500 सरकारी कर्मचारी और 100 फौजी, फतेहाबाद का नहला गांव बना सफलता की मिसाल{9local)

फतेहाबाद का नहला गांव शिक्षा और रोजगार में मिसाल बना है। यहां से 500 से अधिक सरकारी कर्मचारी और करीब 100 सैनिक व पूर्व सैनिक देशसेवा कर रहे हैं।

हरियाणा के फतेहाबाद जिले का नहला गांव सरकारी नौकरियों, सेना और प्रशासनिक सेवाओं में उल्लेखनीय योगदान के लिए चर्चा में है। करीब 18 हजार आबादी वाले इस गांव से 500 से अधिक सरकारी कर्मचारी और बड़ी संख्या में सैन्य अधिकारी व जवान निकल चुके हैं।

फतेहाबाद: हरियाणा का नहला गांव आज शिक्षा, सरकारी नौकरियों और सैन्य सेवाओं के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुका है। लगभग 18 हजार की आबादी वाले इस गांव ने वर्षों से प्रशासन, सेना और विभिन्न सरकारी विभागों को बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी दिए हैं। यही वजह है कि नहला को अब सरकारी नौकरियों का गढ़ कहा जाने लगा है।

शिक्षा और सरकारी नौकरियों से बनी नई पहचान

फतेहाबाद जिले का नहला गांव आज पूरे हरियाणा में प्रेरणा का केंद्र बनकर उभरा है। गांव की पहचान केवल उसकी आबादी या भौगोलिक स्थिति से नहीं, बल्कि यहां के युवाओं की उपलब्धियों से बनती है। लगभग 18 हजार आबादी और 7600 मतदाताओं वाले इस गांव में शिक्षा के प्रति विशेष जागरूकता देखने को मिलती है। इसी का परिणाम है कि यहां से करीब 500 लोग विभिन्न सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे हैं।

ग्रामीणों का मानना है कि शिक्षा को प्राथमिकता देने की परंपरा ने गांव के सामाजिक और आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाई है। वर्षों से परिवार अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए प्रेरित करते रहे हैं, जिससे सरकारी सेवाओं में चयन का सिलसिला लगातार बढ़ता गया।

सेना और प्रशासनिक सेवाओं में मजबूत उपस्थिति

नहला गांव की पहचान केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। यहां के युवाओं ने भारतीय सेना में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। गांव में 50 से अधिक पूर्व सैनिक हैं, जबकि करीब 50 जवान वर्तमान में सेना में सेवाएं दे रहे हैं। इससे गांव में देशभक्ति और अनुशासन की मजबूत परंपरा दिखाई देती है।

प्रशासनिक सेवाओं में भी गांव ने कई बड़े अधिकारी दिए हैं। गांव के पीके चौधरी हरियाणा सरकार में मुख्य सचिव जैसे शीर्ष पद तक पहुंचे। वहीं बलवान सिंह ने आईएएस अधिकारी के रूप में जिला उपायुक्त पद तक सेवाएं दीं। इसके अलावा आईपीएस अधिकारी बलबीर सिंह बैनीवाल और सेना में कर्नल पद से सेवानिवृत्त सज्जन सिंह ने भी गांव का नाम रोशन किया।

गांव से शिक्षा, पुलिस, इंजीनियरिंग और प्रशासनिक क्षेत्रों में कई अन्य अधिकारी भी निकले हैं, जिन्होंने विभिन्न विभागों में उच्च पदों पर कार्य किया है।

राजनीतिक जागरूकता ने बदली सोच

ग्रामीणों के अनुसार गांव में शिक्षा और विकास की दिशा में बड़ा बदलाव 1967 के विधानसभा चुनावों के बाद देखने को मिला। उस दौर में राजनीतिक भागीदारी बढ़ी और लोगों में सामाजिक जागरूकता आई। इसके बाद गांव के परिवारों ने शिक्षा को सफलता का सबसे बड़ा माध्यम माना।

राजनीतिक चेतना के साथ-साथ पंचायतों ने भी विकास कार्यों को गति दी। समय-समय पर चुने गए सरपंचों ने गांव में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार और शिक्षा के माहौल को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

विकास सुविधाओं से लैस है गांव

नहला गांव आज बुनियादी सुविधाओं के मामले में भी काफी आगे माना जाता है। यहां 32 केवी बिजलीघर, स्टेडियम, सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कन्या विद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पशु अस्पताल और आधुनिक पेयजल योजनाएं संचालित हैं। गांव में आरओ आधारित पेयजल सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे लोगों को स्वच्छ पानी मिल रहा है।

गांव की पंचायत के पास लगभग 35 एकड़ भूमि है, जिसका उपयोग विभिन्न विकास कार्यों के लिए किया जाता है। सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए यहां कई चौपालें भी मौजूद हैं।

खेल और संस्कृति में भी बनाई पहचान

शिक्षा और सरकारी नौकरियों के साथ-साथ नहला गांव खेलों में भी अपनी पहचान रखता है। यहां के खिलाड़ियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर गांव का नाम प्रदेश स्तर तक पहुंचाया है। पहलवान दाना और खिलाड़ी सुरेश कुमार जैसे नाम आज भी ग्रामीणों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं।

गांव में स्थित बाबा तीर्थनाथ मंदिर और ऐतिहासिक तालाब स्थानीय आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। ग्रामीणों का दावा है कि यहां मौजूद लगभग 300 वर्ष पुराना हरा झंड आज भी सुरक्षित खड़ा है, जो गांव की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है।

आज नहला गांव शिक्षा, रोजगार, सैन्य सेवा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि भविष्य में यहां लड़कियों के लिए कॉलेज, तकनीकी शिक्षण संस्थान और बेहतर सड़क सुविधाएं विकसित की जाएं, ताकि गांव की प्रगति का यह सफर और आगे बढ़ सके।

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