भारत में त्योहारी सीजन अपने चरम पर है और धनतेरस, दिवाली के साथ-साथ शादी-ब्याह के सीजन को देखते हुए बाजारों में खरीदारी बढ़ने लगी है। इस दौरान सोने और चांदी के गहनों की मांग खास तौर पर बढ़ जाती है।
Gold Price Today: धनतेरस और दिवाली से पहले सोने की कीमतों में आई गिरावट ने खरीदारों और निवेशकों का ध्यान खींचा है। त्योहारी सीजन में सोने की खरीदारी बढ़ने के बीच कीमतों में उतार-चढ़ाव से लोग यह जानना चाहते हैं कि आने वाले दिनों में गोल्ड सस्ता होगा या फिर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के भाव में मामूली गिरावट दर्ज की गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी स्पॉट गोल्ड और अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स कमजोर हुए। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों के कुछ अनुमान बताते हैं कि लंबी अवधि में सोने की कीमतों में तेजी की संभावना बनी रह सकती है।
MCX और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव
उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार, MCX पर सोना 0.03 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,46,482 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। इससे पिछले कारोबारी सत्र में इसका बंद भाव 1,46,519 रुपये प्रति 10 ग्राम था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड 0.3 प्रतिशत गिरकर 4,128.92 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि दिसंबर डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में 0.3 प्रतिशत की गिरावट के बाद भाव 4,148.50 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया।
हालांकि, सोने की कीमतें लगातार बदलती रहती हैं। भारत में स्थानीय भाव पर अंतरराष्ट्रीय बाजार, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क, जीएसटी तथा स्थानीय मांग का भी असर पड़ता है। इसलिए ज्वेलरी खरीदने से पहले अपने शहर का ताजा भाव और लागू मेकिंग चार्ज जरूर जांचना चाहिए।
आखिर क्यों गिर रही हैं सोने की कीमतें?
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सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, ब्याज दरों की संभावनाएं और भू-राजनीतिक घटनाक्रम जैसे कई कारक हो सकते हैं। पश्चिम एशिया में तनाव और ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित करती हैं। यमन के हूती विद्रोहियों से जुड़े हमलों और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों तथा हवाई अड्डों को निशाना बनाए जाने के दावों के बाद क्षेत्रीय तनाव को लेकर चिंताएं बढ़ीं। ऐसी परिस्थितियों में कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है। हालांकि, किसी विशेष घटना को सोने की कीमतों में गिरावट का एकमात्र कारण मानना सही नहीं होगा।
अगर कच्चा तेल महंगा होता है, तो परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इससे महंगाई पर दबाव पड़ता है और केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती को लेकर सतर्क रुख अपना सकते हैं। ऊंची ब्याज दरों से निवेशकों को ब्याज देने वाली संपत्तियां आकर्षक लग सकती हैं, जबकि सोना खुद कोई नियमित ब्याज नहीं देता। इस वजह से सोने की मांग और कीमतों पर दबाव आ सकता है।
दूसरी ओर, आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने पर सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में भी देखा जाता है। इसलिए इसका भाव परिस्थितियों के अनुसार ऊपर या नीचे जा सकता है।
क्या दिवाली तक और सस्ता होगा सोना?
धनतेरस और दिवाली के दौरान भारत में सोने के सिक्कों, बार और आभूषणों की खरीदारी बढ़ जाती है। इसके बाद शादी-ब्याह का सीजन भी मांग को सहारा दे सकता है। मजबूत घरेलू मांग कीमतों में बड़ी गिरावट को सीमित कर सकती है, लेकिन इससे भाव बढ़ने की गारंटी नहीं मिलती। बाजार विश्लेषक अनुज गुप्ता के अनुमान के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,600 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। इस अनुमान के आधार पर घरेलू बाजार में दिवाली या साल के अंत तक सोने का भाव 1,60,000 से 1,65,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक जाने की संभावना जताई गई है।
वहीं, वेंचुरा सिक्योरिटीज की बताई गई गोल्ड प्राइस आउटलुक रिपोर्ट में दिवाली 2026 से पहले सोने के लिए 1,50,000 से 1,65,000 रुपये प्रति 10 ग्राम की संभावित रेंज का अनुमान दिया गया है। ये बाजार के अनुमान हैं, न कि निश्चित लक्ष्य या गारंटीकृत रिटर्न।










