प्रतिकूल आर्थिक हालात और बढ़ते कर्ज के दबाव के बीच सुखविन्द्र सिंह सुक्खू आज वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए अपना लगातार चौथा बजट पेश करेंगे। इस बजट को हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने और वर्ष 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने के रोडमैप के रूप में देखा जा रहा है।
Himachal Budget 2026: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आज वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए राज्य का चौथा बजट पेश करेंगे। यह बजट ऐसे समय में आ रहा है जब राज्य बढ़ते कर्ज, सीमित राजस्व और केंद्र से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (RDG) के बंद होने जैसी बड़ी वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। सरकार इस बजट को हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने और वर्ष 2032 तक देश के सबसे समृद्ध राज्यों में शामिल करने के रोडमैप के रूप में पेश कर रही है।
मुख्यमंत्री सुबह 11 बजे विधानसभा में बजट पेश करेंगे। इस बार के बजट से कर्मचारियों, पेंशनरों, मजदूरों, किसानों और आम जनता को विशेष उम्मीदें हैं। सरकार के सामने एक ओर विकास योजनाओं को जारी रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर वित्तीय अनुशासन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
राजस्व घाटा अनुदान बंद होने की चुनौती
1 अप्रैल 2026 से हिमाचल प्रदेश को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान समाप्त होने जा रहा है। यह अनुदान राज्य की वित्तीय स्थिति को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। इसके बंद होने के बाद सरकार को नए राजस्व स्रोत तलाशने होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बजट में आय बढ़ाने के नए उपायों, कर संग्रह में सुधार और खर्चों पर नियंत्रण जैसे कदम देखने को मिल सकते हैं। सरकार को विकास योजनाओं को जारी रखते हुए वित्तीय स्थिरता बनाए रखने की रणनीति तैयार करनी होगी।
सात प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा फोकस
राज्य सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि इस बार बजट में सात प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इनमें शामिल हैं:
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था
- पर्यटन
- ऊर्जा
- खाद्य प्रसंस्करण
- डाटा स्टोरेज और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर
सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने से रोजगार के अवसर पैदा होंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। विशेष रूप से पर्यटन और ऊर्जा क्षेत्र को हिमाचल की आर्थिक रीढ़ माना जा रहा है।
बढ़ता कर्ज और खर्च बना चिंता का कारण

हिमाचल प्रदेश पर वर्तमान में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बताया जा रहा है। वहीं हर महीने वेतन, पेंशन और अन्य देनदारियों के भुगतान के लिए लगभग 2800 करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है। ऐसी स्थिति में सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह विकास योजनाओं को जारी रखते हुए कर्ज का बोझ कम करने का रास्ता भी निकाले। माना जा रहा है कि इस बजट में वित्तीय अनुशासन, खर्चों में कटौती और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दिया जाएगा।
बजट का आकार लगभग समान रहने की संभावना
पिछले वर्ष हिमाचल प्रदेश सरकार ने लगभग 58,514 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए इस बार भी बजट का आकार लगभग इसी के आसपास रहने की संभावना है। हालांकि सरकार अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए नई योजनाओं और निवेश प्रस्तावों पर काम कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने देर रात तक अधिकारियों के साथ बजट मसौदे पर चर्चा की और अपने भाषण को अंतिम रूप दिया। इससे संकेत मिलता है कि सरकार इस बजट को संतुलित और व्यावहारिक बनाने की कोशिश कर रही है।










