हरियाणा सरकार ने मंडियों में धान की खरीद और उठान में आ रही परेशानियों को कम करने के लिए तौल व्यवस्था में बदलाव किया है। अब राइस मिलों के धर्मकांटों पर भी धान तौलने की अनुमति दी गई है, जिसका किसान यूनियन ने विरोध किया है।
हरियाणा: राज्य की मंडियों में धान की खरीद और उठान की प्रक्रिया को तेज करने के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने तौल व्यवस्था में बदलाव का फैसला लिया है। इसके तहत अब राइस मिलों में लगे धर्मकांटों का इस्तेमाल भी धान की तौल के लिए किया जा सकेगा। सरकार के इस कदम का उद्देश्य मंडियों में लगने वाली देरी को कम करना है, हालांकि किसान यूनियन ने इस फैसले पर विरोध जताया है।
राइस मिलों के धर्मकांटों पर भी होगी धान की तौल
हरियाणा में धान खरीद के दौरान मंडियों में तौल और फसल उठान से जुड़ी समस्याओं को देखते हुए राज्य सरकार ने व्यवस्था में बदलाव किया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के फैसले के अनुसार, अब मंडियों के अलावा राइस मिलों में लगे धर्मकांटों पर भी धान की तौल की जा सकेगी। इस कदम का मकसद खरीद प्रक्रिया में तेजी लाना और मंडियों में किसानों की फसल की तौल के लिए लगने वाले इंतजार को कम करना है।

धान की आवक बढ़ने पर मंडियों में तौल और उठान का काम प्रभावित होने से किसानों और आढ़तियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में वैकल्पिक तौल केंद्रों का इस्तेमाल करने से प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस व्यवस्था को किस तरह लागू किया जाएगा और तौल के दौरान निगरानी की क्या व्यवस्था होगी, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराए गए अंश में नहीं है।
खरीद और उठान में देरी कम करने की कोशिश
धान की सरकारी खरीद के दौरान समय पर तौल और फसल का उठान महत्वपूर्ण होता है। तौल में देरी होने पर मंडियों में धान का जमाव बढ़ सकता है, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने और अगली प्रक्रिया पूरी कराने में परेशानी होती है। राइस मिलों के धर्मकांटों को तौल व्यवस्था में शामिल करने का फैसला इसी समस्या को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
सरकार के इस कदम से तौल के लिए उपलब्ध विकल्प बढ़ सकते हैं और मंडियों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तौल पारदर्शी तरीके से हो, रिकॉर्ड सही रखा जाए और किसानों को उनकी उपज की मात्रा को लेकर किसी तरह की परेशानी न हो।
किसान यूनियन ने फैसले पर जताया विरोध
सरकार के निर्णय का किसान यूनियन ने विरोध किया है। इससे खरीद प्रक्रिया में नई व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। किसानों की आपत्तियों और विरोध के कारणों का पूरा विवरण उपलब्ध कराए गए समाचार अंश में नहीं है, इसलिए उनके विरोध के पीछे किसी खास वजह की पुष्टि नहीं की जा सकती।
धान खरीद के इस सीजन में सरकार के सामने एक ओर खरीद और उठान की रफ्तार बनाए रखने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर किसानों का भरोसा कायम रखना भी जरूरी है। राइस मिलों के धर्मकांटों पर तौल की अनुमति से प्रक्रिया कितनी तेज होती है और किसान संगठनों की आपत्तियों पर क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आगे महत्वपूर्ण रहेगा।











