भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी20 सीरीज खत्म होने के बाद अब भारतीय टीम का ध्यान न्यूजीलैंड दौरे पर है। वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज का आखिरी मुकाबला बारिश के कारण पूरा नहीं हो सका और सीरीज बराबरी पर समाप्त हुई।
बिजनेस न्यूज़: माल ढोने वाले ट्रक ड्राइवरों और ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों को राहत देने के लिए तमिलनाडु ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) के तहत वाहनों की जांच की प्रक्रिया में बदलाव किया है। नए निर्देशों के अनुसार, अब ट्रकों को रोकने के लिए ठोस खुफिया जानकारी और वरिष्ठ अधिकारी की मंजूरी जरूरी होगी। इस कदम का उद्देश्य सड़क पर होने वाली मनमानी जांच को रोकना, जवाबदेही बढ़ाना और माल की आवाजाही को आसान बनाना है।
राज्य ने ट्रकों को नियमित रूप से रोककर जांच करने वाली रोविंग स्क्वॉड की व्यवस्था की जगह फ्लाइंग स्क्वॉड को लागू करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के तहत जांच दल अपनी मर्जी से रास्ते में किसी भी वाहन को नहीं रोक सकेंगे। उन्हें निर्धारित प्रक्रिया और उपलब्ध खुफिया जानकारी के आधार पर ही कार्रवाई करनी होगी।
क्या है रोविंग स्क्वॉड और फ्लाइंग स्क्वॉड में अंतर?
रोविंग स्क्वॉड आम तौर पर सड़कों पर घूमकर माल ले जाने वाले वाहनों की जांच करती है। इस व्यवस्था में ट्रांसपोर्टरों को रास्ते में अचानक जांच का सामना करना पड़ सकता है, जिससे कई बार माल की डिलीवरी में देरी होने की आशंका रहती है।
इसके विपरीत, फ्लाइंग स्क्वॉड को विशेष सूचना मिलने पर कार्रवाई करने के लिए तैनात किया जाता है। तमिलनाडु में लागू किए गए नए निर्देशों के मुताबिक, मालवाहक वाहन को रोकने से पहले संबंधित अधिकारियों के पास समय के साथ दर्ज इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में ठोस खुफिया जानकारी होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, संयुक्त आयुक्त की अनुमति भी आवश्यक होगी। इस बदलाव से जांच की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होने और अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
GST काउंसिल की बैठक के बाद बदली व्यवस्था
मालवाहक वाहनों की जांच को अधिक पारदर्शी बनाने का मुद्दा GST काउंसिल की 57वीं बैठक में भी उठाया गया था। बैठक में ई-वे बिल के आधार पर माल की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया में सुधार की सिफारिश की गई थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्यों की सीमाओं के बीच सामान ले जाने वाले वाहनों को अनावश्यक रूप से न रोका जाए।
ई-वे बिल इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज है, जिसका इस्तेमाल निर्धारित नियमों के तहत माल की आवाजाही से संबंधित जानकारी दर्ज करने के लिए किया जाता है। इसके आधार पर अधिकारी माल और परिवहन से जुड़े विवरणों का सत्यापन कर सकते हैं।
काउंसिल की सिफारिशों के मुताबिक, माल की जांच, उसे हिरासत में लेने या जब्त करने की कार्रवाई का अधिकार सप्लायर राज्य अथवा गंतव्य राज्य के अधिकारियों तक सीमित रखने की व्यवस्था प्रस्तावित की गई। इसका मकसद यह है कि दोनों राज्यों के बीच से गुजरने वाले हर राज्य में वाहन को रोककर जांच करने की स्थिति न बने।
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संयुक्त आयुक्त की मंजूरी क्यों होगी जरूरी?
तमिलनाडु के नए निर्देशों में जांच प्रक्रिया के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को अहम बनाया गया है। जांच दल संयुक्त आयुक्त (खुफिया) के कार्यालय में तैनात रहेंगे और वाहन रोकने से पहले निर्धारित मंजूरी प्राप्त करेंगे। इस व्यवस्था के तहत इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में दर्ज खुफिया जानकारी और लिखित निर्देश कार्रवाई का आधार बनेंगे। इससे यह पता लगाना आसान हो सकता है कि किसी वाहन को किस कारण रोका गया और जांच के लिए किस स्तर पर अनुमति दी गई थी।
हालांकि, नए नियमों का मतलब यह नहीं है कि मालवाहक वाहनों की जांच पूरी तरह बंद कर दी गई है। नियमों के अनुसार, आवश्यक परिस्थितियों में संबंधित अधिकारियों को जांच करने का अधिकार बना रहेगा। बदलाव मुख्य रूप से वाहनों को रोकने की प्रक्रिया और उसके लिए जरूरी अनुमति से जुड़ा है।
ट्रांसपोर्टरों और कारोबार को क्या फायदा होगा?
ट्रक परिवहन देश की सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पादों तक, बड़ी मात्रा में सामान सड़क मार्ग से एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाया जाता है। रास्ते में अनावश्यक रुकावट आने से डिलीवरी में देरी, परिचालन लागत और लॉजिस्टिक्स से जुड़े खर्च बढ़ सकते हैं। नई व्यवस्था से ट्रांसपोर्टरों को अनावश्यक जांच से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही, तय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होने से पारदर्शिता बढ़ सकती है और मनमानी रोक-टोक की शिकायतों में कमी आ सकती है।









