रांची की ईडी विशेष अदालत ने बड़गाई जमीन घोटाला मामले में हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है, जो 8 जून को सुनाया जाएगा।
Ranchi: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर चल रहे चर्चित बड़गाई जमीन घोटाला मामले में महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ आ गया है। ईडी की विशेष अदालत में उनकी डिस्चार्ज याचिका पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। अब अदालत 8 जून को यह तय करेगी कि उन्हें मामले से राहत मिलेगी या मुकदमे की आगे की कार्रवाई जारी रहेगी।
डिस्चार्ज याचिका पर बहस पूरी, फैसला सुरक्षित
रांची स्थित ईडी की विशेष अदालत में बड़गाई अंचल की 8.46 एकड़ जमीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बुधवार को अहम सुनवाई हुई। विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में हेमंत सोरेन की ओर से दायर डिस्चार्ज याचिका पर दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं।
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सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। अब इस मामले में 8 जून को फैसला सुनाया जाएगा। अदालत का यह निर्णय आगे की न्यायिक प्रक्रिया की दिशा तय करेगा।
खुद को निर्दोष बता चुके हैं हेमंत सोरेन
हेमंत सोरेन ने अपनी याचिका में दावा किया है कि उनका इस कथित जमीन घोटाले से कोई संबंध नहीं है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं। उन्होंने अदालत से मामले से बरी किए जाने की मांग की है।
उनकी ओर से दलील दी गई कि जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत आरोपों में ऐसा कोई पर्याप्त आधार नहीं है, जिससे उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सके। वहीं ईडी ने अदालत के समक्ष अपने आरोपों और जांच से जुड़े तथ्यों को रखा।
18 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हो चुकी है चार्जशीट
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय पहले ही हेमंत सोरेन समेत 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुका है। अदालत चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों को पुलिस पेपर उपलब्ध करा चुकी है।
मामले की अगली प्रक्रिया के तहत आरोप तय किए जाने हैं। हालांकि इससे पहले अदालत को हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका पर फैसला देना है। यही कारण है कि 8 जून का निर्णय इस केस में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फैसले के बाद क्या होगा आगे?
यदि अदालत हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका स्वीकार कर लेती है, तो उन्हें इस मामले में ट्रायल का सामना नहीं करना पड़ेगा और उन्हें राहत मिल सकती है। दूसरी ओर यदि याचिका खारिज होती है, तो अदालत सभी आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।
इसके बाद नियमित सुनवाई और ट्रायल शुरू होगा, जिसमें अभियोजन और बचाव पक्ष अपने-अपने साक्ष्य और तर्क अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
क्या है बड़गाई जमीन घोटाला मामला?
यह मामला रांची के बड़गाई अंचल में स्थित 8.46 एकड़ जमीन से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार इस जमीन के स्वामित्व और दस्तावेजों में कथित अनियमितताओं तथा अवैध कब्जे से जुड़े आरोप सामने आए थे। ईडी ने इसे मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला मानते हुए जांच शुरू की थी।
इस हाई-प्रोफाइल मामले ने झारखंड की राजनीति में भी व्यापक चर्चा पैदा की है। अब सभी की निगाहें 8 जून पर टिकी हैं, जब अदालत यह स्पष्ट करेगी कि हेमंत सोरेन को इस मामले में राहत मिलेगी या उन्हें मुकदमे की अगली कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा।










