सरकार ने कहा कि नए लेबर कोड लागू होने के बाद भी EPFO नियम तुरंत नहीं बदलेंगे। PF, पेंशन और सोशल सिक्योरिटी योजनाएं जारी रहेंगी। कर्मचारियों को पर्याप्त समय और जानकारी के साथ बदलाव समझने का अवसर मिलेगा।
EPFO Rules: केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि न्यू लेबर कोड (Labour Codes) लागू होने के बाद भी EPFO यानी कर्मचारी भविष्य निधि (Provident Fund) के नियमों में अचानक या बड़े बदलाव नहीं होंगे। राज्यसभा में लिखित जवाब में श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने बताया कि फिलहाल सरकार का इरादा मौजूदा EPFO नियमों में कोई तत्काल फेरबदल करने का नहीं है।
यह जानकारी करोड़ों वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि पिछले कुछ समय से सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के लागू होने के बाद उनके PF, पेंशन और रिटायरमेंट फंड के नियमों को लेकर संशय बना हुआ था।
न्यू लेबर कोड और EPFO का भविष्य
भारत सरकार ने पुराने और जटिल श्रम कानूनों को समेटकर चार नए लेबर कोड तैयार किए हैं। इनमें कोड ऑन वेजेस (2019), इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (2020), ऑक्यूपेशनल सेफ्टी कोड (2020) और सोशल सिक्योरिटी कोड (2020) शामिल हैं। इनमें से सोशल सिक्योरिटी कोड सीधे तौर पर कर्मचारियों के भविष्य निधि और अन्य लाभों को प्रभावित करता है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नया कोड लागू होने के बाद भी मौजूदा EPFO योजनाएं तुरंत खत्म नहीं होंगी। सोशल सिक्योरिटी कोड के सेक्शन 164(2)(B) के अनुसार, नए कानून के लागू होने के कम से कम एक साल तक पुरानी EPFO स्कीम्स पहले की तरह जारी रहेंगी, बशर्ते वे नए नियमों से टकराती न हों।
सरकार पुरानी व्यवस्था से नई व्यवस्था में बदलाव को धीरे-धीरे लागू करना चाहती है, ताकि कर्मचारी इसे समझ सकें और इसके लिए तैयार हो सकें। फिलहाल चारों लेबर कोड्स के नियमों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके लिए आम लोगों, एक्सपर्ट्स और संबंधित पक्षों से सुझाव भी लिए जा रहे हैं।
सोशल सिक्योरिटी का बढ़ता दायरा
नए लेबर कोड में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि सामाजिक सुरक्षा अब सिर्फ संगठित क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी। PF, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाएं अब गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स तक भी लागू होंगी। उदाहरण के लिए जोमैटो-स्विगी के डिलीवरी पार्टनर्स और ओला-उबर के ड्राइवर्स भी अब सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आएंगे।
इसके अलावा फिक्स्ड-टर्म यानी निश्चित अवधि तक काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी के नियमों में भी बदलाव हुआ है। पहले ग्रेच्युटी पाने के लिए पांच साल की लगातार नौकरी जरूरी थी, लेकिन नए नियमों के तहत केवल एक साल तक लगातार काम करने वाले कर्मचारी भी ग्रेच्युटी के हकदार बन सकेंगे। सरकार का उद्देश्य यह है कि असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को भी जीवन बीमा, स्वास्थ्य सुविधाएं और रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
PF में ब्याज कैसे तय होता है
कर्मचारियों में अक्सर यह सवाल रहता है कि PF खाते में जमा धन पर ब्याज दर कैसे तय होती है। राज्यसभा में सांसद पी. संदोष कुमार के सवाल के जवाब में मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि EPF जमा पर ब्याज दर कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952 के पैरा 60(1) के तहत तय की जाती है।
इस प्रक्रिया का केंद्र ‘सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज’ (CBT) होता है। यह EPFO की सबसे बड़ी निर्णय लेने वाली संस्था है, जिसमें सरकार के प्रतिनिधियों के साथ-साथ कंपनियों के मालिक और कर्मचारियों के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं। CBT अपनी सिफारिशें सरकार को भेजता है और सरकार अंतिम ब्याज दर तय करती है।
EPFO का यह भी नियम है कि ब्याज देते समय खाता घाटे में न जाए। सरल शब्दों में कहें तो EPFO अपने निवेश से जो कमाई करता है, उसी के आधार पर मेंबर्स को ब्याज दिया जाता है, ताकि संस्था की आर्थिक स्थिरता बनी रहे।
कर्मचारियों के लिए राहत
सरकार का बयान कर्मचारियों के लिए राहत का संकेत है। इससे स्पष्ट हो गया कि PF और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ अचानक बदलने वाले नहीं हैं। नए नियम लागू होते समय कर्मचारियों को पर्याप्त समय और जानकारी दी जाएगी। इससे वे आसानी से बदलाव को समझ सकेंगे और अपनी बचत और रिटायरमेंट योजना को सुरक्षित रख सकेंगे।











