शामली में विधानसभा चुनाव से पहले टिकट की दौड़ तेज, भाजपा-सपा-रालोद में दावेदारी और दल-बदल से बढ़ी हलचल

शामली की थानाभवन, शामली और कैराना सीटों पर विधानसभा चुनाव से पहले टिकट की दावेदारी तेज है। भाजपा, सपा और रालोद में दल-बदल से समीकरण बदल रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के शामली जिले में विधानसभा चुनाव से पहले थानाभवन, शामली और कैराना सीटों पर टिकट को लेकर दावेदार सक्रिय हैं। भाजपा, सपा और रालोद में समीकरण बदल रहे हैं, जबकि बसपा की रणनीति अभी स्पष्ट नहीं है।

शामली: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच शामली जिले की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। जिले की थानाभवन, शामली और कैराना सीटों पर विभिन्न दलों के नेताओं ने टिकट के लिए दावेदारी तेज कर दी है। नेताओं के दल बदलने और नए चेहरों की एंट्री से राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं। वहीं, बसपा की ओर से अब तक प्रमुख दावेदार सामने नहीं आने के कारण उसकी रणनीति पर चर्चा जारी है।

शामली की तीनोंसीटों पर टिकट के लिए बढ़ी दावेदारी

उत्तर प्रदेश के शामली जिले में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। थानाभवन, शामली और कैराना सीटों पर अलग-अलग दलों के नेताओं के बीच टिकट पाने की प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। भाजपा, समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) में दावेदार अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं। हाल के दिनों में हुए दल-बदल से भी कई सीटों पर समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं।

थानाभवन सीट पर भाजपा और रालोद के दावेदारों के बीच मुकाबले की चर्चा है। शामली सीट पर सपा के नेताओं के साथ भाजपा छोड़कर आए नए चेहरे की दावेदारी ने हलचल बढ़ाई है। वहीं, कैराना में सपा विधायक नाहिद हसन के अलावा भाजपा खेमे में कई नाम चर्चा में हैं। बसपा की ओर से अभी तक कोई बड़ा चेहरा सामने नहीं आया है।

थानाभवन सीट पर भाजपा और रालोद में मुकाबले की चर्चा

थानाभवन विधानसभा सीट पर भाजपा के पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा क्षेत्र में सक्रिय हैं। पूर्व चेयरमैन संजय शर्मा भी टिकट के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। दूसरी ओर, रालोद के मौजूदा विधायक अशरफ अली खान दोबारा चुनाव लड़ने के इच्छुक बताए जा रहे हैं। पूर्व विधायक राव अब्दुल वारिस की दावेदारी से पार्टी के भीतर प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।

रालोद इस सीट पर किस सामाजिक समीकरण के आधार पर प्रत्याशी उतारेगा, इसे लेकर भी चर्चा हो रही है। संभावित उम्मीदवार के चयन में स्थानीय समीकरण और गठबंधन की रणनीति की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

सपा खेमे में राहुल सैनी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य और रालोद के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश सैनी, ठा. शेर सिंह राणा तथा वतन सैनी के नाम भी दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं, आजाद समाज पार्टी (आसपा) ने राव मौसम को अपना प्रत्याशी घोषित किया है।

पूर्व सांसद अमीर आलम और उनके बेटे नवाजिश आलम खान के कांग्रेस में शामिल होने के बाद इस सीट पर कांग्रेस की संभावित भूमिका को लेकर भी चर्चा है। सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की स्थिति के आधार पर प्रत्याशी चयन का फैसला चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

शामली और कैराना में भी बदल रहे राजनीतिक समीकरण

शामली विधानसभा सीट पर सपा में शामिल हुए पूर्व विधायक राजेश्वर बंसल, उनके बेटे अखिल बंसल और पूर्व चेयरमैन दीपा पंवार दावेदारी जता रहे हैं। हाल ही में भाजपा छोड़कर सपा में आए हरबीर मलिक की एंट्री से यहां प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई है। रालोद के मौजूदा विधायक प्रसन्न चौधरी भी दोबारा चुनाव मैदान में उतरने के लिए सक्रिय हैं।

कैराना सीट पर सपा विधायक नाहिद हसन की दावेदारी प्रमुख मानी जा रही है। भाजपा की ओर से एमएलसी वीरेंद्र सिंह के बेटे मनीष चौहान, मृगांका सिंह और अनिल चौहान के नाम टिकट के संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं। अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को करना है।

बसपा की रणनीति पर टिकी नजर

शामली जिले में बसपा की ओर से फिलहाल कोई बड़ा दावेदार खुलकर सामने नहीं आया है। इससे पार्टी की चुनावी रणनीति को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, प्रत्याशी चयन और चुनावी तैयारी को लेकर पार्टी का अंतिम रुख स्पष्ट होने के बाद ही उसकी भूमिका का आकलन किया जा सकेगा।

कुल मिलाकर शामली की तीनों विधानसभा सीटों पर टिकट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। दल-बदल, नए दावेदारों की एंट्री और गठबंधन की संभावनाओं के बीच सभी प्रमुख दलों के सामने उम्मीदवार चयन की चुनौती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पार्टियां किन चेहरों पर भरोसा जताती हैं और अंतिम प्रत्याशी सूची आने के बाद स्थानीय राजनीतिक समीकरण किस तरह बदलते हैं।

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