चीन के खिलाफ यूरोपीय संघ का नया ट्रेड हथियार, कंपनियों को बाजार से बाहर करने की तैयारी

EU चीन की सस्ती वस्तुओं और अनुचित व्यापारिक प्रतिस्पर्धा से निपटने के लिए नए ट्रेड हथियार पर विचार कर रहा है। केमिकल, मशीनरी और पवन ऊर्जा क्षेत्र प्राथमिकता

यूरोपीय संघ चीन की कंपनियों के खिलाफ सख्त व्यापारिक कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित नए हथियार से जरूरत पड़ने पर कंपनियों को यूरोपीय बाजार से तेजी से बाहर किया जा सकेगा। केमिकल और मशीनरी क्षेत्र प्राथमिकता में हैं।

ब्रसेल्स: यूरोपीय संघ (EU) चीन से बढ़ती व्यापारिक प्रतिस्पर्धा का मुकाबला करने के लिए अपने व्यापारिक नियमों और सुरक्षा उपायों को अधिक प्रभावी बनाने पर विचार कर रहा है। ब्रसेल्स में गुरुवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में सदस्य देशों के नेताओं के सामने एक नए व्यापारिक उपकरण का प्रस्ताव रखा गया। इस प्रस्तावित व्यवस्था को अनौपचारिक रूप से ‘किल स्विच’ कहा जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों में यूरोपीय संघ को तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता देना है, जब किसी देश की व्यापारिक नीतियों या कंपनियों के व्यवहार से यूरोपीय बाजार में गंभीर असंतुलन पैदा हो।

प्रस्ताव के तहत यूरोपीय आयोग को जरूरत पड़ने पर चीनी कंपनियों की यूरोपीय बाजार तक पहुंच सीमित करने या उन्हें बाजार से बाहर करने के लिए अधिक अधिकार मिल सकते हैं। हालांकि, यह अभी प्रस्तावित व्यवस्था है। इसे लागू करने के लिए किन कानूनी प्रक्रियाओं और शर्तों की जरूरत होगी, यह स्पष्ट होना बाकी है।

बैठक में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने चीन के साथ व्यापारिक संबंधों पर चर्चा करते हुए घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, 27 सदस्य देशों के बीच इस दिशा में कार्रवाई को लेकर व्यापक समर्थन दिखाई दिया।

क्या है EU का प्रस्तावित ‘किल स्विच’?

प्रस्तावित ‘किल स्विच’ का मकसद यूरोपीय संघ को व्यापारिक असंतुलन और कथित अनुचित प्रतिस्पर्धा से निपटने के लिए अधिक तेज और प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध कराना है। फ्रांस और जर्मनी ने पिछले सप्ताह जारी एक संयुक्त प्रस्ताव में नए व्यापारिक हथियार की जरूरत उठाई थी।

मौजूदा व्यवस्था में किसी व्यापारिक विवाद की जांच पूरी होने और कार्रवाई का फैसला आने में कई महीने, यहां तक कि साल भी लग सकते हैं। इस दौरान संबंधित उद्योगों को नुकसान होने की आशंका रहती है। फ्रांस और जर्मनी चाहते हैं कि यूरोपीय संघ ऐसी प्रक्रिया विकसित करे, जिससे गंभीर मामलों में निर्णय लेने में लगने वाला समय कम किया जा सके।

यूरोपीय आयोग संघ की कार्यकारी संस्था है और साझा व्यापार नीति के संचालन में प्रमुख भूमिका निभाता है। नए उपकरण से आयोग की शक्तियां बढ़ सकती हैं, लेकिन इसका वास्तविक दायरा, कानूनी आधार और इस्तेमाल की शर्तें तय होना अभी बाकी है।

केमिकल और औद्योगिक मशीनरी क्षेत्र पर विशेष नजर

बैठक में वॉन डेर लेयेन ने उन उद्योगों की पहचान करने पर जोर दिया, जिन्हें चीनी आयात से बढ़ते दबाव के बीच सुरक्षा उपायों की जरूरत हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, केमिकल और औद्योगिक मशीनरी क्षेत्र को प्राथमिकता देने की बात कही गई।

यूरोपीय उद्योगों की चिंता यह है कि चीन से आने वाले कम कीमत वाले उत्पाद स्थानीय कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा कठिन बना सकते हैं। यदि घरेलू उत्पादक कीमतों की प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाते हैं, तो उनकी बिक्री, निवेश और रोजगार पर असर पड़ सकता है।

फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम और डेनमार्क सहित कुछ प्रभावशाली सदस्य देशों ने प्रस्तावित दिशा का समर्थन किया। चर्चा में पवन ऊर्जा उद्योग का भी उल्लेख हुआ, जहां चीनी उत्पादों से प्रतिस्पर्धा को लेकर यूरोपीय कंपनियों की चिंताएं सामने आई हैं।

हालांकि, कम कीमत वाले आयात अपने आप में अनुचित व्यापार का प्रमाण नहीं हैं। किसी भी प्रतिबंध या शुल्क के लिए संबंधित नियमों के तहत पर्याप्त आधार और जांच की जरूरत हो सकती है।

आयात पर सीमा और टैरिफ जैसे उपायों पर विचार

यूरोपीय संघ फिलहाल एक निगरानी व्यवस्था के जरिए कुछ क्षेत्रों में आयात के रुझानों का विश्लेषण कर रहा है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन उत्पादों का आयात तेजी से बढ़ रहा है और उससे स्थानीय उद्योगों पर कितना दबाव पड़ सकता है।

ऐसी स्थिति में संघ आयात कोटा, टैरिफ या अन्य सुरक्षा उपायों पर विचार कर सकता है। आयात कोटा किसी विशेष उत्पाद की निर्धारित अवधि में आने वाली मात्रा को सीमित करता है, जबकि टैरिफ आयातित सामान पर लगाया जाने वाला शुल्क होता है।

रिपोर्ट के अनुसार, सदस्य देशों के बीच इन उपायों को अपेक्षाकृत जल्दी लागू करने पर सहमति बनती दिखाई दी। विशेष रूप से उन उद्योगों के लिए कार्रवाई की मांग बढ़ी है, जिन्हें आयात में अचानक वृद्धि से नुकसान होने की आशंका है।

यूरोपीय संघ के नेताओं ने बैठक के निष्कर्षों में व्यापारिक असंतुलन से बेहतर तरीके से निपटने के लिए नए उपकरणों को तत्काल मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। इसका अर्थ है कि मौजूदा नियमों की समीक्षा और नई व्यवस्था विकसित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

चीन के खिलाफ यूरोपीय संघ का नया ट्रेड हथियार, कंपनियों को बाजार से बाहर करने की तैयारी

चीन से बातचीत जारी रखने की भी रणनीति

सख्त व्यापारिक कदमों पर चर्चा के बावजूद यूरोपीय संघ चीन के साथ बातचीत का रास्ता बंद नहीं करना चाहता। रिपोर्ट के अनुसार, सदस्य देशों ने दोहरी रणनीति का समर्थन किया है। इसके तहत एक ओर चीन के साथ व्यापारिक बातचीत जारी रहेगी, वहीं दूसरी ओर यूरोप अपने उद्योगों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध उपायों को मजबूत करेगा।

हाल के महीनों में दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत हुई है। रिपोर्ट में चीनी हाइब्रिड कारों के आयात को लेकर हुए समझौते का भी उल्लेख है, जिसके तहत 2027 से यूरोपीय संघ में ऐसे वाहनों का आयात सालाना 3.5 लाख तक सीमित रखने की बात कही गई है। इस व्यवस्था की सटीक शर्तें और लागू होने का तरीका संबंधित समझौते के आधिकारिक विवरण से स्पष्ट होगा।

यूरोपीय अधिकारियों का मानना है कि चीन के साथ बातचीत से कुछ मुद्दों पर प्रगति हो सकती है, लेकिन उद्योगों को तत्काल राहत देने के लिए कुछ मामलों में तेजी से कदम उठाना जरूरी है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पक्षों के व्यापार प्रमुखों के बीच जनवरी और मार्च में आगे की बैठकें निर्धारित हैं।

फ्रांस, जर्मनी और अन्य देशों का सख्त रुख

फ्रांस और जर्मनी के संयुक्त प्रस्ताव को इस चर्चा में खास महत्व मिला है। दोनों देश यूरोपीय संघ की आर्थिक और औद्योगिक नीति को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनके समर्थन से चीन के खिलाफ व्यापारिक सुरक्षा उपायों को आगे बढ़ाने की राजनीतिक संभावना मजबूत हो सकती है।

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा कि चीन के साथ संवाद और व्यापारिक समझौते महत्वपूर्ण हैं, लेकिन यूरोप को नियमों के पालन को लेकर दृढ़ रुख अपनाने के लिए तैयार रहना चाहिए।

लक्जमबर्ग के प्रधानमंत्री ल्यूक फ्रीडेन ने उन देशों के खिलाफ उचित कदम उठाने की जरूरत बताई, जो अपनी कंपनियों को अस्वीकार्य सरकारी सहायता देते हैं। उनका तर्क था कि मुक्त व्यापार का समर्थन करने का मतलब निष्पक्ष व्यापार की जरूरत को नजरअंदाज करना नहीं है।

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी संकेत दिया कि चीन के प्रति जर्मनी का अधिक सख्त रुख जारी रह सकता है। उन्होंने व्यापारिक उपकरणों के दायरे को बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल करने की बात कही।

यूरोप-चीन व्यापार संबंधों पर क्या होगा असर?

यूरोपीय संघ की नई पहल चीन और यूरोप के बीच व्यापारिक संबंधों में तनाव बढ़ा सकती है। दोनों पक्ष हाल ही में कुछ मुद्दों पर समझौते की दिशा में आगे बढ़े थे, लेकिन नए प्रतिबंधों या आयात सीमाओं की संभावना से विवाद दोबारा गहरा सकता है।

यूरोपीय कंपनियों के लिए सुरक्षा उपाय राहत दे सकते हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां उन्हें आयात से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, यदि व्यापारिक प्रतिबंध व्यापक हुए, तो यूरोपीय आयातकों, उद्योगों और उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ सकता है। चीन की संभावित प्रतिक्रिया भी व्यापारिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

फिलहाल, प्रस्तावित ‘किल स्विच’ को लागू करने के लिए ठोस नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं की जरूरत होगी। इसलिए इसे चीनी कंपनियों को तत्काल बाजार से बाहर करने का लागू आदेश नहीं, बल्कि यूरोपीय संघ की व्यापार नीति को अधिक आक्रामक और तेज बनाने की संभावित दिशा के रूप में देखना चाहिए।

आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यूरोपीय आयोग किन क्षेत्रों में जांच शुरू करता है, सुरक्षा उपायों का स्वरूप क्या होता है और चीन के साथ बातचीत से कितना समाधान निकल पाता है। फिलहाल, यूरोपीय संघ का संदेश स्पष्ट है: वह व्यापारिक संवाद जारी रखना चाहता है, लेकिन अपने उद्योगों की सुरक्षा के लिए नए कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटना चाहता।

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