मेघालय-असम सीमा विवाद पर बातचीत असम कैबिनेट विस्तार के बाद फिर शुरू होगी। डिप्टी सीएम प्रेस्टोन टायनसॉन्ग ने कहा कि ILP और खासी भाषा को लेकर मांगें केंद्र के सामने उठाई जाएंगी और समाधान के प्रयास जारी रहेंगे।
शिलांग/गुवाहाटी: मेघालय और असम के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर बातचीत शुरू होने की संभावना बन गई है। मेघालय के उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन टिनसोंग ने घोषणा की है कि दोनों राज्यों के बीच रुके हुए सीमा विवादों पर वार्ता असम कैबिनेट के विस्तार के बाद फिर से शुरू की जाएगी।
इस घोषणा के बाद सीमा क्षेत्रों में स्थायी समाधान की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं, जहां वर्षों से कई क्षेत्रों को लेकर दोनों राज्यों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
असम की सहमति, नए मंत्रियों की भागीदारी पर जोर
उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन टिनसोंग ने जानकारी दी कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने संयुक्त निरीक्षण और बातचीत को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई है।
हालांकि, उन्होंने सुझाव दिया है कि यह वार्ता असम कैबिनेट के पुनर्गठन के बाद शुरू की जाए, ताकि नई मंत्रिपरिषद के सदस्य भी इस प्रक्रिया में शामिल हो सकें।
इस कदम को दोनों राज्यों के बीच बातचीत को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
लंबे समय से लंबित सीमा विवाद का इतिहास
मेघालय और असम के बीच सीमा विवाद कई दशकों पुराना है। दोनों राज्यों के बीच कुछ क्षेत्रों को लेकर मतभेद अब तक पूरी तरह सुलझ नहीं पाए हैं।
समय-समय पर हिंसक घटनाएं और स्थानीय तनाव की खबरें सामने आती रही हैं, जिसके कारण यह मुद्दा पूर्वोत्तर भारत की सबसे संवेदनशील अंतर-राज्यीय समस्याओं में से एक बना हुआ है।
हाल के वर्षों में दोनों राज्य सरकारों ने बातचीत और संयुक्त समितियों के माध्यम से समाधान की कोशिशें तेज की हैं।
शांतिपूर्ण समाधान पर दोनों राज्यों का जोर
मेघालय सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह बातचीत के माध्यम से समाधान के पक्ष में है। उपमुख्यमंत्री टिनसोंग ने कहा कि राज्य सरकार सीमा विवाद को शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त सर्वेक्षण और क्षेत्रीय निरीक्षण के माध्यम से वास्तविक स्थिति को समझकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।
ILP और Khasi भाषा को लेकर मेघालय की मांग
इस बातचीत के बीच मेघालय सरकार ने अपने दो प्रमुख संवैधानिक और सांस्कृतिक मुद्दों को भी फिर से उठाया है।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की ओर से इनर लाइन परमिट (ILP) प्रणाली लागू करने और खासी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग लंबे समय से की जा रही है।
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उन्होंने कहा कि ये दोनों प्रस्ताव पहले ही मेघालय विधानसभा द्वारा पारित किए जा चुके हैं और अब इन्हें केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया जाएगा।
केंद्र सरकार से बातचीत की तैयारी
मेघालय सरकार ने संकेत दिया है कि यदि अवसर मिला तो इन मुद्दों को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने भी रखा जाएगा।
राज्य सरकार का मानना है कि ILP लागू होने से बाहरी लोगों के प्रवेश पर बेहतर नियंत्रण संभव होगा, जिससे स्थानीय जनसंख्या की सांस्कृतिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
वहीं, खासी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने से इसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलेगी और भाषा संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
क्षेत्रीय विकास और स्थिरता पर फोकस
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीमा विवाद समाधान केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय विकास और शांति से सीधे जुड़ा हुआ है।
स्थायी समाधान से न केवल दोनों राज्यों के बीच संबंध मजबूत होंगे, बल्कि सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे।
पूर्वोत्तर भारत में सहयोग की नई दिशा
पूर्वोत्तर भारत में अंतर-राज्यीय सहयोग को मजबूत करने के लिए हाल के वर्षों में कई पहल की गई हैं। मेघालय और असम के बीच बातचीत भी इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों राज्य मिलकर बातचीत के माध्यम से समाधान निकालते हैं, तो यह पूरे क्षेत्र में शांति और सहयोग का एक सकारात्मक मॉडल बन सकता है।







