हिमाचल में बारिश और भूस्खलन का कहर जारी, 136 सड़कें बंद; 1,000 करोड़ रुपये का हुआ नुकसान

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और भूस्खलन का कहर जारी है। राज्य में 136 सड़कें बंद हैं, जबकि बारिश से अब तक करीब 1,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।

हिमाचल प्रदेश में बारिश के बाद भूस्खलन जैसी घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। गुरुवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में रुक-रुककर बारिश होती रही। वहीं, ऊंचाई वाले इलाकों बारालाचा, कुंजुम और रोहतांग में हल्की बर्फबारी भी देखने को मिली।

Himachal Pradesh Rain: हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान भारी बारिश और भूस्खलन का सिलसिला लगातार जारी है। राज्य के कई हिस्सों में खराब मौसम के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। लगातार बारिश के चलते पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं, जबकि कई संपर्क मार्गों पर यातायात बाधित है। राज्य में अब तक मानसून से जुड़ी घटनाओं के कारण करीब 1,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।

राज्य में गुरुवार को भी कई इलाकों में रुक-रुककर बारिश होती रही। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश के साथ हल्की बर्फबारी भी दर्ज की गई। बारालाचा, कुंजुम और रोहतांग जैसे ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फ गिरने की सूचना मिली। खराब मौसम के बीच प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

शिमला समेत कई इलाकों में भूस्खलन

राजधानी शिमला में भी बारिश के कारण भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। भट्ठाकुफर स्थित फल मंडी के ऊपर शिव मंदिर के पास पहाड़ी से मलबा और पत्थर नीचे आ गिरे। इस क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही और स्थानीय गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ा। शिमला के टुटू इलाके में भी पहाड़ी से पत्थर गिरने की घटना सामने आई, जिसमें एक कार के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी है। इन घटनाओं ने पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

वहीं, लाहुल-स्पीति जिले में जाहलमा नाला मार्ग को छोटे और बड़े वाहनों के लिए फिर से बहाल कर दिया गया है। प्रशासन की ओर से बाधित सड़कों को जल्द से जल्द खोलने और आवश्यक सेवाओं को सामान्य बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

136 संपर्क सड़कें बंद

राज्य में बारिश और भूस्खलन का सबसे ज्यादा असर सड़क संपर्क पर पड़ा है। उपलब्ध प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में करीब 136 संपर्क सड़कें अभी भी बंद हैं। इसके अलावा बारिश से बिजली और पेयजल आपूर्ति से जुड़ा बुनियादी ढांचा भी प्रभावित हुआ है। करीब 64 ट्रांसफार्मर और 375 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। 

सड़कें बंद होने के कारण कई ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क बहाल करना और बिजली तथा पेयजल जैसी आवश्यक सेवाओं को जल्द से जल्द सामान्य करना है।

हिमाचल में बारिश और भूस्खलन का कहर जारी, 136 सड़कें बंद; 1,000 करोड़ रुपये का हुआ नुकसान

मानसून में अब तक 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान

हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान बारिश और भूस्खलन से करीब 1,000 करोड़ रुपये के आर्थिक नुकसान का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा बारिश से जुड़ी विभिन्न घटनाओं में अब तक 66 लोगों की मौत होने की जानकारी दी गई है। राज्य में जुलाई के दौरान अब तक करीब 191 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य औसत से लगभग 4 प्रतिशत अधिक है। सिरमौर जिले में सबसे अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। यहां जुलाई में करीब 413 मिलीमीटर वर्षा हुई, जो सामान्य से लगभग 26 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है।

बारिश के कारण कई क्षेत्रों में अचानक बाढ़, भूस्खलन और सड़क अवरोध का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने लोगों से मौसम की स्थिति को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय अधिकारियों की सलाह का पालन करने की अपील की है।

मानसून से पहले शुरू कर दी गई थी तैयारी

हिमाचल प्रदेश स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (HPSDMA) के विशेष सचिव पुष्पिंदर राणा ने बताया कि राज्य सरकार ने मानसून शुरू होने से पहले ही आपदा प्रबंधन को लेकर उच्चस्तरीय तैयारियां शुरू कर दी थीं। उन्होंने बताया कि मानसून की संभावित चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए राज्य स्तर पर बैठकें आयोजित की गई थीं। इस दौरान सभी जिलों के उपायुक्तों यानी डिप्टी कमिश्नरों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए और संभावित आपदा की स्थिति से निपटने के लिए जरूरी सहयोग उपलब्ध कराया गया।

प्रशासन का कहना है कि प्रभावित जिलों में स्थिति की निगरानी की जा रही है और जरूरत के अनुसार संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सड़क, बिजली और पेयजल जैसी आवश्यक सेवाओं को बहाल करने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

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