हरियाणा में फरवरी 2025 में अधिसूचित जिला अभियोजन व्यवस्था डेढ़ साल से अधिक समय बाद भी पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है। उप निदेशकों और जिला अटार्नी की शक्तियों, जिम्मेदारियों तथा रिपोर्टिंग प्रक्रिया को लेकर असमंजस बना हुआ है।
चंडीगढ़: हरियाणा में जिला स्तर पर अभियोजन कार्य को व्यवस्थित करने के लिए अधिसूचित नई व्यवस्था अब भी पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर पाई है। फरवरी 2025 में जारी अधिसूचना के बावजूद उप निदेशकों और जिला अटार्नी के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा नहीं हो सका है। अभियोजन निदेशालय से पत्राचार और रिपोर्ट मांगने की प्रक्रिया में पुरानी व्यवस्था जारी रहने से अधिकारियों की भूमिका और अधिकारों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हरियाणा में नई अभियोजन व्यवस्था लागू करने में देरी
हरियाणा सरकार की ओर से फरवरी 2025 में जिला अभियोजन व्यवस्था में बदलाव को लेकर अधिसूचना जारी की गई थी। इसका उद्देश्य जिला स्तर पर अभियोजन कार्य के प्रबंधन और निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाना था। हालांकि, डेढ़ साल से अधिक समय बीतने के बाद भी नई व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है। उप निदेशकों की भूमिका, शक्तियों और रिपोर्टिंग संबंधी जिम्मेदारियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
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नई व्यवस्था के तहत जिला अटार्नी कैडर से पदोन्नत उप निदेशकों को जिला स्तर पर अभियोजन कार्य के प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई है। इसके बावजूद अभियोजन निदेशालय की ओर से आधिकारिक पत्राचार अब भी जिला अटार्नी के नाम भेजा जा रहा है। कुछ मामलों में जिला स्तर की रिपोर्ट और सूचनाएं भी संबंधित उप निदेशकों के बजाय सीधे जिला अटार्नी से मांगी जा रही हैं।
इससे प्रशासनिक स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि नई व्यवस्था के तहत निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन किस सीमा तक हो रहा है। अधिकारियों के बीच अधिकारों का स्पष्ट निर्धारण नहीं होने से कामकाज और जवाबदेही की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है।
BNSS के तहत जिला अभियोजन निदेशालय का प्रावधान
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 20 में राज्य स्तर पर अभियोजन निदेशालय और प्रत्येक जिले में जिला अभियोजन निदेशालय स्थापित करने का प्रावधान है। यह व्यवस्था पहले लागू दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 25A से अलग है, जिसमें जिला अभियोजन निदेशालय की ऐसी व्यवस्था नहीं थी।
नए कानूनी ढांचे के तहत अभियोजन अधिकारियों की जिम्मेदारियां अपराध की गंभीरता और संभावित सजा के आधार पर निर्धारित की गई हैं। अभियोजन निदेशक उन मामलों की निगरानी करते हैं, जिनमें 10 वर्ष या उससे अधिक की कैद, आजीवन कारावास या मृत्युदंड का प्रावधान है।
उप निदेशक सात वर्ष या उससे अधिक, लेकिन 10 वर्ष से कम की सजा वाले मामलों की निगरानी करते हैं। वहीं, सहायक निदेशक सात वर्ष से कम सजा वाले अपराधों से संबंधित मामलों को देखते हैं। इस तरह नई व्यवस्था में अलग-अलग स्तर पर अधिकारियों की भूमिका निर्धारित की गई है।
नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन पर भी उठे सवाल
नए आपराधिक कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अभियोजन व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। मामलों की निगरानी, अभियोजन की गुणवत्ता और संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय से न्यायिक प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। ऐसे में जिला स्तर पर जिम्मेदारियों की अस्पष्टता व्यवस्था के प्रभावी संचालन को लेकर चिंता बढ़ाती है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर 2025 को नए आपराधिक कानूनों से संबंधित प्रदर्शनी के उद्घाटन के लिए कुरुक्षेत्र पहुंचे थे। इससे पहले मई 2025 में दिल्ली में हुई समीक्षा बैठक के दौरान अभियोजन निदेशालय में नियुक्तियां जल्द करने पर जोर दिया गया था। इसके बाद व्यवस्था को लागू करने की दिशा में कदम उठाए गए थे।
इसके बावजूद हरियाणा में उप निदेशकों और जिला अटार्नी के बीच अधिकारों तथा रिपोर्टिंग प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता की जरूरत बनी हुई है। नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासनिक निर्देशों, पत्राचार और जवाबदेही के नियमों में एकरूपता जरूरी होगी। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिला अभियोजन व्यवस्था में जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण नहीं हो पाना इसके पूर्ण क्रियान्वयन में प्रमुख बाधा बना हुआ है।








