गुजरात के गांधीनगर नगर निगम चुनाव 2026 में BJP ने 44 में से 38 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी। कांग्रेस ने पांच सीटों के साथ प्रदर्शन सुधारा, जबकि AAP एक भी सीट नहीं जीत सकी। चुनाव में 59.25 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ।
गांधीनगर: गुजरात की राजधानी गांधीनगर के नगर निगम चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बार फिर अपना राजनीतिक दबदबा कायम रखा है। नगर निगम की सभी 44 सीटों के घोषित नतीजों में BJP ने 38 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी। कांग्रेस ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई। आम आदमी पार्टी (AAP) इस बार एक भी सीट नहीं जीत सकी। 13 अक्टूबर को घोषित इन नतीजों में BJP की मजबूत स्थिति के साथ कांग्रेस की वापसी और AAP के घटते जनाधार की तस्वीर सामने आई है।
2021 के नगर निगम चुनाव में BJP ने 41 सीटें जीती थीं। इस बार उसकी सीटें घटकर 38 रह गईं, लेकिन पार्टी ने स्पष्ट बहुमत बनाए रखा। दूसरी ओर, कांग्रेस ने अपनी सीटें दो से बढ़ाकर पांच कर लीं। AAP के लिए नतीजे निराशाजनक रहे, क्योंकि पिछली बार एक सीट जीतने वाली पार्टी इस बार निगम में अपना प्रतिनिधित्व भी कायम नहीं रख सकी।
गांधीनगर नगर निगम चुनाव 2026: किसे कितनी सीटें मिलीं?
गांधीनगर नगर निगम की 44 सीटों के लिए 11 वार्डों में चुनाव हुए। घोषित नतीजों के मुताबिक, BJP ने 38 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस को पांच सीटें मिलीं और एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।
सीटों के लिहाज से BJP विपक्षी दलों से काफी आगे रही। कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही, लेकिन वह BJP के मुकाबले बहुत कम सीटें जीत सकी। AAP का खाता नहीं खुलने से स्थानीय निकाय में उसकी चुनावी स्थिति कमजोर दिखाई दी।
इन नतीजों से स्पष्ट है कि गांधीनगर नगर निगम में BJP का बहुमत बरकरार है। हालांकि, 2021 की तुलना में तीन सीटों का नुकसान पार्टी के प्रदर्शन में सीमित गिरावट भी दर्शाता है। कांग्रेस की सीटों में वृद्धि विपक्षी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण रही, लेकिन वह सत्ता के समीकरण को बदलने में सफल नहीं हुई।
वोट शेयर में BJP और कांग्रेस को बढ़त
सीटों के अलावा वोट शेयर के आंकड़े भी चुनाव के राजनीतिक रुझानों को समझने में मदद करते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, BJP को 56.64 प्रतिशत वोट मिले। कांग्रेस का वोट शेयर 37.05 प्रतिशत रहा, जबकि AAP को 4.38 प्रतिशत वोट मिले। अन्य उम्मीदवारों के हिस्से में 1.92 प्रतिशत वोट आए।
2021 में BJP का वोट शेयर 46.49 प्रतिशत था, जो 2026 में बढ़कर 56.64 प्रतिशत हो गया। इस तरह पार्टी के वोट शेयर में 10.15 प्रतिशत अंकों की वृद्धि दर्ज की गई।
कांग्रेस का वोट शेयर भी 28.02 प्रतिशत से बढ़कर 37.05 प्रतिशत पहुंच गया। यानी पार्टी को 9.03 प्रतिशत अंकों का फायदा हुआ। हालांकि, वोट शेयर में सुधार के बावजूद कांग्रेस पांच सीटों तक ही सीमित रही।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि BJP और कांग्रेस, दोनों के वोट शेयर में वृद्धि हुई। इसके विपरीत, AAP का वोट शेयर 2021 के 21.77 प्रतिशत से घटकर 4.38 प्रतिशत रह गया। यह लगभग 17.39 प्रतिशत अंकों की गिरावट है।
मतदान में भी दर्ज हुई बढ़ोतरी
गांधीनगर नगर निगम चुनाव में इस बार मतदान प्रतिशत में वृद्धि देखी गई। राज्य चुनाव आयोग के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, 2026 के चुनाव में 59.25 प्रतिशत मतदान हुआ। 2021 में यह आंकड़ा 56.24 प्रतिशत था।
इस तरह मतदान में लगभग 3.01 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, अधिक मतदान का लाभ किस पार्टी को किस स्तर तक मिला, इसका आकलन करने के लिए वार्डवार मतदान, उम्मीदवारों के प्रदर्शन और बूथ स्तर के आंकड़ों का विश्लेषण जरूरी है।
कुल मिलाकर, अधिक मतदान के बावजूद BJP नगर निगम में अपना बहुमत बचाने में सफल रही। कांग्रेस ने भी सीटों और वोट शेयर, दोनों में सुधार किया, जबकि AAP को अपने पिछले प्रदर्शन के मुकाबले बड़ा झटका लगा।
2021 में BJP ने जीती थीं 41 सीटें
गांधीनगर नगर निगम का तीसरा चुनाव अक्टूबर 2021 में हुआ था। उस समय BJP ने 44 में से 41 सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था। कांग्रेस को दो सीटें मिली थीं, जबकि AAP ने एक सीट पर जीत दर्ज की थी।
2021 के चुनाव में BJP का वोट शेयर 46.49 प्रतिशत, कांग्रेस का 28.02 प्रतिशत और AAP का 21.77 प्रतिशत बताया गया था। इन नतीजों ने गांधीनगर में BJP की मजबूत स्थिति को स्थापित किया था।
2026 के परिणामों में BJP की सीटें तीन कम हुई हैं, लेकिन पार्टी ने दो-तिहाई से अधिक सीटों पर जीत दर्ज करते हुए अपना नियंत्रण बनाए रखा। कांग्रेस ने अपने प्रतिनिधित्व में वृद्धि की, जबकि AAP अपनी पिछली सीट भी नहीं बचा सकी।
2016 में BJP और कांग्रेस के बीच बराबरी
गांधीनगर नगर निगम के 2016 के चुनाव में BJP और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था। उस समय निगम में कुल 32 सीटें थीं और दोनों प्रमुख दलों ने 16-16 सीटें जीती थीं। किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था।
इसके बाद कांग्रेस के बागी नेता प्रवीण पटेल ने BJP का समर्थन किया और महापौर बने। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद नगर निगम की सत्ता BJP के हाथ में चली गई।
2016 का चुनाव इस लिहाज से महत्वपूर्ण था कि सीटों की बराबरी के बावजूद राजनीतिक समर्थन के समीकरणों ने सत्ता का फैसला किया। इसके बाद गांधीनगर में BJP की स्थिति मजबूत होती गई और 2021 में पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की।
2011 में कांग्रेस ने हासिल किया था बहुमत
गांधीनगर नगर निगम का पहला चुनाव अप्रैल 2011 में हुआ था। उस चुनाव में कुल 33 सीटें थीं। कांग्रेस ने 18 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जबकि BJP को 15 सीटें मिली थीं। कांग्रेस के महेंद्रसिंह राणा निगम के पहले महापौर बने।
हालांकि, कांग्रेस का नियंत्रण लंबे समय तक कायम नहीं रहा। 2012 में महापौर समेत कांग्रेस के तीन पार्षद BJP में शामिल हो गए। इसके बाद नगर निगम की सत्ता का समीकरण बदल गया और BJP को नियंत्रण हासिल करने का अवसर मिला।
इस तरह गांधीनगर नगर निगम का राजनीतिक इतिहास बताता है कि स्थानीय चुनावों में सीटों के अलावा दल-बदल और पार्षदों के समर्थन ने भी सत्ता निर्धारण में भूमिका निभाई है।
15 साल में बदला चुनावी गणित, BJP का दबदबा कायम
गांधीनगर नगर निगम के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो 2011 में कांग्रेस ने बहुमत के साथ शुरुआत की थी। 2016 में BJP और कांग्रेस बराबरी पर रहीं, लेकिन बाद में राजनीतिक समीकरण BJP के पक्ष में चले गए। 2021 में BJP ने 41 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की।
2026 में BJP ने 38 सीटों के साथ सत्ता बरकरार रखी। कांग्रेस ने पांच सीटों के साथ अपनी स्थिति सुधारी, जबकि AAP का खाता बंद हो गया।
इन परिणामों से संकेत मिलता है कि गांधीनगर में BJP की स्थानीय राजनीतिक पकड़ अब भी मजबूत है। कांग्रेस की बढ़ी हुई सीटें विपक्ष के लिए सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन पार्टी को बहुमत से दूर रहने की चुनौती का सामना करना होगा। वहीं, AAP के सामने अपना घटा हुआ वोट शेयर सुधारने और स्थानीय स्तर पर संगठन मजबूत करने की चुनौती होगी।
अंततः, गांधीनगर नगर निगम चुनाव 2026 में सत्ता का फैसला BJP के पक्ष में रहा। कांग्रेस को सीमित बढ़त मिली, जबकि AAP को बड़ा चुनावी नुकसान हुआ। आगामी स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों में इन नतीजों का असर किस तरह दिखाई देता है, यह आगे देखने वाली बात होगी।










