जेफ्री एप्स्टीन से जुड़े नए दस्तावेज सामने आने के बाद ब्रिटेन की राजनीति में भूचाल आ गया है। लेबर नेता पीटर मैंडलसन की नियुक्ति को लेकर विवाद बढ़ा, जिससे प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर की सरकार पर संकट गहरा गया बताया गया।
British Politics: ब्रिटेन की राजनीति इस समय एक बड़े भूचाल से गुजर रही है। यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन से जुड़े नए खुलासों ने प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर की सरकार को संकट में डाल दिया है। हालांकि स्टार्मर का नाम सीधे तौर पर एप्स्टीन से कभी नहीं जुड़ा, लेकिन उनके एक फैसले ने उनकी कुर्सी को खतरे में डाल दिया है। यह फैसला है लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेता पीटर मैंडलसन की नियुक्ति, जिनके एप्स्टीन से संबंध अब फिर चर्चा में हैं।
जेफ्री एप्स्टीन केस की पुरानी परछाई
जेफ्री एप्स्टीन का नाम दुनिया के सबसे बड़े यौन अपराध मामलों में शामिल रहा है। अमेरिका से लेकर ब्रिटेन तक कई प्रभावशाली हस्तियों के साथ उसके संबंध सामने आ चुके हैं। ब्रिटेन के पूर्व राजकुमार एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर और अमेरिका में ब्रिटिश राजदूत रह चुके पीटर मैंडलसन पर पहले ही एप्स्टीन से दोस्ती के आरोप लग चुके हैं। अब इन्हीं कड़ियों ने ब्रिटेन के मौजूदा प्रधानमंत्री को राजनीतिक संकट में डाल दिया है।
केअर स्टार्मर और विवाद की शुरुआत
प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने कभी भी जेफ्री एप्स्टीन से मिलने की बात से इनकार किया है। इसके बावजूद विवाद इसलिए खड़ा हुआ क्योंकि उन्होंने साल 2024 में पीटर मैंडलसन को अहम जिम्मेदारी दी थी। उस समय भी एप्स्टीन से जुड़े सवाल उठे थे, लेकिन स्टार्मर ने उन पर भरोसा किया। अब नए दस्तावेज सामने आने के बाद यह भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गया है।
नए दस्तावेजों से मचा राजनीतिक हड़कंप
हाल ही में जारी हुए कुछ दस्तावेजों में पीटर मैंडलसन और जेफ्री एप्स्टीन के करीबी संबंधों के संकेत मिले हैं। इन दस्तावेजों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मैंडलसन ने अपने अतीत को लेकर झूठ बोला था। इसी बिंदु पर प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है, क्योंकि उन्होंने इन दावों के बावजूद मैंडलसन को नियुक्त किया था।
मैंडलसन को हटाने का फैसला
जैसे ही एप्स्टीन से दोस्ती को लेकर तथ्य सामने आए, स्टार्मर ने पीटर मैंडलसन को पद से हटा दिया। लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था। विपक्ष और खुद लेबर पार्टी के भीतर यह सवाल उठने लगा कि प्रधानमंत्री ने पहले इन आरोपों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया। यह मामला अब सिर्फ एक नियुक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकार की नैतिकता और निर्णय क्षमता पर बहस छिड़ गई है।

पीड़ितों से प्रधानमंत्री की सार्वजनिक माफी
गुरुवार को केअर स्टार्मर ने जेफ्री एप्स्टीन के अपराधों के पीड़ितों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि वह इस बात के लिए माफी मांगते हैं कि ताकतवर लोगों ने पीड़ितों का शोषण किया। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पीटर मैंडलसन ने लगातार झूठ बोला और यह दिखाने की कोशिश की कि वह एप्स्टीन को नहीं जानते।
स्टार्मर का भावुक बयान
स्टार्मर ने पीड़ितों से कहा कि मैंडलसन के झूठ पर भरोसा करने और उन्हें नियुक्त करने के लिए वह माफी मांगते हैं। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद है कि पीड़ितों को यह सब कुछ एक बार फिर सार्वजनिक होते हुए देखना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री का यह बयान भावुक जरूर था, लेकिन इससे राजनीतिक नुकसान कम नहीं हुआ।
सरकार गिरने की अटकलें तेज
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केअर स्टार्मर की सरकार के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। मैनचेस्टर विश्वविद्यालय में राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर रॉब फोर्ड ने कहा कि प्रधानमंत्री फिलहाल गंभीर मुश्किलों में घिरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि आज नहीं तो कल उनकी सरकार गिर सकती है। भले ही सरकार कुछ समय और टिक जाए, लेकिन स्टार्मर की प्रतिष्ठा को गहरी चोट लगी है।
लेबर पार्टी के भीतर बढ़ता दबाव
इस विवाद के बाद लेबर पार्टी के भीतर भी असंतोष बढ़ता जा रहा है। पार्टी के कई सांसद खुलकर सवाल उठा रहे हैं कि इतनी संवेदनशील जानकारी के बावजूद मैंडलसन को क्यों नियुक्त किया गया। सांसदों का मानना है कि इस फैसले ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया है और जनता के भरोसे को कमजोर किया है।
सांसद पाउला बार्कर की प्रतिक्रिया
लेबर पार्टी की सांसद पाउला बार्कर ने प्रधानमंत्री के फैसले पर सीधा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण ने यह दिखा दिया है कि प्रधानमंत्री का निर्णय संदिग्ध था। उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा कि स्टार्मर को जवाब देना होगा और जनता के बीच भरोसा दोबारा कायम करने के लिए उन्हें लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा।
जनता के भरोसे की सबसे बड़ी परीक्षा
ब्रिटेन की राजनीति में भरोसा सबसे अहम मुद्दा माना जाता है। इस केस ने न केवल प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत साख को चुनौती दी है, बल्कि पूरी लेबर पार्टी सरकार की नैतिक स्थिति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहा है और इसे सरकार की विफलता के तौर पर पेश कर रहा है।
क्या कुर्सी बचा पाएंगे केअर स्टार्मर
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केअर स्टार्मर अपनी कुर्सी बचा पाएंगे। फिलहाल उन्होंने माफी मांगकर और मैंडलसन को हटाकर नुकसान कम करने की कोशिश की है। लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में संसद और मीडिया में यह मुद्दा और तेज हो सकता है।









