राफेल नडाल ने खुलासा किया कि करियर के दौरान गंभीर चोटों और दुर्लभ बीमारी के बावजूद उन्होंने इंजेक्शन लेकर खेला। दर्द को सहते हुए उन्होंने टेनिस के प्रति जुनून बनाए रखा और संघर्ष के बीच 22 ग्रैंडस्लैम खिताब जीतकर इतिहास रचा।
स्पोर्ट्स: स्पेन के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी राफेल नडाल ने अपने करियर को लेकर एक बेहद भावुक और चौंकाने वाला खुलासा किया है। 39 वर्षीय नडाल ने बताया कि उन्होंने अपने पूरे करियर में लगातार गंभीर चोटों और असहनीय दर्द के बावजूद खेलना जारी रखा, क्योंकि उनके लिए टेनिस का जुनून शारीरिक तकलीफों से कहीं बड़ा था।
नेटफ्लिक्स की एक नई डॉक्यूमेंट्री सीरीज में नडाल ने खुलकर बताया कि कैसे उन्होंने कई मौकों पर दर्द निवारक इंजेक्शन और मेडिकल ट्रीटमेंट की मदद से कोर्ट पर उतरकर बड़े खिताब जीते, जिनमें उनका 22वां ग्रैंड स्लैम भी शामिल है।
2005 में शुरू हुआ दर्द का लंबा सफर
नडाल के करियर की शुरुआत 2005 में फ्रेंच ओपन से हुई थी, जहां उन्होंने पहली ही बार में खिताब जीतकर दुनिया को चौंका दिया था। उस समय उनका खेल शक्ति, फिटनेस और कभी हार न मानने वाले रवैये का प्रतीक बन गया था।
लेकिन इसी साल मैड्रिड ओपन के दौरान उनके बाएं पैर में गंभीर चोट लगी, जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी। जांच के बाद पता चला कि वे एक दुर्लभ बीमारी “म्यूलर-वाईस सिंड्रोम” से पीड़ित हैं, जिसमें पैर की हड्डियों में असहनीय दर्द होता है।
दुर्लभ बीमारी ने बदल दी जिंदगी, लेकिन नहीं रोका सफर
डॉक्टरों को उस समय आशंका थी कि नडाल शायद दोबारा प्रोफेशनल टेनिस नहीं खेल पाएंगे। लेकिन नडाल ने हार मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने विशेष इनसोल (जूते के अंदर सपोर्ट पैड) का इस्तेमाल करके कोर्ट पर वापसी की।
इसके बाद उनका करियर लगातार चोटों और दर्द के बीच आगे बढ़ता रहा। उन्होंने लगभग हर मैच में किसी न किसी स्तर का दर्द झेला, लेकिन खेलना नहीं छोड़ा।
घुटनों और शरीर के अन्य हिस्सों पर बढ़ता दबाव
पैर की चोट के कारण धीरे-धीरे उनके शरीर के अन्य हिस्सों पर भी असर पड़ने लगा। घुटनों में गंभीर चोटें आने लगीं और लंबे समय तक खेलना उनके लिए और कठिन हो गया।
दर्द को नियंत्रित करने के लिए उन्हें लगातार पेनकिलर दवाइयों का सहारा लेना पड़ा, जिसका असर उनके पाचन तंत्र पर भी पड़ा। डॉक्यूमेंट्री में नडाल ने स्वीकार किया कि कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो जाती थी कि सामान्य जीवन भी प्रभावित होता था।
फ्रेंच ओपन 2022: इंजेक्शन लेकर खेला ऐतिहासिक फाइनल
नडाल के करियर का सबसे चर्चित और प्रेरणादायक पल फ्रेंच ओपन 2022 में देखने को मिला। उन्होंने बताया कि उस टूर्नामेंट के दौरान उनके पैर का दर्द इतना बढ़ गया था कि डॉक्टरों को नस सुन्न करने वाले इंजेक्शन लगाने पड़े।
इस प्रक्रिया के बाद उन्हें अपने पैर का एहसास तक नहीं होता था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कोर्ट पर उतरकर अपने करियर का 14वां फ्रेंच ओपन खिताब जीत लिया। यह जीत उनके करियर की सबसे कठिन लेकिन सबसे प्रतिष्ठित उपलब्धियों में से एक मानी जाती है।
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बचपन से ही संघर्ष की आदत, परिवार और कोच का प्रभाव
नडाल ने बताया कि उनका संघर्ष कोई नया नहीं था, बल्कि यह बचपन से उनके स्वभाव का हिस्सा रहा है। उनके चाचा और कोच टोनी नडाल ने उन्हें हमेशा कठिन परिस्थितियों में ट्रेनिंग करवाई।
उन्होंने बताया कि बचपन में टूटी हुई उंगली के साथ भी उन्होंने टूर्नामेंट खेला और जीत हासिल की थी। यही जिद और मानसिक मजबूती उनके करियर की पहचान बन गई।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ा असर
लगातार चोटों, दर्द और प्रदर्शन के दबाव ने उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाला। नडाल ने स्वीकार किया कि एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें मनोचिकित्सक की मदद लेनी पड़ी।
बाद में उन्होंने अपनी कोचिंग टीम में बदलाव किया और 2016 में कार्लोस मोया को शामिल किया। इसके बाद उन्होंने अपने जीवन और खेल दोनों में संतुलन बनाने की कोशिश शुरू की।
करियर का दूसरा सुनहरा दौर
2017 के बाद नडाल ने एक बार फिर शानदार वापसी की और 2024 तक आठ और ग्रैंड स्लैम खिताब अपने नाम किए। इस दौरान उन्होंने दुनिया के सबसे सफल टेनिस खिलाड़ियों में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली।
कुल मिलाकर नडाल ने अपने करियर में 22 ग्रैंड स्लैम खिताब जीते और टेनिस इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों में शामिल हो गए।
दर्द बनाम जुनून: नडाल की सोच
नडाल ने अपने इंटरव्यू में कहा कि अगर उन्होंने दर्द और जोखिम के साथ खेलने का फैसला नहीं किया होता, तो शायद उनके ग्रैंड स्लैम की संख्या 10 से 12 कम होती।
उनके अनुसार, उनके लिए टेनिस सिर्फ एक खेल नहीं था, बल्कि एक जुनून था, जिसने उन्हें हर मुश्किल से लड़ने की ताकत दी।
टेनिस जगत में नडाल की विरासत
राफेल नडाल का करियर सिर्फ जीत और ट्रॉफियों की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, समर्पण और दर्द सहने की क्षमता का प्रतीक है। उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि नडाल ने खेल में जिस तरह की शारीरिक और मानसिक सहनशक्ति दिखाई, वह आधुनिक टेनिस इतिहास में दुर्लभ है।











