पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए पूछा कि क्या ईरान ने सुरक्षित पारगमन का भरोसा दिया है।
New Delhi: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच भारत की समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंता सामने आई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों के सुरक्षित गुजरने को लेकर सवाल किया है। केजरीवाल ने यह सवाल ऐसे समय उठाया है जब क्षेत्र में ईरान और अन्य देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल और व्यापारिक सामान दुनिया के अलग अलग देशों तक पहुंचता है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस समुद्री मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में अगर इस रास्ते पर किसी तरह की बाधा आती है तो उसका असर सीधे भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी से पूछा सवाल
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए कहा कि क्या ईरान के राष्ट्रपति ने भारतीय जहाजों के सुरक्षित पारगमन को लेकर कोई स्पष्ट आश्वासन दिया है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या भारत के नागरिक जल्द ही इस गंभीर संकट से राहत पा सकेंगे।
केजरीवाल का कहना था कि देश के लोग यह जानना चाहते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय जहाज सुरक्षित हैं या नहीं। उन्होंने प्रधानमंत्री से यह भी पूछा कि ईरानी नेतृत्व ने इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया है और क्या भारत को किसी तरह का भरोसा मिला है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से की बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान से टेलीफोन पर बातचीत की थी। इस बातचीत में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वहां की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की गई थी।
प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि उन्होंने क्षेत्र में बढ़ती हिंसा, नागरिकों की मौत और बुनियादी ढांचे को हो रहे नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात बेहद गंभीर हैं और इस स्थिति का शांतिपूर्ण समाधान निकालना जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करता है।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी बातचीत में यह भी स्पष्ट किया कि विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। पश्चिम एशिया में हजारों भारतीय काम करते हैं और कई छात्र भी वहां पढ़ाई कर रहे हैं।
सरकार का कहना है कि इन सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। अगर जरूरत पड़ी तो उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए भी व्यवस्था की जा सकती है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत के लिए सिर्फ नागरिकों की सुरक्षा ही नहीं बल्कि व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का निर्बाध प्रवाह भी बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी से निकलकर यही रास्ता अरब सागर और फिर दुनिया के अन्य हिस्सों तक जाता है।
दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। भारत भी अपने तेल आयात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से प्राप्त करता है। इसलिए अगर इस जलडमरूमध्य में किसी तरह की रुकावट आती है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार के साथ साथ भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
विदेश मंत्रालय ने दी स्थिति की जानकारी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी इस पूरे मुद्दे पर जानकारी दी है। उन्होंने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बताया कि ईरान में लगभग 9,000 भारतीय नागरिक मौजूद हैं।
इनमें बड़ी संख्या में छात्र और कामकाजी लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है। जो लोग वापस भारत लौटना चाहते हैं उन्हें दूतावास की मदद से सुरक्षित घर भेजा जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत सरकार ईरान के साथ लगातार संपर्क में है और स्थिति पर करीब से नजर रखी जा रही है।
विदेश मंत्री ने भी की कई अहम बातचीत
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाई है। जानकारी के अनुसार उन्होंने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से कई बार टेलीफोन पर बातचीत की है।
इन बातचीतों में मुख्य रूप से समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर चर्चा की गई है। भारत चाहता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाज सुरक्षित रहें ताकि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय व्यापारिक जहाजों और ऊर्जा आपूर्ति पर किसी तरह का खतरा न आए।










