ग्रेटर नोएडा में अवैध बसों का नेटवर्क, 18 करोड़ महीने का कारोबार और यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल

ग्रेटर नोएडा के परी चौक से रोज 70-80 बसें चलने का दावा है। 4 हजार यात्री सफर करते हैं और 18 करोड़ रुपये मासिक कारोबार का अनुमान है।

ग्रेटर नोएडा के परी चौक से रोजाना दर्जनों बसें विभिन्न राज्यों के लिए संचालित हो रही हैं। क्षमता से अधिक यात्रियों और हालिया बस आग की घटनाओं के बीच परिवहन विभाग की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।

ग्रेटर नोएडा: परी चौक से संचालित हो रही बसों को लेकर यात्रियों की सुरक्षा और परिवहन विभाग की निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दावा है कि यहां से रोजाना 70 से 80 बसें कई राज्यों के लिए रवाना होती हैं और करीब चार हजार यात्री सफर करते हैं। 500 से 2,000 रुपये तक किराए के आधार पर बस संचालकों का मासिक कारोबार करीब 18 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।

दो हफ्ते में दूसरी बस में आग, फिर भी सवालों के घेरे में व्यवस्था

ग्रेटर नोएडा में दो सप्ताह के भीतर दूसरी बस में आग लगने की घटना के बाद अवैध रूप से संचालित बस सेवाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सितंबर में यमुना एक्सप्रेसवे पर एक बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद मंगलवार को एक और बस में आग लग गई। इस घटना में किसी यात्री की जान नहीं गई, लेकिन यात्रियों का लाखों रुपये का सामान जलकर नष्ट हो गया।

इन घटनाओं के बावजूद परी चौक से संचालित हो रहे कथित अवैध बस अड्डे पर प्रभावी कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। परी चौक को ग्रेटर नोएडा का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है। यहां से रोजाना 70 से 80 बसों के उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों के लिए चलने का दावा किया गया है।

रोजाना करीब 4 हजार यात्री, 18 करोड़ रुपये मासिक कमाई का दावा

परी चौक से संचालित बसों में रोजाना करीब चार हजार यात्रियों के सफर करने की बात सामने आई है। यात्रियों से रूट के अनुसार 500 रुपये से लेकर 2,000 रुपये तक किराया लिया जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर इन बसों से प्रतिदिन करीब 60 लाख रुपये की आय का अनुमान लगाया गया है।

इसी गणना के आधार पर 30 दिनों में कारोबार करीब 18 करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है। परी चौक से राज कल्पना ट्रैवल्स, कल्पना ट्रैवल्स और प्रिया ट्रेवल्स समेत कई कंपनियों की बसें संचालित होने की बात कही गई है।

इन बसों का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के कई शहरों तक फैला हुआ है। लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़, आगरा, बलिया, झांसी, ग्वालियर, बांदा, महोबा, हमीरपुर, उरई, राठ, चरखारी और बेलाताल समेत कई स्थानों के लिए बसें चलने की जानकारी सामने आई है।

कई राज्यों तक बसों का संचालन, क्षमता से ज्यादा यात्री बैठाने का आरोप

परी चौक से पटना, मुजफ्फरपुर, हरिद्वार और देहरादून जैसे शहरों के लिए भी बसें संचालित होने की बात कही गई है। इन रूट पर यात्रियों से दूरी के अनुसार 500 से 2,000 रुपये तक किराया वसूले जाने का दावा है।

बसों में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने के आरोप भी लगाए गए हैं। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए ओवरलोडिंग के अलावा बस की फिटनेस, परमिट और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच महत्वपूर्ण होती है।

इन बसों के कई जिलों और राज्यों की सीमाएं पार करने के कारण परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि नियमित जांच के दौरान बसों की वास्तविक यात्री क्षमता, परमिट, फिटनेस, टैक्स और सामान की लोडिंग जैसे मानकों की कितनी गंभीरता से जांच की जाती है।

हालिया हादसों के बाद कुछ समय के लिए कार्रवाई तेज होने की बात सामने आती है, लेकिन आरोप है कि इसके बाद व्यवस्था फिर सामान्य हो जाती है। यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से अवैध बस संचालन, ओवरलोडिंग और फिटनेस मानकों की अनदेखी पर स्थायी कार्रवाई की जरूरत बताई जा रही है।

बसों के इस कथित नेटवर्क से जुड़े आरोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि हादसों के बाद ही कार्रवाई क्यों तेज होती है और नियमित निगरानी के दौरान नियमों का उल्लंघन कैसे जारी रहता है। प्रशासन और परिवहन विभाग की प्रभावी कार्रवाई से ही यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकती है।

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