क्रिकेट के ऐतिहासिक मैदान लॉर्ड्स की एक पिच को लेकर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) की नाराजगी के बाद बड़ा बदलाव किया जा रहा है। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच जून में खेले गए टेस्ट मैच के दौरान इस पिच पर गेंद को जरूरत से ज्यादा सीम मूवमेंट मिली थी, जबकि उछाल भी असमान रहा था। इ
स्पोर्ट्स न्यूज़: क्रिकेट के ऐतिहासिक मैदान लॉर्ड्स में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए टेस्ट मैच की विवादित पिच को लेकर मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (MCC) ने बड़ा कदम उठाया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की ओर से असंतोषजनक रेटिंग मिलने के बाद क्लब ने पिच नंबर 9 को दोबारा तैयार करने का फैसला किया है। इसके चलते इस पिच का इस्तेमाल अगले दो से तीन सीजन तक नहीं किया जा सकेगा। MCC का उद्देश्य भविष्य में बेहतर और संतुलित पिच तैयार करना है, ताकि गेंद और बल्ले के बीच प्रतिस्पर्धा बनी रहे।
जून 2026 में खेले गए इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के टेस्ट मुकाबले के दौरान इस पिच पर गेंद को जरूरत से ज्यादा सीम मूवमेंट मिली थी। इसके अलावा, उछाल भी असमान रहने की शिकायत सामने आई थी। ICC ने पिच के व्यवहार का आकलन करने के बाद इसे असंतोषजनक करार दिया और डिमेरिट पॉइंट दिया। इसके बाद लॉर्ड्स में पिच तैयार करने की प्रक्रिया की समीक्षा शुरू हुई।
लॉर्ड्स की पिच नंबर 9 पर क्यों उठे सवाल?
लॉर्ड्स के सेंट्रल पिच एरिया की पिच नंबर 9 पर खेले गए टेस्ट मैच में गेंदबाजों को काफी मदद मिली। रिपोर्ट के मुताबिक, मैच के दौरान केवल 166 ओवर में दोनों टीमों के सभी 40 विकेट गिर गए। इनमें 24 विकेट बोल्ड या लेग बिफोर विकेट (LBW) के जरिए आए। इस प्रदर्शन ने पिच की स्थिति और उसकी तैयारी को लेकर सवाल खड़े किए।
मैच रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट ने पिच का आकलन करते हुए पाया कि गेंद को जरूरत से अधिक सीम मूवमेंट मिल रही थी और उछाल भी लगातार एक जैसा नहीं था। ICC की असंतोषजनक रेटिंग के बाद MCC ने पिच की स्थिति और उसे तैयार करने के तरीकों की जांच करने का निर्णय लिया।
MCC ने बनाई सात सूत्रीय कार्ययोजना
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पिच विवाद के बाद MCC के चेयरमैन मार्क निकोलस ने सुधार के लिए सात सूत्रीय कार्ययोजना की घोषणा की थी। इसके तहत क्लब के क्रिकेट एवं संचालन निदेशक रॉब लिंच और ग्राउंड्स स्टाफ ने पिच तैयार करने की मौजूदा प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा की। रिपोर्ट के अनुसार, इस समीक्षा में विशेषज्ञों की सलाह लेने के साथ उपलब्ध आंकड़ों का भी विश्लेषण किया गया। इसका मकसद पिच तैयार करने की तकनीक और मैदान के मुख्य पिच क्षेत्र की स्थिति का आकलन करना था।
MCC ने इसके बाद पिच नंबर 9 के पुनर्निर्माण का काम शुरू किया। क्लब की कोशिश है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां न बनें, जिनमें पिच का असमान उछाल या जरूरत से ज्यादा सीम मूवमेंट बल्लेबाजों के लिए असामान्य चुनौती पैदा करे।
एशेज जैसे बड़े मुकाबलों की तैयारी होगी अहम
पिच नंबर 9 के दो से तीन सीजन तक उपलब्ध नहीं रहने से लॉर्ड्स में अंतरराष्ट्रीय मैचों का कार्यक्रम तय करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। MCC के चेयरमैन ने 14 अक्टूबर को सदस्यों को भेजे ईमेल में कहा कि सुधार का उद्देश्य मैदान की प्रतिष्ठा के अनुरूप पिच तैयार करना है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि इस बदलाव के कारण आने वाले वर्षों में मैचों की योजना बनाने और पिचों के इस्तेमाल को लेकर व्यावहारिक मुश्किलें आ सकती हैं।
एशेज जैसी प्रतिष्ठित टेस्ट सीरीज के मुकाबलों से पहले पिच तैयार करने के लिए पर्याप्त समय देना भी क्लब की योजना का हिस्सा है। इससे ग्राउंड्स स्टाफ को सतह की स्थिति बेहतर बनाने और मैच के लिए उचित परिस्थितियां सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
हाइब्रिड और ड्रॉप-इन पिचों पर MCC का जोर
लॉर्ड्स में पिच तैयार करने की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए MCC हाइब्रिड पिचों और स्थायी ड्रॉप-इन पिचों के विकल्पों पर भी ध्यान दे रहा है। हाइब्रिड पिचों में प्राकृतिक घास के साथ कृत्रिम फाइबर का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि ड्रॉप-इन पिचों को मैदान से अलग तैयार करके जरूरत के अनुसार स्टेडियम में स्थापित किया जा सकता है।
इन तकनीकों का उद्देश्य पिचों की गुणवत्ता और स्थिरता को बेहतर बनाना तथा मुख्य पिच क्षेत्र पर दबाव कम करना है। हालांकि, किसी भी नई व्यवस्था का प्रभाव उसके निर्माण, रखरखाव और मैदान की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।








