कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इंडिया गठबंधन के सांसदों के लिए लंच आयोजित कर रहे हैं। बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। इस बीच राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है।
नई दिल्ली: इंडिया गठबंधन के सांसदों के विरोध प्रदर्शन के एक दिन बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी सांसदों के लिए नई दिल्ली के सागर रत्ना रेस्तरां में दोपहर के भोजन का आयोजन किया है। माना जा रहा है कि इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा हो सकती है। कांग्रेस की कोशिश है कि लंच बैठक के जरिए इंडिया गठबंधन के घटक दलों के बीच समन्वय मजबूत किया जाए और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन को आगे बढ़ाने की रणनीति तैयार की जाए। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब 6 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर आकाशवाणी भवन में प्रवेश करने को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और उनके समर्थकों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।
राहुल और प्रियंका गांधी के खिलाफ एफआईआर
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, 6 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी मार्च के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और उनके समर्थकों पर बिना अनुमति आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश करने का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक, विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद दोनों नेता बस से नीचे उतरे। इसके बाद उन्होंने आकाशवाणी भवन के गेट नंबर 2 पर मौजूद निजी सुरक्षा कर्मियों को कथित तौर पर पार किया और परिसर में प्रवेश किया।
पुलिस का कहना है कि इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और उनके साथ मौजूद समर्थकों ने परिसर में धरना दिया। यह धरना करीब आठ घंटे तक एक बरगद के पेड़ के नीचे चला।
एफआईआर पुलिस को मिली एक शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कांग्रेस नेताओं और उनके साथ मौजूद सांसदों ने बिना अनुमति सरकारी परिसर में प्रवेश किया।
कांग्रेस ने बताया लोकतांत्रिक अधिकार
कांग्रेस नेताओं और उनके सहयोगियों का पक्ष अलग है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण धरना देना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।
प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं ने दिल्ली पुलिस की ओर से लगाए गए बैरिकेड पर भी आपत्ति जताई। उनका आरोप था कि बैरिकेड के कारण आम लोगों को परेशानी हो रही थी, जबकि विपक्ष शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहा था।
कांग्रेस नेताओं का तर्क था कि वे अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सामने रख रहे थे और धरने के जरिए चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे थे।
हालांकि, पुलिस और विपक्ष के बीच विवाद का मुख्य बिंदु सरकारी परिसर में प्रवेश का अधिकार और अनुमति है।
भाजपा ने सरकारी परिसर में प्रवेश पर उठाए सवाल
भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के प्रदर्शन की आलोचना करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन करना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन बिना अनुमति किसी सरकारी परिसर में प्रवेश करने का अधिकार किसी को नहीं है।
भाजपा ने कांग्रेस के नेताओं से सवाल किया कि यदि उन्हें चुनाव और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दे उठाने हैं तो संसद इसका उचित मंच है। पार्टी के अनुसार, सांसद संसद में बहस और चर्चा के जरिए सरकार से सवाल कर सकते हैं।
भाजपा ने कांग्रेस के प्रदर्शन को सड़क पर राजनीतिक टकराव पैदा करने की कोशिश के तौर पर भी पेश किया।
प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड को लेकर विवाद
विपक्षी नेताओं ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड को लेकर सवाल उठाए थे। हालांकि, पुलिस का तर्क है कि प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड लगाना नियमित सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है।
किसी भी बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस आम तौर पर प्रदर्शनकारियों की आवाजाही नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेड लगाती है। इसका उद्देश्य प्रदर्शनकारियों और आम लोगों की आवाजाही को अलग रखना तथा संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकना होता है।
इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष और पुलिस के बीच मतभेद सामने आए हैं। कांग्रेस इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बाधा के रूप में देख रही है, जबकि पुलिस इसे सुरक्षा व्यवस्था का सामान्य हिस्सा बता रही है।

ज्ञानेश कुमार से मुलाकात को लेकर भी विवाद
विपक्षी दलों की मुख्य मांगों में से एक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करना है। विपक्ष चाहता था कि ज्ञानेश कुमार संसद भवन परिसर में करीब 240 सांसदों से मुलाकात करें।
हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। उनके अनुसार, निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत उनसे मुलाकात करने के इच्छुक लोगों को लिखित अनुरोध देना चाहिए और तय समय पर मुलाकात करनी चाहिए।
इस जवाब के बाद विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक और संस्थागत टकराव और बढ़ गया।
प्रियंका गांधी की कथित बातचीत पर भी सियासत
भाजपा ने कांग्रेस की उस चर्चा पर भी सवाल उठाए जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि प्रियंका गांधी वाड्रा केंद्रीय गृह सचिव के संपर्क में थीं और मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात का समय दिलाने का प्रयास कर रही थीं।
बाद में सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि ऐसी कोई मुलाकात कराने का अनुरोध नहीं किया गया था।
इस मुद्दे को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया। कांग्रेस की ओर से इस पूरे घटनाक्रम को विपक्ष की चुनाव आयोग से मुलाकात की कोशिश के संदर्भ में देखा गया।
खड़गे की लंच बैठक क्यों अहम?
मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से आयोजित लंच बैठक को विपक्षी एकजुटता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इंडिया गठबंधन के सांसदों के सामने अब यह सवाल है कि चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध को किस रूप में आगे बढ़ाया जाए।
बैठक में प्रदर्शन की अगली रणनीति, विपक्षी दलों के बीच समन्वय और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाने पर चर्चा हो सकती है।
कांग्रेस को उम्मीद है कि लंच बैठक से गठबंधन के घटक दलों के बीच साझा रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी। हालांकि, सभी सहयोगी दलों की मौजूदगी को लेकर अभी पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं है।
अखिलेश यादव की मौजूदगी पर स्थिति साफ नहीं
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की लंच बैठक में मौजूदगी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद अखिलेश यादव को जब संसद मार्ग से दूसरे स्थान पर ले जाया गया, तो वह वहां से लखनऊ रवाना हो गए थे।
ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह खड़गे की बैठक में शामिल होते हैं या नहीं। इंडिया गठबंधन की रणनीति में समाजवादी पार्टी की भूमिका महत्वपूर्ण है, इसलिए उनकी मौजूदगी या अनुपस्थिति बैठक के राजनीतिक संदेश को प्रभावित कर सकती है।
विपक्ष की रणनीति में आगे क्या?
6 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों को राजनीतिक रूप से मजबूती से उठाना है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़े विवादों से बचना भी जरूरी होगा।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर ने आंदोलन को नया राजनीतिक आयाम दे दिया है। कांग्रेस इसे विपक्ष के लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ सकती है, जबकि भाजपा इसे सरकारी परिसर में कथित अनधिकृत प्रवेश के मुद्दे के रूप में उठा रही है।
खड़गे की लंच बैठक इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में हो रही है। बैठक के बाद विपक्ष की ओर से आंदोलन की अगली रणनीति और मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ संवाद की कोशिशों पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
चुनाव आयोग को लेकर जारी राजनीतिक टकराव
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध अब संसद और सड़क दोनों स्तरों पर दिखाई दे रहा है। विपक्ष जहां उनसे सीधे संवाद और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर जवाब चाहता है, वहीं चुनाव आयोग अपने निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत मुलाकात की प्रक्रिया पर जोर दे रहा है।
इसी बीच राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ एफआईआर ने राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद की कार्यवाही, विपक्षी एकजुटता और चुनाव आयोग के साथ संबंधों पर असर डाल सकता है।
फिलहाल खड़गे की बैठक का सबसे बड़ा उद्देश्य विपक्षी दलों को एक साझा रणनीति पर लाना माना जा रहा है। इसके बाद यह तय होगा कि इंडिया गठबंधन अपना विरोध किस रूप में और कितनी तीव्रता से आगे बढ़ाता है।











