गुरुवार को चांदी के भाव में 21% की गिरावट आई और यह 4,20,048 रुपये से 3,32,002 रुपये तक लुढ़क गई। सोने की कीमत भी 1,80,779 से 1,54,157 रुपये पर आ गई। निवेशकों में चिंता और बाजार अस्थिरता बढ़ी।
Gold–Silver Price Crash: गुरुवार को चांदी के वायदा भाव में अचानक भारी गिरावट देखने को मिली। 4,20,048 रुपये के सर्वोच्च स्तर को छूने के सिर्फ एक दिन बाद चांदी के भाव 3,32,002 रुपये तक लुढ़क गए, यानी करीब 21 फीसदी की गिरावट। यह तेजी से हुई गिरावट निवेशकों के लिए चौंकाने वाली रही। पिछले कुछ दिनों में जिस तेजी से चांदी के भाव बढ़े थे, अब उसी से भी ज्यादा तेज गति से यह नीचे आ गए।
विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी में इस तेज गिरावट को लेकर निवेशक चिंतित हैं और सवाल उठाते हैं कि क्या इसका पैटर्न 1980 के दशक जैसी घटना को दोहरा सकता है। उस समय भी चांदी के भाव असामान्य रूप से तेजी से बढ़े और बाद में अचानक गिर गए थे।
चांदी में 88 हजार रुपये की गिरावट
गुरुवार को चांदी के वायदा भाव ने मार्च अनुबंध में 4,20,048 रुपये का उच्चतम स्तर छुआ था। लेकिन महज एक दिन में यह भाव 88,046 रुपये गिरकर 3,32,002 रुपये पर आ गया। 10 दिन में जितना चांदी का भाव बढ़ा, उतने से थोड़ा कम गिरने में सिर्फ एक दिन लगा। इस तेज गिरावट ने निवेशकों के मन में डर पैदा कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी स्थिति यही रही। कॉमेक्स पर चांदी का भाव कल 121.79 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचा था, लेकिन आज यह 95.12 डॉलर तक गिर गया। यह दिखाता है कि चांदी की अस्थिरता सोने से कहीं अधिक है।
सोना भी नीचे आया
चांदी के साथ ही सोने की कीमतों में भी गिरावट आई। गुरुवार को MCX पर सोने के फरवरी अनुबंध ने 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड उच्च स्तर छुआ था। आज यह भाव 1,54,157 रुपये तक गिर गया, यानी करीब 26,622 रुपये या 14.72 फीसदी की गिरावट। कॉमेक्स पर सोने का भाव भी 5,586 डॉलर से घटकर 4,950 डॉलर तक पहुंच गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में गिरावट चांदी जितनी तेज नहीं है, लेकिन हाल की तेजी के बाद मुनाफावसूली के चलते सोने और चांदी दोनों में गिरावट आना सामान्य है।
गिरावट के पीछे क्या कारण हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले एक हफ्ते में सोना और चांदी दोनों में असाधारण तेजी देखने को मिली थी। अचानक तेजी के बाद मुनाफावसूली स्वाभाविक थी। केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया के अनुसार, सोने और चांदी में जरूरत से ज्यादा तेजी रही है।
एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज की रिसर्च हेड वंदना भारती ने कहा कि घरेलू बाजार में चांदी अगले एक सप्ताह में 3.20 लाख रुपये तक जा सकती है और सोना 1.42 लाख रुपये तक गिर सकता है। हालांकि, चांदी में इतनी बड़ी गिरावट नहीं आई जितनी 1980 में आई थी। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि चांदी का हाल उसी समय जैसा हो सकता है।
सोना या चांदी: निवेशकों को क्या करना चाहिए
हालिया गिरावट के बाद निवेशकों में सवाल उठ रहे हैं कि अब सोने या चांदी में निवेश करें। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोना चांदी की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
केडिया एडवाइजरी के अनुसार जनवरी 2026 असाधारण रही। सोने में 28 फीसदी की मासिक तेजी दर्ज की गई, जो पिछले बार जनवरी 1980 में देखी गई थी। चांदी ने लगभग 70 फीसदी की छलांग लगाई, जो अब तक की सबसे तेज मासिक बढ़त रही। इतनी तेज रैली के बाद करेक्शन लगभग तय माना जाता है।
इतिहास से यह भी सिखने को मिलता है कि गिरावट के दौर में चांदी सोने की तुलना में ज्यादा टूटती है। 1977–1980 और 2008–2011 के दौर में भी यही पैटर्न रहा। 1980 के बाद सोने में लगभग 66 फीसदी और चांदी में 90 फीसदी की गिरावट आई थी। 2011 में सोना करीब 38 फीसदी टूटा, जबकि चांदी में 60 फीसदी से अधिक गिरावट हुई।
गोल्ड–सिल्वर रेशियो का संकेत
गोल्ड–सिल्वर रेशियो भी निवेशकों के लिए अहम संकेत देता है। हाल ही में यह रेशियो 45 के आसपास पहुंच गया है। पिछले साल भू-राजनीतिक तनाव के दौरान यह 107 तक गया था। इतिहास में इतना कम रेशियो टिकाऊ नहीं माना जाता। विश्लेषकों के अनुसार रेशियो का 70–72 तक लौटना संभव है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में सोने का प्रदर्शन चांदी की तुलना में बेहतर रह सकता है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि करेक्शन सोने के दीर्घकालिक बुलिश ट्रेंड पर सवाल नहीं उठाता। केंद्रीय बैंकों की खरीद, भू-राजनीतिक अनिश्चितता, करेंसी जोखिम और सीमित सप्लाई जैसे कारण अब भी सोने के पक्ष में हैं। निवेशकों को चाहिए कि वे चांदी से सोने की ओर रुख करें और मुनाफावसूली का लाभ उठाएं।
विशेषज्ञों की राय और निवेश रणनीति
अजय केडिया के अनुसार इस समय सोने और चांदी दोनों में नई खरीदारी में सावधानी बरतना जरूरी है। पहले से बने मुनाफे को सुरक्षित करना और मार्केट में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना निवेशकों की समझदारी है।
वंदना भारती के अनुसार चांदी में 78 डॉलर तक और सोने में 4,860 डॉलर तक गिरावट संभव है। घरेलू बाजार में चांदी 3.20 लाख और सोना 1.42 लाख रुपये तक जा सकता है। निवेशकों को अनुशासन के साथ गोल्ड–सिल्वर रेशियो पर नजर रखनी चाहिए।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि अमेरिका–ईरान तनाव, टैरिफ वॉर, भारतीय बजट को लेकर अनिश्चितता और डॉलर की मजबूती के बीच मार्जिन बढ़ने से उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है। ऐसे समय में निवेशक सतर्क रहकर मुनाफा सुरक्षित करें।
1980 के दशक की हंट ब्रदर्स घटना
1970 के दशक में अमेरिकी आर्थिक अस्थिरता के दौरान हंट ब्रदर्स ने चांदी पर बड़ा दांव लगाया था। नेल्सन बंकर हंट और विलियम हर्बर्ट हंट ने 1973 से 1979 तक चांदी की बड़ी खरीदारी की और 1979 तक उनके पास ग्लोबल नॉन-गवर्नमेंट चांदी का लगभग एक तिहाई हिस्सा था।
शुरुआत में यह सुरक्षित निवेश माना गया, लेकिन लालच और बड़े पैमाने पर फ्यूचर्स ट्रेडिंग ने इसे सट्टेबाजी में बदल दिया। 1980 में चांदी के भाव में अचानक गिरावट आई और एक दिन में 50 फीसदी की गिरावट हुई। इसे ‘सिल्वर थर्सडे’ कहा जाता है।









