ग्वालियर में कोविड काल के दौरान बने 70 फर्जी पासपोर्ट की जांच में बांग्लादेशी नागरिकों से कनेक्शन सामने आया है। डबरा के बौद्ध विहार का पता इस्तेमाल किया गया। एसटीएफ ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में कोविड काल के दौरान तैयार किए गए 70 फर्जी पासपोर्ट का मामला सामने आया है। एसटीएफ की जांच में इन दस्तावेजों का कनेक्शन बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़ने की बात सामने आई है। पासपोर्ट में डबरा स्थित बौद्ध विहार का पता इस्तेमाल किया गया था, जबकि जांच में पाया गया कि संबंधित लोग वहां रहते ही नहीं थे। मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है।
ग्वालियर से बने 70 पासपोर्ट जांच के घेरे में
ग्वालियर में कोविड काल के दौरान तैयार किए गए 70 पासपोर्ट को लेकर एसटीएफ की जांच जारी है। जांच एजेंसी के अनुसार, इन पासपोर्ट का कनेक्शन बांग्लादेशी नागरिकों से बताया जा रहा है। सभी दस्तावेजों में डबरा स्थित एक बौद्ध विहार का पता दर्ज किया गया था।
जांच में यह भी सामने आया कि जिन लोगों के नाम और समुदाय के आधार पर दस्तावेज तैयार किए गए, वे बौद्ध विहार में रहते ही नहीं थे। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन लोगों के लिए स्थानीय स्तर पर दस्तावेज कैसे तैयार किए गए और पासपोर्ट प्रक्रिया में इनका सत्यापन किस तरह हुआ।
इन फर्जी पासपोर्ट के आधार पर कुछ लोगों के भूटान, नेपाल, चीन और थाईलैंड तक यात्रा करने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। वर्ष 2021-22 में तैयार किए गए इन पासपोर्ट पर पहली बार वर्ष 2023 में संदेह हुआ था। ग्वालियर से जारी एक पासपोर्ट मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़े जाने के बाद पूरे मामले की जांच आगे बढ़ी।
फर्जी आधार और मार्कशीट से तैयार किए दस्तावेज
एसटीएफ की जांच के मुताबिक, गिरोह ने कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिकों के लिए स्थानीय स्तर पर फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी, निवास प्रमाण पत्र और 10वीं की अंकसूची सहित कई दस्तावेज तैयार किए। इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल पासपोर्ट के लिए आवेदन करने में किया गया।
जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि 70 पासपोर्ट में गवाह के तौर पर मुख्य आरोपी रियाल चौधरी का नाम दर्ज था। इन दस्तावेजों में उसका मोबाइल नंबर भी इस्तेमाल किया गया था। अब एसटीएफ यह जांच कर रही है कि एक ही व्यक्ति के इतनी बड़ी संख्या में गवाह बनने के बावजूद दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान यह बात अधिकारियों के सामने क्यों नहीं आई।
कोविड काल में वैरीफिकेशन प्रक्रिया का उठाया फायदा
जांच के दौरान सामने आया है कि पासपोर्ट आवेदन से पहले नगर पालिका डबरा से फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए थे। इसके बाद इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट के लिए आवेदन किया गया।
यह पूरा मामला कोविड काल से जुड़ा है, जब सरकारी कार्यालयों में वर्क फ्रॉम होम और सीमित स्तर पर कामकाज चल रहा था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इसी अवधि में पासपोर्ट प्रक्रिया में फिजिकल वैरीफिकेशन नहीं होने का कथित तौर पर फायदा उठाया गया।
एसटीएफ अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने से लेकर पासपोर्ट जारी होने तक प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
दो आरोपी गिरफ्तार, कई लोगों की भूमिका की जांच
एसटीएफ की ग्वालियर यूनिट ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें मध्य प्रदेश से रियाल चौधरी और साउथ दिल्ली से विप्लव अधिकारी शामिल हैं। शुरुआती जांच में दोनों को बिचौलिया बताया जा रहा है।
जांच आगे बढ़ने के साथ ग्वालियर और डबरा के कुछ अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। इसके अलावा ग्वालियर से लेकर बांग्लादेश सीमा तक सक्रिय बताए जा रहे बिचौलियों के नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी को मामले में 20 से ज्यादा लोगों के नाम सामने आने की संभावना है।
असम और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में जांच
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसटीएफ ने जांच के लिए करीब 10 टीमें लगाई हैं। मध्य प्रदेश की चार टीमें ग्वालियर सहित दूसरे जिलों में स्थानीय नेटवर्क की जानकारी जुटा रही हैं। वहीं असम, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में छह टीमें फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क, बिचौलियों और संदिग्ध लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं।
एसटीएफ यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट तैयार कराने वाला नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही है।
एसटीएफ ने 70 फर्जी पासपोर्ट बरामद किए
एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया के मुताबिक, ग्वालियर यूनिट ने फर्जी पासपोर्ट तैयार करने वाले रैकेट का खुलासा किया है। अब तक 70 फर्जी पासपोर्ट पकड़े गए हैं और मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका को लेकर जांच अभी जारी है।










