फतेहपुर साइबर सेल ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी सफलता हासिल की है। फर्जी पहचान पत्रों के जरिए सिम कार्ड बेचने वाले दो पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) एजेंटों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश के वाराणसी में की गई, जहां से दोनों आरोपियों को दबोचा गया। पुलिस जांच में सामने आया है कि ये आरोपी लंबे समय से फर्जी आईडी के आधार पर सिम कार्ड जारी कर रहे थे और इन्हें सीधे साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा रहे थे।
फतेहपुर साइबर सेल को पिछले कुछ महीनों से लगातार ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, बैंक फ्रॉड और ओटीपी से जुड़ी शिकायतें मिल रही थीं। इन मामलों की जांच करने पर यह बात सामने आई कि ज्यादातर अपराधों में जिन मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल हो रहा है, वे फर्जी दस्तावेजों के जरिए जारी किए गए सिम कार्ड हैं। तकनीकी जांच, सर्विलांस और कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं, जिसके बाद वाराणसी में सक्रिय इन पीओएस एजेंटों की पहचान हुई।
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी सिम जारी करने के लिए असली लोगों के नाम पर फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य पहचान पत्रों का इस्तेमाल करते थे। कई बार एक ही व्यक्ति के नाम पर कई-कई सिम कार्ड एक्टिवेट कर दिए जाते थे। बाद में इन सिम कार्डों को साइबर अपराधियों को सौंप दिया जाता था, जो इनका उपयोग ऑनलाइन ठगी, फर्जी केवाईसी अपडेट कॉल, लोन और निवेश के नाम पर धोखाधड़ी, सोशल मीडिया फ्रॉड और बैंकिंग अपराधों में करते थे। इससे आम लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था।
पुलिस ने आरोपियों के पास से कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड, फर्जी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। शुरुआती पूछताछ में यह भी संकेत मिले हैं कि यह गिरोह सिर्फ फतेहपुर या वाराणसी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अन्य जिलों और राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। साइबर सेल अब यह पता लगाने में जुटी है कि अब तक कितने सिम कार्ड फर्जी तरीके से जारी किए गए और किन-किन साइबर अपराधियों तक ये सिम पहुंचे।
अधिकारियों का कहना है कि फर्जी सिम कार्ड साइबर अपराध की सबसे बड़ी कड़ी बन चुके हैं। अपराधी इन्हीं सिम के जरिए अपनी पहचान छिपाकर ठगी को अंजाम देते हैं, जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से अब पीओएस एजेंटों और सिम बिक्री से जुड़े लोगों की गतिविधियों पर सख्त नजर रखी जा रही है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फतेहपुर साइबर सेल ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने पहचान पत्र किसी को भी न दें और यह समय-समय पर जांच करते रहें कि उनके नाम पर कितने सिम कार्ड सक्रिय हैं। यदि किसी को शक हो कि उसके नाम पर बिना जानकारी के सिम जारी किया गया है, तो तुरंत पुलिस या संबंधित टेलीकॉम कंपनी से संपर्क करें।
कुल मिलाकर, फर्जी आईडी से सिम बेचने वाले पीओएस एजेंटों की गिरफ्तारी को साइबर अपराध के खिलाफ एक अहम कामयाबी माना जा रहा है। इस कार्रवाई से न सिर्फ साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर असर पड़ेगा, बल्कि यह भी साफ संदेश जाएगा कि फर्जी सिम के जरिए अपराध को बढ़ावा देने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।










