गंगा एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा आपस में ऑनलाइन कनेक्ट न होने से वाहन चालकों से तय दर से अधिक टोल वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। मामले को लेकर रोजाना विवाद हो रहे हैं और अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया है।
लखनऊ: गंगा एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों को टोल भुगतान को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि दोनों एक्सप्रेसवे के टोल सिस्टम आपस में समन्वित न होने के कारण यात्रियों से वास्तविक दूरी के मुकाबले अधिक शुल्क लिया जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर वाहन चालकों और टोल कर्मचारियों के बीच लगातार विवाद की स्थिति बन रही है।
ऑनलाइन कनेक्टिविटी की कमी बनी परेशानी
वाहन चालकों का कहना है कि गंगा एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा आपस में ऑनलाइन जुड़े नहीं हैं। इसके कारण एक एक्सप्रेसवे से दूसरे एक्सप्रेसवे पर प्रवेश करने वाले वाहनों की यात्रा दूरी का सही रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पाता।
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यही वजह है कि कई बार वाहन चालकों को उनकी वास्तविक यात्रा के बजाय अधिक दूरी के आधार पर टोल शुल्क चुकाना पड़ता है। यात्रियों का आरोप है कि इस समस्या के कारण उन्हें अनावश्यक आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।
तय दूरी से अधिक शुल्क वसूले जाने की शिकायत
फर्रुखाबाद से लखनऊ आने-जाने वाले कई यात्रियों ने दावा किया है कि उनसे निर्धारित दूरी के अनुसार टोल नहीं लिया जा रहा। उनका कहना है कि एक्सप्रेसवे पर तय की गई दूरी के हिसाब से शुल्क कम होना चाहिए, लेकिन सिस्टम में सही जानकारी उपलब्ध न होने के कारण अधिक राशि मांगी जाती है।
वाहन चालकों के अनुसार यदि दोनों एक्सप्रेसवे के टोल डेटा का एकीकृत आदान-प्रदान हो तो केवल उतनी ही दूरी का शुल्क लगेगा जितनी दूरी वास्तव में तय की गई है।
यात्रियों और टोल कर्मियों के बीच बढ़ रहे विवाद
अधिक टोल वसूली की शिकायतों के चलते कई टोल प्लाजा पर बहस और विवाद की स्थिति बन रही है। जागरूक वाहन चालक निर्धारित नियमों के अनुसार भुगतान करने की मांग कर रहे हैं, जबकि टोल कर्मचारियों के पास कई मामलों में यात्रा की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं होती।
इस कारण मौके पर स्थिति तनावपूर्ण हो जाती है और यात्रियों को अतिरिक्त समय भी खर्च करना पड़ता है। लगातार मिल रही शिकायतों ने इस मुद्दे को गंभीर बना दिया है।
तकनीकी समाधान की मांग तेज
यात्रियों और परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों एक्सप्रेसवे के टोल सिस्टम को तकनीकी रूप से जोड़ना इस समस्या का सबसे प्रभावी समाधान हो सकता है। यदि वाहन के प्रवेश और निकास बिंदु की जानकारी सभी संबंधित टोल प्लाजा पर उपलब्ध हो जाए तो शुल्क निर्धारण अधिक पारदर्शी और सटीक हो सकेगा।
इससे न केवल यात्रियों की शिकायतें कम होंगी, बल्कि टोल संचालन की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
अधिकारियों ने जांच का दिया आश्वासन
मामले के सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने जांच कराने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि तकनीकी खामियों या समन्वय की कमी के कारण यात्रियों को परेशानी हो रही है तो उसका समाधान तलाशा जाएगा।
फिलहाल वाहन चालक उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही ऐसी व्यवस्था लागू होगी जिससे उन्हें केवल वास्तविक यात्रा दूरी के अनुसार ही टोल शुल्क देना पड़े और अनावश्यक विवादों से राहत मिल सके।










