उत्तराखंड के हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को जनरल टिकट के बदले एसी कोच में कन्फर्म सीट दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में बिहार के पांच युवकों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य यात्रियों से कहते थे कि उनका मामा रेलवे में टीटी है और वह जनरल टिकट को एसी थर्ड क्लास में बदलवा सकता है। इसी बहाने उन्होंने पश्चिम बंगाल के दो मजदूरों को अपने जाल में फंसाया। आरोपियों ने दोनों से नकदी, मोबाइल फोन और सामान ले लिया। इसके बाद मोबाइल और यूपीआई से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल कर उनके बैंक खातों से कुल 90,500 रुपये निकाल लिए गए। जीआरपी ने कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से 25 हजार रुपये नकद और पीड़ित का मोबाइल फोन बरामद किया है। इसके अलावा ठगी की रकम में से 49,999 रुपये बैंक खाते में फ्रीज कराए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
घटना 10 अक्टूबर की रात की बताई गई है। पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के रहने वाले बिस्वजीत सौरेन और उनके साथी रंजीत कोरा हरिद्वार में मजदूरी करते थे। दोनों त्योहार पर अपने घर लौटने की तैयारी में थे। इसके लिए वे हरिद्वार रेलवे स्टेशन पहुंचे और कुंभ एक्सप्रेस से यात्रा करने के लिए जनरल श्रेणी के टिकट लिए। ट्रेन का इंतजार करते समय दो युवक उनके पास आए। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि वे बिहार के रहने वाले हैं और उनके मामा रेलवे में टीटी हैं। उन्होंने दोनों मजदूरों को भरोसा दिलाया कि उनके जनरल टिकट को एसी थर्ड क्लास में बदलवाकर कन्फर्म सीट दिलाई जा सकती है।
आरोपियों ने यात्रियों का विश्वास जीतने के लिए एक अन्य व्यक्ति से भी उनकी मुलाकात कराई। उस व्यक्ति ने खुद को टीटी बताया और उन्हें एसी कोच में यात्रा कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद रेलवे के नियमों का हवाला देकर कहा गया कि एसी कोच में जाने से पहले सामान जमा कराना होगा और उसकी रसीद बनवाई जाएगी। घर जाने की तैयारी कर रहे मजदूरों को यह प्रक्रिया सही लगी और वे आरोपियों की बातों में आ गए। इसी भरोसे के आधार पर उन्होंने अपना सामान और नकदी उनके हवाले कर दी।
पुलिस के मुताबिक, दोनों मजदूरों से कुल 12 हजार रुपये नकद लिए गए। बिस्वजीत ने अपना मोबाइल फोन और सामान से भरा बैग भी आरोपियों को दे दिया, जबकि उनके साथी रंजीत ने भी छह हजार रुपये दिए। आरोप है कि आरोपियों ने मोबाइल का पैटर्न लॉक, पासवर्ड और यूपीआई पिन जैसी जानकारी भी हासिल कर ली। फिर सामान जमा कराने और रसीद लेने के बहाने वे दोनों यात्रियों को रेलवे स्टेशन के गेट नंबर दो के पास छोड़कर फरार हो गए। काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी जब न सामान मिला और न रसीद, तो मजदूरों को ठगी का शक हुआ।
अगले दिन बैंक से जानकारी लेने पर पता चला कि उनके खातों से कुल 90,500 रुपये निकाल लिए गए हैं। मेहनत से कमाई गई रकम गायब होने की जानकारी मिलने के बाद दोनों मजदूरों ने जीआरपी में शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपियों की पहचान करने के लिए रेलवे स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। पीड़ितों से मिली जानकारी, संदिग्धों के हुलिये और अन्य सुरागों के आधार पर पुलिस टीम ने तलाश तेज कर दी।
जीआरपी ने सीसीटीवी फुटेज, मुखबिर तंत्र और अन्य जांच माध्यमों की मदद से करीब 30 घंटे के भीतर पांचों आरोपियों को हरिद्वार रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सौरभ मंडल, सुमित मंडल, किशन कुमार, जितेंद्र कुमार चौधरी और बंटी कुमार के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, सभी बिहार के मुंगेर और भागलपुर जिलों के निवासी हैं। आरोपियों के पास से 25 हजार रुपये नकद और पीड़ित का मोबाइल फोन बरामद किया गया। बैंक खाते में स्थानांतरित ठगी की रकम में से 49,999 रुपये फ्रीज कराए गए हैं। पुलिस ने आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
पुलिस अब आरोपियों के आपराधिक इतिहास और इस तरह की अन्य घटनाओं में उनकी संभावित भूमिका की जानकारी जुटा रही है। फ्रीज कराई गई रकम को पीड़ितों तक वापस पहुंचाने के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जीआरपी की ओर से कार्रवाई करने वाली टीम को पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। हालांकि, बैंक में फ्रीज रकम की वापसी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
इस घटना में ठगी का तरीका यात्रियों के भरोसे का फायदा उठाने पर आधारित था। आरोपियों ने पहले बातचीत कर नजदीकी बढ़ाई, फिर रेलवे कर्मचारी से संबंध होने का दावा किया और उसके बाद एसी कोच में यात्रा कराने का लालच दिया। सामान जमा कराने की कथित प्रक्रिया के बहाने उन्होंने नकदी और मोबाइल अपने कब्जे में लिया। मोबाइल और यूपीआई से जुड़ी जानकारी मिलने के बाद बैंक खाते से रकम निकाले जाने का आरोप है।
रेलवे यात्रियों के लिए यह घटना सावधानी बरतने का संकेत है। टिकट की श्रेणी बदलवाने या कन्फर्म सीट पाने के लिए किसी अनजान व्यक्ति के मौखिक आश्वासन पर भरोसा नहीं करना चाहिए। टिकट से संबंधित जानकारी रेलवे के अधिकृत काउंटर, टीटीई या आधिकारिक माध्यम से ही प्राप्त करनी चाहिए। किसी अजनबी को मोबाइल का पासवर्ड, स्क्रीन लॉक, यूपीआई पिन या बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी देना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। यदि खाते से अनधिकृत लेनदेन हो जाए, तो तुरंत बैंक को सूचना देकर साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
फिलहाल हरिद्वार जीआरपी ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दो मजदूरों से जनरल टिकट को एसी में बदलवाने का झांसा देकर 90,500 रुपये की ठगी किए जाने के आरोप की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस अब आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड, ठगी की रकम और अन्य संभावित मामलों से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।








