कोतवाली के कारागार में होगा कृष्ण जन्म जैतूसाव मठ में 11 क्विंटल मालपुए का भोग; 101 लीटर दूध से अभिषेक इस्कॉन में 3 दिन महोत्सव

रायपुर में जन्माष्टमी पर कोतवाली के कारागार की झांकी में कृष्ण जन्म होगा। जैतूसाव मठ में 11 क्विंटल मालपुए का भोग और 101 लीटर दूध से अभिषेक होगा।
कोतवाली के कारागार में होगा कृष्ण जन्म जैतूसाव मठ में 11 क्विंटल मालपुए का भोग; 101 लीटर दूध से अभिषेक इस्कॉन में 3 दिन महोत्सव
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रायपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर रायपुर में मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस बार शहर में कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान अलग-अलग मंदिरों में आकर्षक झांकियां, विशेष पूजा-अर्चना और भोग की व्यवस्था की गई है। कहीं भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की झांकी कारागार के रूप में तैयार की जाएगी, तो कहीं हजारों किलो मिठाई और मालपुए का भोग लगाया जाएगा। इस्कॉन मंदिर में भी जन्माष्टमी को लेकर तीन दिन तक विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

पुरानी बस्ती स्थित जैतूसाव मठ में जन्माष्टमी का आयोजन खास आकर्षण का केंद्र रहने वाला है। यहां भगवान श्रीकृष्ण को 11 क्विंटल मालपुए का भोग लगाया जाएगा। इसके अलावा भगवान के अभिषेक के लिए 101 लीटर दूध का इंतजाम किया गया है। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर में विशेष श्रृंगार, पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन होगा। इतनी बड़ी मात्रा में प्रसाद तैयार करने के लिए मंदिर से जुड़े श्रद्धालु और सेवक पहले से तैयारियों में जुटे हैं। 11 क्विंटल मालपुए के भोग का उल्लेख रायपुर के जन्माष्टमी आयोजनों की रिपोर्टों में भी मिलता है।

भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा को जीवंत करने के लिए शहर के कई मंदिरों में कारागार की झांकी बनाई जा रही है। मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा की जेल में देवकी और वसुदेव के यहां हुआ था। इसी प्रसंग को ध्यान में रखते हुए जन्माष्टमी की रात कारागार जैसी झांकी तैयार की जाएगी। मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के समय विशेष पूजा और आरती होगी।

जन्म के समय मंदिरों में शंख और घंटियों की गूंज के बीच भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन कराए जाएंगे। श्रद्धालु भगवान को माखन-मिश्री, दूध, दही, फल, मिठाई और अन्य प्रसाद अर्पित करेंगे। जन्मोत्सव के बाद भक्तों के बीच प्रसाद वितरण भी किया जाएगा।

जैतूसाव मठ में मालपुए का विशेष भोग इस आयोजन की सबसे खास बातों में से एक है। भगवान कृष्ण को मालपुआ बेहद प्रिय प्रसादों में शामिल माना जाता है, इसलिए जन्माष्टमी पर बड़ी मात्रा में इसे तैयार कराया जाता है। जैतूसाव मठ में इस बार 11 क्विंटल मालपुआ तैयार करने की योजना है। इसे श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में भी वितरित किया जाएगा।

वहीं भगवान के अभिषेक के लिए 101 लीटर दूध की व्यवस्था की गई है। जन्माष्टमी की रात विशेष अभिषेक के दौरान दूध समेत अन्य पूजन सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। मंदिर परिसर में इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

रायपुर के इस्कॉन मंदिर में भी जन्माष्टमी को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। यहां तीन दिन तक चलने वाले महोत्सव में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ भजन-कीर्तन और भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना होगी। रिपोर्टों के मुताबिक इस आयोजन में भी 11 क्विंटल मालपुए समेत अन्य प्रसाद की व्यवस्था की गई है।

जन्माष्टमी के दिन इस्कॉन मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो जाएगी। भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर परिसर को फूलों और रोशनी से सजाया जाएगा। शाम होते ही भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का दौर तेज होगा। रात में भगवान के जन्म के समय विशेष आरती और पूजा होगी।

शहर के अन्य मंदिरों में भी जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां चल रही हैं। कई जगह भगवान कृष्ण और राधा की झांकियां बनाई जा रही हैं। मंदिरों में आकर्षक विद्युत सजावट की जा रही है। बच्चों के लिए कृष्ण और राधा के रूप में तैयार होने के लिए बाजारों में मुकुट, बांसुरी और पोशाकों की भी खरीदारी की जा रही है।

जन्माष्टमी की रात मंदिरों में भगवान कृष्ण के जन्म का प्रसंग विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। कारागार की झांकी में देवकी-वसुदेव और बाल कृष्ण के जन्म का दृश्य दिखाने की तैयारी है। श्रद्धालुओं को भगवान कृष्ण के जन्म की कथा और उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों को झांकी के माध्यम से देखने का अवसर मिलेगा।

जैतूसाव मठ में भी जन्मोत्सव के दौरान भक्तिमय माहौल रहेगा। मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ भगवान को विशेष भोग लगाया जाएगा। 11 क्विंटल मालपुआ तैयार करने के लिए बड़ी मात्रा में सामग्री की जरूरत होगी और इसे तैयार करने में कई लोग जुटेंगे। भोग के बाद प्रसाद श्रद्धालुओं में बांटा जाएगा।

रायपुर में जन्माष्टमी का उत्सव धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव का रूप भी लेता है। अलग-अलग इलाकों में मंदिर समितियां अपने स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करती हैं। इस दौरान भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की झांकियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों के आकर्षण का केंद्र रहते हैं।

मंदिरों में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए आयोजकों की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्थाएं की जा रही हैं। दर्शन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने, प्रसाद वितरण और पूजा कार्यक्रमों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने की तैयारी की गई है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर बाजार में भी उत्साह दिखाई दे रहा है। भगवान कृष्ण की मूर्तियों से लेकर झूले, पोशाक, मुकुट, बांसुरी और पूजा सामग्री की मांग बढ़ गई है। घरों में भी लोग कान्हा के जन्मोत्सव की तैयारी कर रहे हैं। कई परिवारों में बाल गोपाल के लिए विशेष झूला सजाया जा रहा है।

मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण के जन्म के साथ ही मंदिरों में 'नंद के घर आनंद भयो' और 'जय कन्हैया लाल की' के जयकारे गूंजेंगे। श्रद्धालु भगवान के बाल स्वरूप के दर्शन करेंगे और जन्मोत्सव के बाद प्रसाद ग्रहण करेंगे।

इस बार रायपुर में जन्माष्टमी का उत्सव कई मायनों में खास रहने वाला है। कोतवाली के कारागार की झांकी में कृष्ण जन्म का दृश्य, जैतूसाव मठ में 11 क्विंटल मालपुए का भोग और 101 लीटर दूध से अभिषेक के साथ इस्कॉन मंदिर में तीन दिन का महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण रहेगा।

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