होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर Donald Trump ने सहयोगी देशों को खुद जिम्मेदारी लेने को कहा। इस बयान से वैश्विक तनाव बढ़ा है और तेल सप्लाई व कीमतों पर असर को लेकर चिंताएं तेज हो गई हैं।
Oil Route Crisis: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने सहयोगी देशों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा कि रणनीतिक रूप से बेहद अहम Strait of Hormuz की सुरक्षा अब सिर्फ अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं होगी। ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने उन देशों पर निशाना साधा जो इस समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं लेकिन सैन्य कार्रवाई में अमेरिका का साथ नहीं दे रहे हैं।
‘अपना तेल खुद हासिल करो’, ट्रंप का सीधा संदेश
मीडिया से बातचीत के दौरान Donald Trump ने बेहद सख्त शब्दों में कहा कि जो देश होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “जाओ, अपना तेल खुद हासिल करो। यह हमारा काम नहीं है।” इस बयान के जरिए ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका अब हर हाल में आगे बढ़कर सुरक्षा देने की नीति पर नहीं चलेगा। अमेरिकी सेना आने वाले दो से तीन हफ्तों में अपने सैन्य हमलों को कम या बंद कर सकती है। इससे यह साफ होता है कि अमेरिका अपनी रणनीति में बदलाव कर सकता है।
सहयोगी देशों पर बढ़ता दबाव
ट्रंप के बयान के बाद अमेरिका के सहयोगी देशों पर दबाव बढ़ गया है। उन्होंने खास तौर पर यूरोपीय देशों को निशाना बनाते हुए कहा कि वे इस संघर्ष में जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं।
उनका कहना था कि जो देश इस जलमार्ग से तेल और गैस का लाभ उठाते हैं, उन्हें इसकी सुरक्षा में भी योगदान देना चाहिए। ट्रंप ने यह भी कहा कि अब समय आ गया है जब अन्य देशों को अपने हितों की रक्षा खुद करनी होगी और हर बार अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
बढ़ते हमलों से हालात और गंभीर
मिडिल ईस्ट में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के इस्फ़हान शहर पर हमला किए जाने के बाद तनाव और बढ़ गया है। इस हमले में बड़े पैमाने पर नुकसान की खबरें सामने आई हैं।

दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए फारस की खाड़ी में एक कुवैती तेल टैंकर को निशाना बनाया। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि संघर्ष अब और अधिक खतरनाक रूप ले चुका है। लगातार हो रहे हमलों के कारण क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है और वैश्विक स्तर पर इसके असर महसूस किए जा रहे हैं।
अमेरिका और इज़राइल द्वारा शुरू किए गए सैन्य अभियान को एक महीने से अधिक समय हो चुका है। इस दौरान इस संघर्ष में 3,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
तेल और गैस सप्लाई पर बड़ा असर
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से दुनिया के कुल तेल परिवहन का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। ईरान के नियंत्रण और बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग से सप्लाई बाधित हो रही है। इसका सीधा असर वैश्विक तेल और गैस बाजार पर पड़ा है। तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
ईंधन की कीमतों में भारी उछाल
बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent crude oil की कीमत लगभग 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। यह युद्ध शुरू होने के बाद से 45 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी को दर्शाता है। अमेरिका में गैसोलीन की कीमतें भी 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच चुकी हैं। इसका असर आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई दे रहा है।
यूरोपीय देशों का अलग रुख
इस पूरे संघर्ष में कई यूरोपीय देशों ने खुद को सैन्य कार्रवाई से दूर रखा है। स्पेन ने साफ कर दिया है कि वह युद्ध से जुड़े अमेरिकी विमानों को अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं करने देगा।
इटली ने भी एक ऑपरेशन के लिए अपने सिसिली स्थित Sigonella एयर बेस के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार किया। हालांकि इटली के रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ उनके संबंध मजबूत हैं और अन्य मामलों में सहयोग जारी रहेगा।
फ्रांस और अन्य देशों पर ट्रंप का निशाना
Donald Trump ने खास तौर पर फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि ये देश अमेरिका का साथ नहीं दे रहे हैं, जबकि इस जलमार्ग से उन्हें भी फायदा होता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब हर बार आगे बढ़कर दूसरों की सुरक्षा का जिम्मा नहीं उठाएगा। यह बयान अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सैन्य गठबंधनों पर असर डाल सकता है।












