केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग और परिवहन परियोजनाओं को तेज करने पर सहमति बनी। NH-66, NH-966, तिरुवनंतपुरम आउटर रिंग रोड और सबरीमाला रोपवे पर विशेष चर्चा हुई तथा लंबित मंजूरियां जल्द पूरी करने पर जोर दिया गया।
तिरुवंतपुरम: नई दिल्ली में गुरुवार को केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के बीच हुई बैठक में राज्य की राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य प्रमुख परिवहन परियोजनाओं को गति देने पर सहमति बनी। बैठक में लंबित कामों की रफ्तार बढ़ाने, परियोजनाओं से जुड़ी अड़चनें दूर करने और जरूरी मंजूरियों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, बैठक में विशेष रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग-66 के विकास में आ रही देरी को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आश्वासन दिया गया। इसके अलावा NH-966 के कोझिकोड-पलक्कड़ खंड, तिरुवनंतपुरम आउटर रिंग रोड और सबरीमाला रोपवे जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई।
NH-66 के काम में तेजी लाने का आश्वासन
बैठक में केरल के लिए महत्वपूर्ण NH-66 परियोजना को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री सतीशन ने राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास से जुड़ी देरी और निर्माण कार्यों की गति को लेकर केंद्रीय मंत्री के सामने मुद्दे रखे।
गडकरी ने NH-66 परियोजना में मौजूद बाधाओं को दूर करने और निर्माण कार्य को तेज करने के लिए तत्काल कदम उठाने का भरोसा दिया। राज्य के लिए यह परियोजना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केरल के प्रमुख शहरों और आर्थिक केंद्रों के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करने वाली प्रमुख राजमार्ग परियोजनाओं में शामिल है।
राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार परिवहन लागत, यात्रा समय और माल ढुलाई की दक्षता को प्रभावित करता है। ऐसे में निर्माण की गति में सुधार से लंबी अवधि में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
NH-966 को तीन महीने में आगे बढ़ाने की तैयारी
बैठक में कोझिकोड-पलक्कड़ NH-966 परियोजना की लंबित मंजूरियों का मुद्दा भी उठा। मुख्यमंत्री के अनुसार, केंद्रीय स्तर पर आवश्यक अगली मंजूरियां तीन महीने के भीतर देने का आश्वासन मिला है।
इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग 80 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। इसका मतलब है कि परियोजना के एक महत्वपूर्ण शुरुआती चरण में पर्याप्त प्रगति हो चुकी है और अब शेष प्रशासनिक तथा निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं को गति देना प्राथमिकता होगी।
NH-966 के आगे बढ़ने से उत्तरी और मध्य केरल के बीच सड़क संपर्क बेहतर करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही राज्य के प्रमुख शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और व्यापारिक केंद्रों के बीच परिवहन नेटवर्क को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
तिरुवनंतपुरम आउटर रिंग रोड को जल्द मिलेगी कैबिनेट मंजूरी
बैठक में तिरुवनंतपुरम आउटर रिंग रोड परियोजना भी प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। गडकरी ने परियोजना के लिए आवश्यक केंद्रीय कैबिनेट मंजूरी जल्द दिए जाने का आश्वासन दिया।
यह परियोजना तिरुवनंतपुरम क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आधिकारिक PPPAC रिकॉर्ड के अनुसार, प्रस्तावित चार लेन आउटर रिंग रोड नवीकुलम से विझिंजम तक लगभग 62.7 किलोमीटर लंबी है और इसे NH-866 के हिस्से के रूप में विकसित किया जाना है। परियोजना की PPPAC सूची में लागत ₹6,857.20 करोड़ दर्ज है।
परियोजना से राजधानी क्षेत्र में यातायात के दबाव को कम करने और शहर के बाहरी हिस्सों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। अक्टूबर की शुरुआत में केंद्र से परियोजना के लिए पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद अब अगला महत्वपूर्ण कदम केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी है।
निर्माण सामग्री की उपलब्धता पर भी चर्चा
राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के निर्माण में जरूरी सामग्री की उपलब्धता भी बैठक के एजेंडे में रही। राज्य में राजमार्ग निर्माण के लिए नदी की रेत और क्वारी से मिलने वाली निर्माण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया तेज करने पर सहमति बनी।
सड़क परियोजनाओं में निर्माण सामग्री की आपूर्ति में किसी भी तरह की देरी सीधे परियोजना की समयसीमा और लागत को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में सामग्री की उपलब्धता से जुड़े प्रशासनिक मुद्दों को जल्द सुलझाना निर्माण की गति बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सबरीमाला रोपवे परियोजना पर भी बनी सहमति
बैठक में सड़क परियोजनाओं के अलावा सबरीमाला रोपवे परियोजना पर भी चर्चा हुई। इसके लिए Detailed Project Report यानी DPR तैयार करने और केंद्र तथा राज्य स्तर की जरूरी मंजूरियों को तेजी से पूरा करने पर सहमति बनी।
बैठक में परियोजना को दो साल के भीतर पूरा करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने पर भी चर्चा हुई। सबरीमाला देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है और यहां बेहतर परिवहन एवं यात्री सुविधाओं की आवश्यकता लंबे समय से उठती रही है।

रोपवे परियोजना के पूरा होने से तीर्थयात्रियों की आवाजाही को आसान बनाने और क्षेत्र की परिवहन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना की वास्तविक समयसीमा मंजूरियों, DPR, निर्माण प्रक्रिया और अन्य तकनीकी चरणों की प्रगति पर निर्भर करेगी।
पश्चिमी एर्नाकुलम बाईपास समेत कई परियोजनाएं एजेंडे में
मुख्यमंत्री सतीशन ने बैठक में अन्य प्रमुख सड़क परियोजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ाने की मांग की। इनमें वेस्टर्न एर्नाकुलम बाईपास, कोठामंगलम-मुवाट्टुपुझा बाईपास और कोझिकोड अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से बेहतर कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य के विभिन्न हिस्सों में यातायात संपर्क को बेहतर करना और प्रमुख शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों तथा परिवहन केंद्रों तक पहुंच आसान बनाना है।
केरल में सड़क और राजमार्ग नेटवर्क का विस्तार केवल यात्री परिवहन तक सीमित नहीं है। राज्य की पर्यटन अर्थव्यवस्था, बंदरगाहों, हवाईअड्डों, व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला के लिए भी बेहतर सड़क कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है।
केंद्र और राज्य के बीच समन्वय पर जोर
बैठक का एक प्रमुख निष्कर्ष केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय के जरिए परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना रहा। मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, विभिन्न परियोजनाओं में देरी दूर करने और आवश्यक मंजूरियों को तेजी से पूरा करने के लिए समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर सहमति बनी।
बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट अक्सर भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी, निर्माण सामग्री, वित्तीय स्वीकृति और तकनीकी प्रक्रियाओं जैसे कई चरणों पर निर्भर करते हैं। इनमें किसी एक स्तर पर देरी होने से पूरी परियोजना प्रभावित हो सकती है।
तिरुवनंतपुरम आउटर रिंग रोड के मामले में भी पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी अगला अहम चरण है। आधिकारिक रिकॉर्ड में इस परियोजना के लिए 62.7 किलोमीटर लंबा चार लेन मार्ग दर्ज है।
केरल के बुनियादी ढांचे के लिए क्या मायने रखती है बैठक?
गडकरी और सतीशन की बैठक ऐसे समय हुई है जब केरल में सड़क और परिवहन बुनियादी ढांचे के विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, अधिक जनसंख्या घनत्व और सीमित भूमि उपलब्धता के कारण सड़क परियोजनाओं के लिए योजना और क्रियान्वयन दोनों चुनौतीपूर्ण रहे हैं।
नई सड़क परियोजनाओं और मौजूदा राजमार्गों के विस्तार से यातायात दबाव कम करने, शहरों के बीच संपर्क सुधारने और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, बैठक में दिए गए आश्वासनों का वास्तविक प्रभाव परियोजनाओं की मंजूरी, निविदा, भूमि अधिग्रहण और निर्माण की जमीनी प्रगति पर निर्भर करेगा। फिलहाल, केंद्र और केरल सरकार के बीच हुई बातचीत ने कई लंबित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए एक स्पष्ट समयबद्ध दिशा तय करने का संकेत दिया है।
आगे की प्रक्रिया पर रहेगी नजर
अब नजर NH-66 के निर्माण कार्य में तेजी, NH-966 की लंबित मंजूरियों, तिरुवनंतपुरम आउटर रिंग रोड की केंद्रीय कैबिनेट मंजूरी और सबरीमाला रोपवे की DPR प्रक्रिया पर रहेगी।
अगर इन परियोजनाओं में प्रशासनिक बाधाएं समय पर दूर होती हैं, तो केरल के सड़क और परिवहन नेटवर्क में आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। राज्य सरकार के लिए चुनौती इन परियोजनाओं की निगरानी और भूमि, निर्माण तथा स्थानीय स्तर की अड़चनों को समय पर दूर करने की होगी, जबकि केंद्र के स्तर पर जरूरी मंजूरियों और समन्वय को गति देना अहम रहेगा।












