नई दिल्ली में नीति आयोग ने पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ पहली समर्पित बैठक की। इसमें विकास, नवाचार और चुनौतियों पर चर्चा हुई। अरुणाचल सीएम ने हाइड्रोपावर और सुशासन योजनाओं पर जोर देते हुए क्षेत्र को ‘विकसित भारत’ में अहम बताया।
नई दिल्ली: नीति आयोग ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए देश के सभी आठ पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों के साथ पहली विशेष और समर्पित संवाद बैठक आयोजित की। यह बैठक नई दिल्ली में हुई, जिसमें क्षेत्रीय विकास, नीति-निर्माण, प्रशासनिक सुधार और भविष्य की विकास रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस बैठक की अध्यक्षता नीति आयोग के नव-नियुक्त उपाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी ने की। उनके साथ आयोग के सदस्य और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) भी उपस्थित रहे। बैठक में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के मुख्य सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
पहली बार पूर्वोत्तर के लिए समर्पित संवाद: नीति आयोग का बड़ा कदम
अधिकारियों के अनुसार, यह पहली बार है जब नीति आयोग ने विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के साथ एक अलग और समर्पित संवाद आयोजित किया है। इस पहल को क्षेत्र के रणनीतिक महत्व और भारत के विकास मॉडल में इसकी बढ़ती भूमिका के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक में यह बात सामने आई कि पूर्वोत्तर क्षेत्र न केवल भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह प्राकृतिक संसाधनों, सांस्कृतिक विविधता और युवा जनसंख्या के कारण भारत के भविष्य के विकास इंजन के रूप में उभर रहा है।
‘विकसित भारत’ में पूर्वोत्तर की अहम भूमिका: मुख्यमंत्री पेमा खांडू
बैठक के दौरान अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत देश के ‘विकसित भारत’ (Viksit Bharat) के विजन को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता और प्रतिभाशाली मानव संसाधन इसे भारत की विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनाते हैं।
पेमा खांडू ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र अब तेजी से बदल रहा है और यह भारत की आर्थिक वृद्धि का एक मजबूत केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
अरुणाचल प्रदेश की विकास क्षमता और हाइड्रोपावर पर फोकस
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राज्य में जलविद्युत (Hydropower) के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जो न केवल राज्य बल्कि पूरे देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षमता का पूर्ण उपयोग करने के लिए मानव संसाधन विकास और कौशल निर्माण (Skill Development and Capacity Building) को और मजबूत करना आवश्यक है।
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खांडू ने जोर देकर कहा कि यदि सही नीति और निवेश के साथ काम किया जाए, तो अरुणाचल प्रदेश ऊर्जा उत्पादन और हरित विकास (Green Development) का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।
जन-सेवा आधारित शासन मॉडल पर जोर
मुख्यमंत्री ने बैठक में अरुणाचल प्रदेश सरकार की कई प्रमुख जन-केंद्रित योजनाओं का भी उल्लेख किया। इनमें “सरकार आपके द्वार”, “सेवा आपके द्वार” और “कैबिनेट आपके द्वार” जैसी पहल शामिल हैं।
इन योजनाओं का उद्देश्य प्रशासन को जनता के करीब लाना और सरकारी सेवाओं की डिलीवरी को तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन पहलों से जनता की शिकायतों का त्वरित समाधान संभव हुआ है और शासन व्यवस्था में भरोसा बढ़ा है।
पूर्वोत्तर राज्यों के बीच सहयोग और विकास पर चर्चा
बैठक में सभी आठ पूर्वोत्तर राज्यों—अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा—के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों की विकास प्राथमिकताओं, उपलब्धियों और चुनौतियों को साझा किया।
चर्चा के दौरान क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास, कनेक्टिविटी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और निवेश बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया।
अधिकारियों ने इस संवाद को “उत्पादक और परिणामोन्मुख” बताया, जिसमें भविष्य की नीति दिशा को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए।
नीति आयोग की भूमिका और आगे की रणनीति
नीति आयोग की सदस्य जोरम अणिया ने समापन सत्र में सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया और कहा कि राज्यों द्वारा साझा की गई प्रगति रिपोर्ट, उपलब्धियां और विकास प्राथमिकताएं बेहद महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि बैठक में उठाए गए मुद्दों और सुझावों को संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के साथ मिलकर आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि पूर्वोत्तर राज्यों के विकास को गति दी जा सके।
नीति आयोग ने यह स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में देख रही है और इसके लिए समन्वित प्रयास किए जाएंगे।
पूर्वोत्तर: भारत के भविष्य का उभरता विकास इंजन
विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत अब केवल एक सीमावर्ती क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक और रणनीतिक प्रगति का एक उभरता हुआ केंद्र बन रहा है।
इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति इसे दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ व्यापार और कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण बनाती है। साथ ही, यहां की प्राकृतिक संपदा और युवा आबादी इसे निवेश के लिए आकर्षक क्षेत्र बनाती है।









