शीतल देवी ने वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी की, पैरा एशियन गेम्स में 704 अंक के साथ रचा इतिहास

पैरा एशियन गेम्स में भारत की तीरंदाज शीतल देवी ने महिला कंपाउंड स्पर्धा में 704 अंक हासिल कर वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी की। भारत ने टीम पहला स्थान हासिल किया।

भारत की पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने नागोया में पैरा एशियन गेम्स के महिला कंपाउंड क्वालिफिकेशन में 704 अंक हासिल कर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की। पायल के साथ उनके शानदार प्रदर्शन से भारतीय महिला टीम शीर्ष पर रही और सेमीफाइनल में पहुंची।

स्पोर्ट्स न्यूज़: भारत की पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी प्रतिभा और असाधारण सटीकता का शानदार प्रदर्शन किया है। नागोया में आयोजित हो रहे पैरा एशियन गेम्स में 19 वर्षीय भारतीय खिलाड़ी ने महिला कंपाउंड तीरंदाजी क्वालिफिकेशन में 704 अंक हासिल कर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। शीतल ने इस प्रदर्शन के साथ न केवल अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा, बल्कि भारतीय महिला कंपाउंड टीम को भी क्वालिफिकेशन में शीर्ष स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

शीतल देवी का यह प्रदर्शन इसलिए भी खास है, क्योंकि वह बिना हाथों के तीरंदाजी करती हैं। उन्होंने अपने पैरों और शरीर के संतुलन का इस्तेमाल करते हुए जिस सटीकता के साथ निशाने लगाए, उसने उनकी मेहनत, तकनीकी दक्षता और मानसिक मजबूती को एक बार फिर दुनिया के सामने रखा। पेरिस पैरालिंपिक में कांस्य पदक जीत चुकीं शीतल अब पैरा एशियन गेम्स में भी भारत की पदक उम्मीदों को मजबूती दे रही हैं।

704 अंक हासिल कर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी

महिला कंपाउंड क्वालिफिकेशन में शीतल देवी ने कुल 720 में से 704 अंक हासिल किए। इस स्कोर के साथ उन्होंने तुर्की की ओज्नुर गिर्डी के नाम दर्ज विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की। प्रतियोगिता में शीतल की निरंतरता और निशाने पर नियंत्रण उनके प्रदर्शन की सबसे बड़ी विशेषता रहे।

क्वालिफिकेशन राउंड में खिलाड़ियों को कुल 72 तीर चलाने होते हैं। शीतल ने इनमें से 57 बार 10 अंक हासिल किए। इससे भी प्रभावशाली बात यह रही कि उनके 32 तीर लक्ष्य के सबसे भीतरी हिस्से में लगे, जिसे तीरंदाजी में एक्स (X) स्कोर कहा जाता है। यह निशाने की सटीकता का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।

शीतल के प्रदर्शन ने दिखाया कि उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा में तकनीक, एकाग्रता और नियमित अभ्यास किस तरह निर्णायक भूमिका निभाते हैं। उनके लिए यह उपलब्धि केवल अंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पैरा खेलों की बढ़ती क्षमता को भी दर्शाती है।

एशियन रिकॉर्ड में छह अंकों का सुधार

शीतल देवी ने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करने के साथ एशियन रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। महिला कंपाउंड क्वालिफिकेशन में इससे पहले एशियाई रिकॉर्ड 698 अंकों का था। शीतल ने 704 अंक हासिल करके इस आंकड़े को छह अंकों से पीछे छोड़ दिया।

उन्होंने 2023 में हांगझोउ में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में बनाए गए अपने पिछले प्रदर्शन को भी बेहतर किया। उस प्रतियोगिता में शीतल ने 680 अंक हासिल किए थे। इस बार उनका स्कोर 24 अंक अधिक रहा, जो उनके खेल में हुए सुधार और लगातार प्रगति को दर्शाता है।

किसी खिलाड़ी के लिए इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने पिछले प्रदर्शन को बेहतर करना आसान नहीं होता। इसके लिए शारीरिक तैयारी के साथ मानसिक अनुशासन, दबाव में सही निर्णय लेने की क्षमता और तकनीक पर भरोसा जरूरी होता है। शीतल ने इन सभी पहलुओं में अपनी मजबूती दिखाई है।

पेरिस पैरालिंपिक के बाद फिर बढ़ीं भारत की उम्मीदें

शीतल देवी पहले ही पेरिस पैरालिंपिक में कांस्य पदक जीतकर अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनकी उपलब्धियां भारतीय पैरा खेलों के लिए प्रेरणा का स्रोत रही हैं। अब पैरा एशियन गेम्स में विश्व रिकॉर्ड की बराबरी ने उनके प्रदर्शन को एक नई ऊंचाई दी है।

शीतल की सफलता यह भी बताती है कि दिव्यांग खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक खेल सुविधाएं और प्रतियोगिताओं में पर्याप्त अवसर मिलें, तो वे विश्व स्तर पर शानदार परिणाम हासिल कर सकते हैं। उनकी यात्रा उन खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणादायक है, जो चुनौतियों के बावजूद खेल को अपना करियर बनाना चाहते हैं।

शीतल देवी ने वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी की, पैरा एशियन गेम्स में 704 अंक के साथ रचा इतिहास

हालांकि, क्वालिफिकेशन में शानदार प्रदर्शन के बाद अब उनकी नजरें अगले मुकाबलों और पदक पर होंगी। क्वालिफिकेशन स्कोर खिलाड़ियों की वरीयता तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि अंतिम पदक के लिए नॉकआउट मुकाबलों में भी इसी स्तर का प्रदर्शन बनाए रखना जरूरी होता है।

पायल ने भी किया शानदार प्रदर्शन

भारतीय टीम की सफलता में पायल का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा। एशियन गेम्स में पदार्पण कर रहीं पायल ने महिला कंपाउंड क्वालिफिकेशन में 675 अंक हासिल किए और पांचवां स्थान प्राप्त किया। उनके प्रदर्शन ने भारतीय टीम की कुल स्कोरिंग को मजबूत बनाया।

ओडिशा की रहने वाली पायल चारों अंगों से दिव्यांग हैं। उन्होंने अप्रैल में बैंकॉक में आयोजित वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में स्वर्ण पदक जीतकर सुर्खियां बटोरी थीं। उस प्रतियोगिता में उन्होंने शीतल देवी को हराकर पहला स्थान हासिल किया था। यह मुकाबला दोनों खिलाड़ियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का प्रमाण था।

अब पैरा एशियन गेम्स में दोनों भारतीय खिलाड़ियों ने एक साथ प्रभावशाली प्रदर्शन करके देश की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। व्यक्तिगत मुकाबलों में दोनों की चुनौती अलग होगी, लेकिन टीम स्पर्धा में उनका संयुक्त स्कोर भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ है।

भारतीय महिला टीम क्वालिफिकेशन में पहले स्थान पर

शीतल देवी के 704 और पायल के 675 अंकों को मिलाकर भारत ने महिला कंपाउंड टीम क्वालिफिकेशन में कुल 1,379 अंक हासिल किए। इस स्कोर के साथ भारतीय टीम ने पहला स्थान प्राप्त किया। चीन 1,338 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा।

भारत और चीन के बीच 41 अंकों का अंतर भारतीय खिलाड़ियों के मजबूत प्रदर्शन को दर्शाता है। क्वालिफिकेशन में शीर्ष स्थान हासिल करने से भारतीय टीम को सीधे सेमीफाइनल में जगह मिली। इससे टीम को अगले चरण में मुकाबले की तैयारी करने और अपनी रणनीति पर काम करने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा।

आगे भारत का सामना थाईलैंड और कजाकिस्तान के बीच होने वाले क्वार्टर फाइनल मुकाबले के विजेता से होगा। थाईलैंड को पांचवीं और कजाकिस्तान को चौथी वरीयता प्राप्त है। इस मुकाबले के बाद भारतीय टीम के सामने फाइनल की ओर बढ़ने की चुनौती होगी।

व्यक्तिगत और टीम स्पर्धाओं में पदक की उम्मीद

शीतल देवी और पायल का प्रदर्शन भारतीय तीरंदाजी दल के लिए सकारात्मक संकेत है। एक ओर शीतल ने रिकॉर्ड की बराबरी कर अपनी व्यक्तिगत क्षमता का परिचय दिया, वहीं पायल ने भी मजबूत स्कोर के साथ टीम को शीर्ष स्थान तक पहुंचाने में योगदान दिया।

अब भारतीय प्रशंसकों की नजरें आगामी नॉकआउट मुकाबलों पर रहेंगी। क्वालिफिकेशन में शीर्ष पर रहना निश्चित रूप से टीम का आत्मविश्वास बढ़ाएगा, लेकिन पदक जीतने के लिए खिलाड़ियों को अगले दौर में भी सटीक निशाने लगाने होंगे।

शीतल देवी की उपलब्धि खेल जगत को यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, निरंतर अभ्यास और सही मार्गदर्शन के जरिए बड़ी चुनौतियों को अवसर में बदला जा सकता है। पैरा एशियन गेम्स में उनका रिकॉर्ड-स्तरीय प्रदर्शन भारतीय खेलों के लिए गर्व का क्षण है। अब पूरा ध्यान इस बात पर होगा कि शीतल और पायल अपनी शानदार लय को बरकरार रखते हुए भारत के लिए पदक जीतने में कितना सफल होती हैं।

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