इंटर्नशिप के लिए कैदी ने मांगी जमानत, हाईकोर्ट ने जेल में व्यवस्था का सुझाव दिया

Gujarat High Court ने BA इंटर्नशिप के लिए जमानत मांगने वाले उम्रकैद कैदी के मामले में जेल के भीतर ही वर्चुअल इंटर्नशिप की व्यवस्था का सुझाव दिया।

गुजरात हाईकोर्ट में उम्रकैद की सजा काट रहे एक कैदी ने BA की अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करने के लिए अस्थायी जमानत मांगी। सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय ने बताया कि इंटर्नशिप जेल से भी की जा सकती है, जिसके बाद अदालत ने आवश्यक व्यवस्था करने की बात कही।

अहमदाबाद: गुजरात हाईकोर्ट में एक अनोखा मामला सामने आया, जहां उम्रकैद की सजा काट रहा एक कैदी अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के लिए इंटर्नशिप करना चाहता था। कैदी ने इसके लिए अस्थायी जमानत की मांग की, लेकिन सुनवाई के दौरान यह सुझाव सामने आया कि यदि इंटर्नशिप वर्चुअल माध्यम से संभव है तो जेल के भीतर ही आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

पढ़ाई पूरी करने के लिए अदालत पहुंचा कैदी

गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद 26 वर्षीय भूपत रबारी इन दिनों अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए है। स्नातक पाठ्यक्रम के अंतिम चरण में पहुंच चुके भूपत ने BA डिग्री प्राप्त करने के लिए जरूरी इंटर्नशिप पूरी करने की अनुमति मांगते हुए गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया।

इंटर्नशिप के लिए कैदी ने मांगी जमानत, हाईकोर्ट ने जेल में व्यवस्था का सुझाव दिया

याचिका में उसने कहा कि विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार इंटर्नशिप पूरी किए बिना उसे डिग्री नहीं मिल सकेगी। इसलिए उसे कुछ समय के लिए अस्थायी जमानत प्रदान की जाए ताकि वह आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर सके।

विश्वविद्यालय ने रखा वैकल्पिक सुझाव

मामले की सुनवाई के दौरान गुजरात यूनिवर्सिटी की ओर से अदालत को बताया गया कि BA पाठ्यक्रम में इंटर्नशिप अनिवार्य जरूर है, लेकिन इसे जेल में रहते हुए भी पूरा किया जा सकता है। विश्वविद्यालय की इस दलील के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया।

सुनवाई कर रही अदालत ने इस बात पर विचार किया कि यदि तकनीकी माध्यम से इंटर्नशिप पूरी करने की अनुमति है तो इसके लिए जेल से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके बाद कैदी की ओर से दायर अस्थायी जमानत की याचिका वापस ले ली गई।

अपहरण और फिरौती मामले में काट रहा है सजा

भूपत रबारी वर्ष 2018 के एक अपहरण और फिरौती मामले में दोषी ठहराया गया था। वर्ष 2020 में सत्र न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। फिलहाल वह साबरमती सेंट्रल जेल में सजा काट रहा है।

जेल में रहते हुए उसने अपनी शिक्षा जारी रखी। पहले वह विज्ञान विषय का छात्र था, लेकिन बाद में गुजरात यूनिवर्सिटी में बाह्य छात्र के रूप में BA पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया। हाल ही में उसे छठे सेमेस्टर की परीक्षा देने के लिए सीमित अवधि की जमानत भी दी गई थी।

इंटरनेट सुविधा पर हुई चर्चा

सुनवाई के दौरान कैदी के वकील ने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया कि यदि इंटर्नशिप ऑनलाइन माध्यम से करनी है तो जेल में इंटरनेट सुविधा की जरूरत होगी। सामान्य तौर पर कैदियों को इंटरनेट उपयोग की अनुमति नहीं होती, इसलिए इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए जाने की मांग की गई।

अदालत ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय वर्चुअल इंटर्नशिप की अनुमति देता है तो जेल प्रशासन आवश्यक व्यवस्था कर सकता है। अदालत का मानना था कि शिक्षा और सुधारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए उपलब्ध नियमों के तहत उचित समाधान निकाला जा सकता है।

शिक्षा और सुधार की दिशा में अहम संकेत

यह मामला जेलों में बंद कैदियों की शिक्षा और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को भी सामने लाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा कैदियों के पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।

हालांकि अदालत ने जमानत देने से इनकार किया, लेकिन जेल के भीतर ही इंटर्नशिप पूरी करने की संभावना पर सकारात्मक रुख दिखाया। अब आगे यह देखना होगा कि विश्वविद्यालय और जेल प्रशासन मिलकर इस व्यवस्था को किस तरह लागू करते हैं, ताकि कैदी अपनी पढ़ाई पूरी कर सके।

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