कई तिमाहियों से दबाव में बैंकिंग सेक्टर अब सुधार के करीब दिख रहा है। मोतीलाल ओसवाल ने ICICI, HDFC और SBI को टॉप पिक्स बताया। FY27 में loan growth, credit cost में कमी और earnings recovery का अनुमान है।
Banking Sector: कई तिमाहियों से दबाव में रहा Banking Sector अब अपने सबसे कमजोर चरण के करीब पहुंचता दिख रहा है। मार्जिन में गिरावट, लोन ग्रोथ की रफ्तार धीमी होना और unsecured loan से जुड़े जोखिमों ने बीते समय में बैंकों की कमाई पर लगातार दबाव बनाया। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के मुताबिक, हालात अभी पूरी तरह सुधरे नहीं हैं, लेकिन गिरावट की रफ्तार अब थमती नजर आ रही है। हाल के महीनों में earnings estimate में कटौती कम हुई है, जो इस बात का संकेत है कि सेक्टर में हालात बिगड़ने के बजाय धीरे-धीरे संभल रहे हैं।
FY26 में ठहराव, FY27 से वापसी की उम्मीद
मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि FY26 बैंकिंग सेक्टर के लिए एक ट्रांजिशन पीरियड साबित हो सकता है। इस वित्त वर्ष में कमाई लगभग सपाट रह सकती है, क्योंकि पिछली चुनौतियों का असर पूरी तरह खत्म होने में समय लगेगा।
हालांकि ब्रोकरेज को उम्मीद है कि FY27 और FY28 के दौरान सेक्टर की earnings करीब 16 फीसदी की compound annual growth rate से बढ़ सकती है। यह रिकवरी तेज नहीं होगी, लेकिन टिकाऊ रहने की संभावना है। रिपोर्ट में इसे U-shaped recovery बताया गया है, जहां पहले ठहराव रहेगा, फिर धीरे सुधार होगा और उसके बाद मजबूती देखने को मिलेगी।
मिड साइज बैंकों पर क्यों पड़ा ज्यादा दबाव
पिछले एक साल में सबसे ज्यादा मार मिड साइज private banks पर पड़ी है। जिन बैंकों का exposure microfinance institutions और unsecured loan सेगमेंट में ज्यादा रहा, वहां credit cost तेजी से बढ़ा। इसका सीधा असर उनकी profitability पर पड़ा और earnings estimate में बड़ी कटौती करनी पड़ी।
बंधन बैंक, इक्विटास, IDFC First Bank और RBL Bank जैसे नाम इस लिस्ट में शामिल रहे। इसके उलट बड़े बैंक, जिनका बिजनेस diversified है और जिनकी balance sheet ज्यादा मजबूत है, उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण दौर में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।
बड़े बैंकों की मजबूती बनी सहारा
ICICI Bank, HDFC Bank और State Bank of India जैसे बड़े बैंकों ने दबाव के माहौल में भी स्थिरता बनाए रखी। इन बैंकों की funding profile मजबूत है, retail और corporate दोनों सेगमेंट में इनकी पकड़ अच्छी है और risk management भी तुलनात्मक रूप से बेहतर रहा है।
यही वजह है कि जब सेक्टर के अन्य हिस्सों में अस्थिरता दिखी, तब भी इन बैंकों की earnings पर असर सीमित रहा। मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, यही मजबूती इन्हें आने वाले रिकवरी फेज में भी आगे रखेगी।
Unsecured loan से जुड़ी चिंता में राहत के संकेत
जिस unsecured loan सेगमेंट ने पहले बैंकिंग सेक्टर की चिंता बढ़ाई थी, वहां अब धीरे-धीरे हालात सुधरते दिख रहे हैं। MFI segment में collection efficiency फिर से 99 फीसदी से ऊपर पहुंच चुकी है। personal loan और credit card सेगमेंट में भी stress बढ़ने के संकेत फिलहाल थम गए हैं। इससे आने वाले समय में credit cost घटने और profitability में सुधार की उम्मीद बढ़ी है। यह बदलाव खास तौर पर उन बैंकों के लिए राहत भरा है, जिनकी exposure पहले इस सेगमेंट में ज्यादा थी।
खपत में सुधार से loan demand को मिलेगा सहारा
रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में consumption बढ़ने से loan demand को सहारा मिल सकता है। GST rates में संभावित कटौती, income tax में राहत और interest rates में नरमी जैसे कदम लोगों की spending capacity बढ़ा सकते हैं। इसका सीधा फायदा बैंकिंग सेक्टर को मिलेगा, क्योंकि retail loan की मांग धीरे-धीरे मजबूत हो सकती है। 2QFY26 में इसके शुरुआती संकेत दिखने लगे हैं, जहां बेहतर margins, credit growth में सुधार और stress में कमी देखने को मिली है।
मार्जिन पर दबाव घटने की उम्मीद
बीते कुछ समय से banks के net interest margin पर दबाव बना हुआ था। rising cost of funds और competitive lending environment ने margins को प्रभावित किया। हालांकि अब funding cost में स्थिरता और बेहतर asset mix की वजह से margins में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद की जा रही है। बड़े बैंकों के लिए यह स्थिति ज्यादा अनुकूल मानी जा रही है, क्योंकि उनके पास low-cost deposits का मजबूत base है।
FY27 क्यों बन सकता है turning point
मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि FY27 बैंकिंग सेक्टर के लिए एक turning point साबित हो सकता है। इस दौरान earnings recovery, loan growth में सुधार और credit cost में कमी एक साथ देखने को मिल सकती है। macro environment अगर supportive रहा, तो सेक्टर का overall sentiment भी मजबूत होगा। यही वजह है कि ब्रोकरेज की नजरें अब short-term volatility से ज्यादा medium to long-term recovery पर टिकी हैं।
ICICI, HDFC और SBI क्यों बने पहली पसंद
इस बदलते माहौल में मोतीलाल ओसवाल ने ICICI Bank, HDFC Bank और State Bank of India को अपनी top picks बताया है। इन बैंकों की balance sheet मजबूत है, asset quality तुलनात्मक रूप से बेहतर है और management का track record भी भरोसेमंद माना जाता है। साथ ही, recovery phase में ये बैंक growth opportunities का बेहतर तरीके से फायदा उठा सकते हैं।










