गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान इंडिगो के एक विमान के साथ ऐसी घटना हुई, जिसने कुछ देर के लिए यात्रियों और एयरपोर्ट स्टाफ की चिंता बढ़ा दी। बताया जा रहा है कि विमान जब रनवे पर उतरने की कोशिश कर रहा था, तभी उसका पिछला हिस्सा रनवे से टकरा गया। विमान में कुल 178 लोग सवार थे। घटना के बाद पायलट ने विमान को दोबारा लैंडिंग के लिए ले जाकर दूसरी कोशिश में सुरक्षित तरीके से उतारा।
लैंडिंग के दौरान विमान के पिछले हिस्से का रनवे से टकराना एविएशन की भाषा में टेल स्ट्राइक कहलाता है। ऐसी स्थिति में विमान के पिछले हिस्से को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है, इसलिए पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल की ओर से विशेष सावधानी बरती जाती है। घटना के बाद विमान की जांच की गई और संबंधित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
बताया जा रहा है कि पहली बार विमान रनवे पर उतरने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान विमान का पिछला हिस्सा रनवे से छू गया। स्थिति को देखते हुए पायलट ने विमान को दोबारा ऊपर उठाया और दूसरी लैंडिंग के लिए प्रयास किया। दूसरी कोशिश में विमान को सुरक्षित तरीके से रनवे पर उतार लिया गया।
विमान में सवार सभी यात्रियों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण थी। घटना के बाद यात्रियों के बीच कुछ समय के लिए चिंता का माहौल रहा, लेकिन विमान की दूसरी लैंडिंग सफल रहने से बड़ी घटना टल गई।
एयरपोर्ट पर विमान के उतरने के बाद संबंधित टीमों ने इसकी जांच शुरू की। टेल स्ट्राइक की स्थिति में विमान के पिछले हिस्से, पूंछ और संबंधित संरचनाओं की तकनीकी जांच की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विमान उड़ान के लिए सुरक्षित स्थिति में है या नहीं।
विमानन क्षेत्र में किसी भी तरह की असामान्य घटना के बाद एयरलाइन और संबंधित सुरक्षा एजेंसियां तकनीकी निरीक्षण करती हैं। इस मामले में भी विमान की स्थिति और पहली लैंडिंग के दौरान हुई घटना के कारणों की जांच की जा रही है।
पहली लैंडिंग के दौरान विमान का पिछला हिस्सा रनवे से क्यों टकराया, इसकी वजह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। इसके पीछे मौसम, हवा की गति और दिशा, विमान के लैंडिंग एंगल, रनवे की स्थिति, विमान का वजन या पायलट के इनपुट जैसे कई कारकों की भूमिका हो सकती है। हालांकि किसी एक कारण को जिम्मेदार मानने से पहले आधिकारिक जांच जरूरी है।
गोरखपुर एयरपोर्ट पर इस घटना के बाद यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एयरपोर्ट प्रशासन और एयरलाइन की गतिविधियां भी जांच के दायरे में आ सकती हैं। विमान की तकनीकी स्थिति की जांच पूरी होने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि उसे आगे की उड़ान के लिए इस्तेमाल किया जाना है या नहीं।
टेल स्ट्राइक विमान के लिए गंभीर घटना हो सकती है, लेकिन हर टेल स्ट्राइक का मतलब यह नहीं होता कि विमान को बड़ा नुकसान हुआ है। कई मामलों में विमान को सुरक्षित रूप से दोबारा उतार लिया जाता है और तकनीकी निरीक्षण के बाद उसकी उड़ान संबंधी स्थिति तय की जाती है।
इस घटना में सबसे राहत की बात यह रही कि पायलट ने पहली कोशिश के बाद स्थिति को संभाला और दूसरी कोशिश में विमान को सुरक्षित लैंड कराया। विमान में सवार 178 लोगों की सुरक्षा बनी रही और किसी बड़े हादसे की स्थिति नहीं बनी।
यात्रियों के लिए लैंडिंग का समय उड़ान का सबसे संवेदनशील चरण माना जाता है। इस दौरान विमान की ऊंचाई, गति, दिशा और रनवे से दूरी को लगातार नियंत्रित किया जाता है। विमान का पिछला हिस्सा रनवे से छूना इस बात का संकेत हो सकता है कि लैंडिंग के दौरान विमान का कोण अपेक्षित सीमा से अलग हुआ था, लेकिन वास्तविक कारण जांच के बाद ही सामने आएगा।
घटना के बाद विमानन सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों की ओर से भी मामले को गंभीरता से लिया जाना स्वाभाविक है। ऐसी घटनाओं से भविष्य में समान परिस्थितियों से बचने के लिए जरूरी सुरक्षा उपायों की समीक्षा की जाती है।
गोरखपुर एयरपोर्ट पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण हवाई अड्डा है। यहां से बड़ी संख्या में यात्री अलग-अलग शहरों के लिए यात्रा करते हैं। ऐसे में किसी विमान से जुड़ी घटना सामने आने पर यात्रियों और उनके परिजनों के बीच चिंता पैदा होना स्वाभाविक है।
इस घटना के बाद एयरलाइन की ओर से यात्रियों को स्थिति के बारे में जानकारी दी गई। विमान की तकनीकी जांच और घटना की समीक्षा के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। यदि विमान के किसी हिस्से में नुकसान पाया जाता है तो उसे उड़ान से पहले आवश्यक मरम्मत के लिए भेजा जा सकता है।
विमान में 178 लोगों के सवार होने की वजह से घटना की गंभीरता और बढ़ जाती है। हालांकि पायलट के समय पर लिए गए फैसले और दूसरी लैंडिंग के सफल होने से किसी बड़े नुकसान से बचा जा सका।
फिलहाल घटना की पूरी तस्वीर आधिकारिक जांच और तकनीकी रिपोर्ट सामने आने के बाद ही साफ होगी। जांच में यह देखा जाएगा कि पहली लैंडिंग के समय विमान की गति, ऊंचाई, एंगल और मौसम की परिस्थितियां कैसी थीं। इसके अलावा विमान के पिछले हिस्से में किसी तरह के नुकसान की भी जांच की जाएगी।
गोरखपुर एयरपोर्ट पर इंडिगो विमान की लैंडिंग के दौरान हुआ यह टेल स्ट्राइक यात्रियों के लिए कुछ समय के लिए चिंता का कारण जरूर बना, लेकिन पायलट ने स्थिति को संभालते हुए दूसरी कोशिश में विमान को सुरक्षित उतार लिया। विमान में सवार 178 लोगों के सुरक्षित रहने से बड़ी दुर्घटना टल गई। अब तकनीकी जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि पहली लैंडिंग के दौरान विमान का पिछला हिस्सा रनवे से किस वजह से टकराया।