HDFC Bank CEO: शशिधर जगदीशन के बाद चार बड़े नाम चर्चा में, जानिए किस बैंकर के पास कितना अनुभव

HDFC Bank के नए CEO की रेस में कैजाद भरूचा, डीके खारा, अमिताभ चौधरी और वी. श्रीनिवास रंगन जैसे नाम चर्चा में हैं। जानें किसके पास कितना अनुभव है।

देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक ने नए सीईओ की तलाश तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा सीईओ शशिधर जगदीशन के कार्यकाल विस्तार की दौड़ से बाहर होने के बाद बैंक अब नए नेतृत्व की तलाश में जुट गया है।

बिजनेस न्यूज़: देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक HDFC Bank में अगले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। मौजूदा CEO शशिधर जगदीशन के कार्यकाल विस्तार की दौड़ से बाहर होने के बाद बैंक को अब नेतृत्व के लिए नए चेहरे की तलाश है। सूत्रों के मुताबिक, बैंक नए CEO की खोज के लिए इसी सप्ताह एक एग्जीक्यूटिव सर्च फर्म की नियुक्ति कर सकता है।

HDFC Bank का अगला CEO कौन होगा, यह फैसला भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। करीब 115 अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण वाला यह बैंक भारत के सबसे मूल्यवान बैंकों में शामिल है। जून 2026 के अंत तक देश की कुल बैंक जमा में HDFC Bank की हिस्सेदारी करीब 12% बताई गई है।

ऐसे में नए CEO के सामने केवल बैंक के मौजूदा कारोबार को आगे बढ़ाने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि डिजिटल बैंकिंग, तकनीकी बदलाव, जोखिम प्रबंधन, कॉरपोरेट गवर्नेंस और प्रतिस्पर्धी निजी बैंकिंग बाजार में विकास की रफ्तार बनाए रखना भी अहम होगा।

Kaizad Bharucha: अंदरूनी उम्मीदवारों में मजबूत नाम

CEO पद की संभावित दौड़ में HDFC Bank के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। 61 वर्षीय भरूचा लंबे समय से बैंक से जुड़े हुए हैं और उन्हें बैंक के संचालन तथा अलग-अलग कारोबारों की गहरी समझ है। करीब तीन दशक के बैंकिंग अनुभव के साथ भरूचा फिलहाल रिटेल और होलसेल बैंकिंग कारोबार की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 

वर्ष 2014 से वह बैंक के पूर्णकालिक निदेशक के रूप में भी काम कर रहे हैं। अगर बैंक किसी अंदरूनी उम्मीदवार को शीर्ष पद सौंपता है, तो भरूचा अनुभव और संस्थागत समझ के लिहाज से मजबूत विकल्प साबित हो सकते हैं।

Dinesh Khara: बाहरी उम्मीदवार के तौर पर बड़ा नाम

बाहरी दावेदारों में दिनेश खारा का नाम सबसे चर्चित उम्मीदवारों में शामिल है। खारा भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं और उन्हें भारत के सबसे बड़े बैंकिंग संस्थानों में से एक के संचालन का लंबा अनुभव है। करीब चार दशक के बैंकिंग करियर में उन्होंने विशाल बैलेंस शीट, कॉरपोरेट बैंकिंग और जटिल वित्तीय संचालन को करीब से संभाला है। उनके अनुभव को देखते हुए HDFC Bank के CEO पद के लिए उनका नाम बैंकिंग क्षेत्र में विशेष महत्व रखता है।

HDFC Bank CEO: शशिधर जगदीशन के बाद चार बड़े नाम चर्चा में, जानिए किस बैंकर के पास कितना अनुभव

V. Srinivasa Rangan: बैंक के अंदर का अनुभवी चेहरा

HDFC Bank के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर वी. श्रीनिवास रंगन भी संभावित उम्मीदवारों की सूची में हैं। 66 वर्षीय रंगन बैंक के कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील विभागों की जिम्मेदारी संभालते हैं। उनके पोर्टफोलियो में मानव संसाधन, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग, कानूनी मामले, सूचना सुरक्षा, एथिक्स, फ्रॉड और विजिलेंस जैसे क्षेत्र शामिल हैं। बैंक के विभिन्न प्रशासनिक और जोखिम प्रबंधन पहलुओं में उनका अनुभव CEO पद के लिए उपयोगी माना जा सकता है।

Amitabh Chaudhry: Axis Bank से संभावित दावेदारी

Axis Bank के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर अमिताभ चौधरी का नाम भी संभावित बाहरी उम्मीदवारों में सामने आया है। उन्होंने जनवरी 2019 में Axis Bank की कमान संभाली थी। उनके नेतृत्व में बैंक ने कारोबार विस्तार के साथ कई बड़े रणनीतिक कदम उठाए। इनमें Citibank के भारत में कंज्यूमर बिजनेस का अधिग्रहण भी प्रमुख रहा। इस अनुभव के कारण बड़े पैमाने पर बैंकिंग कारोबार और एकीकरण की चुनौतियों से निपटने की उनकी क्षमता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

HDFC Bank में नेतृत्व बदलाव की पृष्ठभूमि

HDFC Bank में CEO चयन ऐसे समय हो रहा है जब बैंक हाल के महीनों में नेतृत्व स्तर पर बदलाव देख चुका है। इसी वर्ष मार्च में पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े घटनाक्रमों के बीच पद छोड़ दिया था। इसके बाद जून में बैंक के बोर्ड ने पूर्व आईएएस अधिकारी और भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को पार्ट-टाइम नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला किया। 

उनकी स्वतंत्र निदेशक के तौर पर नियुक्ति 30 जून से प्रभावी होने की बात कही गई थी और यह शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन थी। उनका तीन साल का चेयरमैन कार्यकाल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मंजूरी मिलने की तारीख से शुरू होने का प्रावधान रखा गया।

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