हरियाणा में PGT भर्ती और प्रमोशन के लिए HTET/STET अनिवार्य, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने याचिकाएं खारिज कीं

हरियाणा में PGT भर्ती और प्रमोशन के लिए HTET या STET पास करना अनिवार्य रहेगा। पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने नियम को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कीं।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य में पीजीटी शिक्षकों की नियुक्ति और पदोन्नति के लिए एचटेट या एसटेट अनिवार्य रखने के नियम को बरकरार रखा है। अदालत ने इसे चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दीं।

चंडीगढ़: हरियाणा में पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT) बनने और टीजीटी से पीजीटी पद पर प्रमोशन पाने के लिए हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा (HTET) या स्कूल शिक्षक पात्रता परीक्षा (STET) पास करना जरूरी रहेगा। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इस अनिवार्यता को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत के अनुसार, राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए न्यूनतम मानकों से अतिरिक्त योग्यता निर्धारित कर सकती है।

19 अक्टूबर 2026: PGT भर्ती और प्रमोशन में पात्रता परीक्षा जरूरी

हरियाणा में स्नातकोत्तर शिक्षक यानी पीजीटी के पद पर नियुक्ति और पदोन्नति के लिए एचटेट या एसटेट उत्तीर्ण करने की शर्त लागू रहेगी। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इस नियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार शिक्षकों की गुणवत्ता और शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यताओं से आगे की शर्तें भी तय कर सकती है।

जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस मिंदरजीत यादव की खंडपीठ ने माना कि पीजीटी पद के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य करना मनमाना या कानून के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं है। हरियाणा राज्य शिक्षा विद्यालय संवर्ग (ग्रुप-बी) सेवा नियम, 2012 के तहत पीजीटी नियुक्ति के लिए यह योग्यता निर्धारित की गई है।

याचिकाकर्ताओं ने NCTE के नियमों का दिया था हवाला

याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की 12 नवंबर 2014 की अधिसूचना में कक्षा 11वीं और 12वीं के शिक्षकों के लिए एचटेट या एसटेट पास करना अनिवार्य नहीं बताया गया है। उनका कहना था कि राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त पात्रता निर्धारित करना केंद्रीय नियमों के विपरीत है।

हालांकि, हाई कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि पीजीटी शिक्षक केवल 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को ही नहीं पढ़ाते, बल्कि कुछ परिस्थितियों में सातवीं और आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को भी पढ़ाने की जिम्मेदारी निभाते हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत कक्षा एक से आठवीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा जरूरी है।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें संबंधित कक्षाओं में अध्यापन के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य योग्यता माना गया था। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने पीजीटी शिक्षकों के लिए एचटेट या एसटेट की शर्त को अनुचित नहीं माना।

सीधी भर्ती और प्रमोशन, दोनों पर लागू रहेगा नियम

हरियाणा के 2012 के सेवा नियमों के मुताबिक, पीजीटी के कुल पदों में से 67 प्रतिशत पद सीधी भर्ती के माध्यम से और 33 प्रतिशत पद पदोन्नति के जरिए भरे जाते हैं। प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक यानी टीजीटी से पीजीटी पद पर प्रमोशन पाने के लिए भी एचटेट या एसटेट पास करना जरूरी है।

अदालत ने इस व्यवस्था के संदर्भ में कहा कि सीधी भर्ती और पदोन्नति के लिए पात्रता की शर्तों में असमानता होने से दोनों श्रेणियों के अभ्यर्थियों के बीच अंतर पैदा हो सकता है। इसलिए पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को केवल इस आधार पर अवैध नहीं कहा जा सकता कि एनसीटीई ने न्यूनतम योग्यताएं निर्धारित की हैं।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद हरियाणा में पीजीटी भर्ती और पदोन्नति के लिए पात्रता परीक्षा की शर्त बरकरार रहेगी। उम्मीदवारों को भर्ती या प्रमोशन की प्रक्रिया में शामिल होने से पहले संबंधित सेवा नियमों और आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार अपनी योग्यता सुनिश्चित करनी होगी।

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