जिससे लाखों यूजर्स के बीच भ्रम और डर फैल गया।
इस घटना को साइबर युद्ध का हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिकी और इजरायली पक्ष ईरान पर डिजिटल फ्रंट से भी दबाव बना रहे हैं। BadeSaba ऐप पर करीब 50 लाख डाउनलोड थे, इसलिए इसके माध्यम से संदेश फैलाना प्रभावी और संवेदनशील माना गया।

BadeSaba ऐप की कार्यप्रणाली और हैक का असर
BadeSaba ऐप एक धार्मिक कैलेंडर की तरह काम करती थी और यूजर्स को दिन में पांच वक्त की नमाज के अलर्ट भेजती थी। इसके अलावा अन्य धार्मिक अवसरों की जानकारी भी यूजर्स तक पहुंचती थी।
हैकिंग के दौरान हैकर्स ने नोटिफिकेशन के जरिए संदेश भेजे कि जो लोग ईरानी नागरिकों की मदद करेंगे उन्हें माफ कर दिया जाएगा। इसके बाद हथियार छोड़ने और सेना से सहयोग करने के लिए भी संदेश भेजे गए। इस कारण ऐप को भरोसेमंद और संवेदनशील माध्यम माना गया।
साइबर युद्ध और संभावित कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि BadeSaba ऐप को हैक करने का मुख्य मकसद ईरानी शासन समर्थकों के बीच भ्रम और दबाव फैलाना था। इस ऐप के माध्यम से संदेश भेजना आसान था, क्योंकि यूजर्स इसे धार्मिक आधार पर पूरी तरह भरोसेमंद मानते थे।
हैकिंग की जिम्मेदारी इजरायली हैकर्स पर भी मानी जा रही है, क्योंकि ऐप ईरानी नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण था। साइबर फ्रंट पर यह हमला US-Israel Iran War में डिजिटल नियंत्रण की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।











