IAS Surabhi Gautam Success Story: गांव की हिंदी मीडियम छात्रा बनीं IAS, UPSC समेत कई परीक्षाएं कीं पास

IAS Surabhi Gautam ने हिंदी मीडियम स्कूल से पढ़ाई कर कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास कीं। 2016 में UPSC CSE में 50वीं रैंक हासिल कर IAS बनीं।

मध्य प्रदेश के सतना की सुरभि गौतम ने गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू की। अंग्रेजी की चुनौती के बावजूद उन्होंने कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास कीं और 2016 में UPSC CSE में 50वीं रैंक हासिल कर IAS बनीं।

IAS Surabhi Gautam Success Story: मध्य प्रदेश के सतना जिले के अमदारा गांव से निकलकर सुरभि गौतम ने अपनी मेहनत से अलग पहचान बनाई। हिंदी मीडियम स्कूल से पढ़ाई करने वाली सुरभि ने कॉलेज में अंग्रेजी की चुनौती का सामना किया, लेकिन लगातार अभ्यास से इसे अपनी ताकत बनाया। इंजीनियरिंग के बाद TCS की नौकरी छोड़कर उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी की और कई प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता हासिल की।

गांव के सरकारी स्कूल से शुरू हुआ पढ़ाई का सफर

सुरभि गौतम का जन्म 21 अगस्त 1991 को मध्य प्रदेश के सतना जिले के अमदारा गांव में हुआ था। उनके पिता वकील हैं, जबकि उनकी मां शिक्षिका हैं। साधारण पारिवारिक माहौल में पली-बढ़ीं सुरभि ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की। बचपन से ही उनका पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन रहा।

IAS Surabhi Gautam Success Story: गांव की हिंदी मीडियम छात्रा बनीं IAS, UPSC समेत कई परीक्षाएं कीं पास

मध्य प्रदेश बोर्ड की 5वीं कक्षा की परीक्षा में उन्होंने गणित में 100 में से 100 अंक हासिल किए थे। उनकी शिक्षिका ने इस उपलब्धि के लिए उनकी तारीफ की और उन्हें पढ़ाई के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। यही प्रोत्साहन आगे चलकर उनके लिए motivation बना। 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में भी उन्होंने 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए।

कॉलेज में अंग्रेजी बनी चुनौती, फिर ऐसे सुधारी भाषा

गांव के हिंदी मीडियम स्कूल से पढ़ाई करने के बाद जब सुरभि शहर के कॉलेज पहुंचीं, तो उन्हें अंग्रेजी भाषा की समस्या का सामना करना पड़ा। कॉलेज के शुरुआती दिनों में अंग्रेजी में अपना परिचय देते समय वह सहज नहीं थीं। उनकी अंग्रेजी को लेकर दूसरे छात्रों ने मजाक भी बनाया और उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा।

इस स्थिति ने उन्हें पीछे हटने के बजाय अपनी कमजोरी पर काम करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने रोजाना अंग्रेजी के नए शब्द सीखना शुरू किया। इसके साथ ही वह शीशे के सामने खड़े होकर और खुद से बातचीत करके बोलने की practice करती थीं। लगातार मेहनत के बाद अंग्रेजी पर उनकी पकड़ बेहतर हुई और उन्होंने अपनी इस कमजोरी को दूर कर लिया।

Engineering के बाद TCS की नौकरी छोड़ी

सुरभि गौतम ने राजीव गांधी टेक्निकल यूनिवर्सिटी (RGPV), भोपाल से Electronics and Communication Engineering में बीई की पढ़ाई की। कॉलेज के दौरान भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा और वह टॉपर रहीं। उन्हें Chancellor Award से भी सम्मानित किया गया।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें TCS में नौकरी मिली। हालांकि, उनका लक्ष्य केवल कॉरपोरेट करियर तक सीमित नहीं था। वह सिविल सेवा में जाना चाहती थीं। अपने इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन्होंने TCS की नौकरी छोड़कर प्रतियोगी परीक्षाओं और UPSC की तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया।

UPSC Engineering Services में हासिल की AIR-1

सुरभि की मेहनत का परिणाम कई प्रतियोगी परीक्षाओं में देखने को मिला। वर्ष 2013 में उन्होंने UPSC Engineering Services Examination में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की। इसके बाद उन्होंने कई अन्य competitive examinations में भी सफलता प्राप्त की।

उनकी उपलब्धियों में MPPSC, PCS, ISRO, BARC Scientist परीक्षा, GATE, SAIL, SSC CGL, दिल्ली पुलिस सब-इंस्पेक्टर और FCI जैसी परीक्षाएं शामिल हैं। अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी इन परीक्षाओं में लगातार सफलता ने उनकी मजबूत academic preparation और determination को दिखाया।

2016 में UPSC CSE में मिली 50वीं रैंक

कई परीक्षाओं में सफलता हासिल करने के बाद भी सुरभि का सबसे बड़ा लक्ष्य IAS अधिकारी बनना था। वर्ष 2016 में उन्होंने UPSC Civil Services Examination में सफलता हासिल की। उन्होंने Electrical Engineering को अपना optional subject चुना और English medium से परीक्षा दी।

UPSC CSE 2016 में उन्होंने 50वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की और IAS अधिकारी के रूप में चयनित हुईं। उनकी कहानी गांव से निकलकर देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करने वाले युवाओं के लिए motivation का उदाहरण बन गई।

वर्तमान में IAS अधिकारी सुरभि गौतम गुजरात के दाहोद जिले में कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट के पद पर कार्यरत हैं। उनकी journey यह बताती है कि शुरुआती संसाधनों या भाषा से जुड़ी चुनौतियां लक्ष्य हासिल करने में स्थायी बाधा नहीं बनतीं, अगर उन्हें सुधारने के लिए लगातार मेहनत और सही दिशा में तैयारी की जाए।

Leave a comment