पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय नौसेना की समकक्ष स्नातक योग्यता किसी भी सरकारी भर्ती में स्वतः पात्रता नहीं देती। अभ्यर्थियों को संबंधित भर्ती विज्ञापन की सभी शर्तें पूरी करनी होंगी।
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने Navy Graduation Certificate से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि भारतीय नौसेना द्वारा स्नातक के समकक्ष मानी गई योग्यता किसी अन्य सरकारी विभाग की भर्ती में स्वतः मान्य नहीं होगी। संबंधित भर्ती के लिए विज्ञापन में निर्धारित सभी पात्रता शर्तों का पालन अनिवार्य रहेगा।
हाई कोर्ट ने भर्ती नियमों को बताया सर्वोपरि
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में शैक्षणिक योग्यता को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी अभ्यर्थी की योग्यता को भारतीय नौसेना ने स्नातक के समकक्ष माना है, तब भी वह स्वतः सभी सरकारी भर्तियों के लिए पात्र नहीं माना जा सकता। जिस विभाग में भर्ती हो रही है, वहां जारी विज्ञापन में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अन्य अनिवार्य शर्तों को पूरा करना आवश्यक होगा।
यह फैसला उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) में अपर डिवीजन क्लर्क (UDC) पद से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। अदालत ने पूर्व नौसेना कर्मी जय करण की याचिका खारिज कर दी।
पूर्व नौसेना कर्मी ने नियुक्ति का किया था दावा
याचिकाकर्ता का कहना था कि भारतीय नौसेना ने वर्ष 2008 में जारी एक पत्र के माध्यम से उनकी योग्यता को स्नातक के समकक्ष मान्यता दी थी। इसके अलावा वर्ष 2015 में जारी नौसेना के एक विज्ञापन के आधार पर उन्होंने दावा किया कि वह विभिन्न सरकारी पदों के लिए पात्र हैं। इसी आधार पर उन्होंने यूएचबीवीएन में यूडीसी पद पर नियुक्ति की मांग की थी।
हालांकि बिजली निगम की ओर से अदालत को बताया गया कि भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट रूप से कॉमर्स विषय में स्नातक डिग्री, सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक, मैट्रिक स्तर तक हिंदी या संस्कृत का ज्ञान तथा एनआईईएलआईटी (DOEACC) या हारट्रान से ओ-लेवल अथवा उससे उच्च कंप्यूटर कोर्स अनिवार्य किया गया था।
विज्ञापन की शर्तें पूरी न होने पर राहत से इनकार
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने भर्ती नियमों और रिकॉर्ड का विस्तृत परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता विज्ञापन में निर्धारित अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करते थे। उनके पास न तो कॉमर्स विषय में आवश्यक स्नातक डिग्री थी और न ही निर्धारित न्यूनतम अंक उपलब्ध थे। इसके अलावा कंप्यूटर योग्यता और अन्य आवश्यक शर्तें भी पूरी नहीं थीं।
हाई कोर्ट ने कहा कि केवल स्नातक के समकक्ष प्रमाणपत्र होने से किसी अभ्यर्थी को भर्ती प्रक्रिया में स्वतः पात्र नहीं माना जा सकता। यदि भर्ती विज्ञापन में विशेष विषय, न्यूनतम अंक या अन्य योग्यताओं का उल्लेख किया गया है, तो उनका पालन करना अनिवार्य होगा।
भर्ती प्रक्रिया में नियमों से समझौता नहीं
अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह विज्ञापन में निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होती है। किसी भी उम्मीदवार को निर्धारित पात्रता से बाहर जाकर राहत नहीं दी जा सकती। यदि कोई अभ्यर्थी सभी अनिवार्य शर्तें पूरी नहीं करता है, तो विभाग द्वारा उसका चयन रद्द करना या नियुक्ति प्रस्ताव वापस लेना कानूनी रूप से उचित माना जाएगा।
इस फैसले के साथ हाई कोर्ट ने पूर्व नौसेना कर्मी की याचिका खारिज कर दी। अदालत का यह निर्णय भविष्य की सरकारी भर्तियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे स्पष्ट संदेश गया है कि समकक्ष डिग्री या प्रमाणपत्र होने के बावजूद उम्मीदवारों को संबंधित भर्ती विज्ञापन में निर्धारित प्रत्येक पात्रता शर्त का पालन करना होगा।











