सुप्रीम कोर्ट ने I-PAC ऑफिस पर ED रेड मामले में FIR पर फिलहाल रोक लगा दी। कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और रेड के दौरान सभी रिकॉर्ड व CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए।
New Delhi: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में I-PAC दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। ED ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और पुलिस ने जांच में दखल दिया और महत्वपूर्ण दस्तावेज जबरन ले लिए। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ED अधिकारियों पर दर्ज FIR पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और कहा कि केंद्रीय एजेंसी की जांच में किसी भी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए अहम निर्देश
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने जो इस मामले की सुनवाई कर रही है, उसने स्पष्ट किया कि केंद्रीय एजेंसियों की जांच में किसी भी राज्य सरकार या पुलिस का हस्तक्षेप कानून के खिलाफ है। कोर्ट ने कहा कि ED अधिकारियों पर FIR अगली सुनवाई तक स्थगित रहेगी। साथ ही, रेड के दौरान किए गए सर्च और CCTV फुटेज सहित सभी रिकॉर्डिंग डिवाइस सुरक्षित रखे जाएं। कोर्ट ने मामले में उठाए गए गंभीर कानूनी सवालों पर ध्यान देने को कहा और निर्देश दिया कि यह मुद्दा अनदेखा नहीं किया जा सकता।
ED ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा
ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में दलील दी कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य पुलिस के साथ मिलकर जांच में बाधा डाली। ED का आरोप है कि रेड के दौरान ममता बनर्जी ने खुद I-PAC ऑफिस में पहुंचकर ED अधिकारियों के लैपटॉप, मोबाइल और अहम दस्तावेज जबरन ले लिए। एजेंसी का यह भी कहना है कि कोलकाता पुलिस कमिश्नर और डीजीपी की मौजूदगी में PMLA के तहत चल रही तलाशी में राज्य प्रशासन ने हस्तक्षेप किया।

ED ने कोर्ट से पश्चिम बंगाल के डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर को सस्पेंड करने और मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की। एजेंसी का कहना है कि राज्य में निष्पक्ष जांच संभव नहीं है और इसलिए केंद्रीय जांच की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
ममता सरकार का पक्ष
वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने ED के आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि I-PAC ऑफिस में केवल चुनाव से जुड़ा गोपनीय डेटा था, जिसका ED की जांच से कोई लेना-देना नहीं है।
ममता सरकार का दावा है कि मुख्यमंत्री Z-कैटेगरी सुरक्षा प्राप्त हैं और उनके साथ पुलिस अधिकारी का होना स्वाभाविक था। उन्होंने बताया कि ममता बनर्जी केवल कुछ मिनटों के लिए वहां गई थीं और कोई दस्तावेज जब्त नहीं किया गया। पंचनामा में भी किसी दस्तावेज जब्ती का उल्लेख नहीं है।
ममता ने उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद ED की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि यह कार्रवाई राजनीतिक इरादों से की गई है और दो साल बाद और चुनाव से ठीक पहले ही बंगाल में एजेंसी इतनी सक्रिय क्यों हुई, यह समझ से परे है। ममता ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल चुनावी गतिविधियों का निरीक्षण करना था, न कि किसी तरह के दस्तावेज को छुपाना या जब्त करना।
इस मामले ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है। ED और राज्य सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केंद्र और राज्य के बीच जांच में दखल नहीं दिया जा सकता और किसी भी केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों पर FIR दर्ज करने का कदम कानूनन सही नहीं माना जाएगा।
कोर्ट की अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है। अगली सुनवाई में कोर्ट इस बात का निर्णय लेगी कि ED की स्वतंत्र जांच में राज्य सरकार ने किस हद तक हस्तक्षेप किया या नहीं। कोर्ट के आदेशों के मुताबिक, रेड के दौरान किए गए सभी रिकॉर्ड और CCTV फुटेज सुरक्षित रहेंगे और किसी भी तरह के छेड़छाड़ की अनुमति नहीं होगी।











