विदेश से आने वाले चंदे से जुड़े ‘विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक’ (FCRA संशोधन विधेयक) की जांच के लिए 31 सदस्यों वाली संसदीय समिति का गठन किया गया है।
FCRA Bill: विदेशी चंदे से जुड़े नियमों में प्रस्तावित बदलावों की समीक्षा के लिए संसद ने 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति का गठन कर दिया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को समिति के सदस्यों के नामों की घोषणा की। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ सांसद संजय जायसवाल को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।
विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक यानी FCRA Amendment Bill को विस्तृत जांच और विभिन्न हितधारकों से विचार-विमर्श के लिए संसदीय समिति के पास भेजने का फैसला लगभग तीन सप्ताह पहले किया गया था। हालांकि, विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से समिति के लिए अपने सांसदों के नाम भेजने में हुई देरी के कारण इसके गठन में समय लगा।
समिति में NDA को बहुमत
31 सदस्यीय समिति में सत्तारूढ़ NDA के 19 सांसद शामिल हैं। समिति में लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य रखे गए हैं। विपक्षी दलों को भी इसमें प्रतिनिधित्व दिया गया है। समिति को संसद के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है। हालांकि, विधेयक से जुड़े विभिन्न पक्षों, संगठनों और विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श की आवश्यकता होने पर समिति के कार्यकाल को आगे बढ़ाया जा सकता है।
कांग्रेस ने समिति गठन का समर्थन किया
FCRA संशोधन विधेयक को लेकर विपक्षी दलों ने कई प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सहित विपक्ष के कुछ दलों ने खासतौर पर अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े प्रतिनिधियों को समिति में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। DMK समेत कुछ विपक्षी दलों ने विधेयक की आलोचना की है और ईसाई संगठनों की ओर से जताई जा रही चिंताओं को भी सामने रखा है। विपक्ष का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों का असर विदेशी फंडिंग पर निर्भर गैर-सरकारी संगठनों यानी NGOs पर पड़ सकता है।
सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज किया है। हालांकि, विधेयक पर व्यापक सहमति बनाने और इसके प्रावधानों की विस्तार से समीक्षा के लिए इसे संसदीय समिति के पास भेजने पर सहमति बनी।
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समिति में कौन-कौन सांसद शामिल?
FCRA Bill की समीक्षा करने वाली समिति में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के प्रमुख सांसदों को शामिल किया गया है। NDA की ओर से भर्तृहरि महताब, निशिकांत दुबे, तेजस्वी सूर्या, संजय झा, लवू श्रीकृष्ण और प्रफुल्ल पटेल जैसे सांसद समिति का हिस्सा हैं। विपक्ष की ओर से कांग्रेस के एंटो एंटनी, विरियाटो फर्नांडिस, हमदुल्ला सईद और क्रिस्टोफर मनिकम को जगह मिली है। DMK के पी. विल्सन, जो पेशे से वकील हैं और विधेयक के मुखर आलोचक रहे हैं, भी समिति में शामिल हैं।
इसके अलावा NCP (SP) की सुप्रिया सुले, TMC के कल्याण बनर्जी और मेनका गुरुस्वामी भी समिति के सदस्य हैं। कल्याण बनर्जी और मेनका गुरुस्वामी दोनों कानूनी मामलों के जानकार हैं।
FCRA Bill पर क्यों हो रहा है विवाद?
FCRA यानी Foreign Contribution Regulation Act भारत में विदेशी स्रोतों से मिलने वाले चंदे और योगदान को नियंत्रित करता है। प्रस्तावित संशोधन विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर राजनीतिक दलों, NGOs और अन्य हितधारकों के बीच बहस चल रही है। विधेयक के आलोचकों की प्रमुख आपत्ति उस प्रावधान को लेकर है, जिसके तहत किसी संगठन का FCRA लाइसेंस रद्द होने या उसका नवीनीकरण नहीं होने की स्थिति में सरकार को उसकी संपत्ति पर नियंत्रण से जुड़ी शक्तियां मिल सकती हैं।
विपक्ष और आलोचक आशंका जता रहे हैं कि ऐसे प्रावधानों से गैर-सरकारी संगठनों के कामकाज पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। उनका तर्क है कि विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है, लेकिन इसके साथ संस्थाओं की स्वतंत्रता का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि विधेयक का उद्देश्य विदेशी योगदान के नियमन को मजबूत करना और मौजूदा व्यवस्था में जरूरी सुधार करना है।










