बीएमसी में BJP का दबदबा, मेयर पद से शिंदे गुट बाहर होने के संकेत

बीएमसी में BJP का दबदबा, मेयर पद से शिंदे गुट बाहर होने के संकेत

बीएमसी मेयर चुनाव 30 जनवरी को होने की संभावना है। चुनाव नतीजों में सबसे बड़ी पार्टी बनी BJP मेयर पद पर दावा ठोक रही है, जबकि शिंदे गुट की उम्मीदें कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं।

BMC Election: मुंबई की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी के मेयर चुनाव को लेकर तस्वीर अब काफी हद तक साफ होती दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक, बीएमसी मेयर का चुनाव 30 जनवरी को होने की संभावना है। इस बीच सबसे अहम बात यह सामने आई है कि इस बार मुंबई का नया मेयर भारतीय जनता पार्टी से ही होगा। गठबंधन में शामिल एकनाथ शिंदे की पार्टी को यह पद दिए जाने की संभावना लगभग खत्म मानी जा रही है।

बीएमसी देश की सबसे अमीर नगरपालिकाओं में से एक है और मुंबई जैसे महानगर की सत्ता जिस पार्टी के हाथ में होती है, उसका राजनीतिक असर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक दिखाई देता है। ऐसे में मेयर पद को लेकर चल रही रस्साकशी को बेहद अहम माना जा रहा है।

चुनावी नतीजों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी

हाल ही में हुए बीएमसी चुनावों में कुल 227 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी ने 89 सीटों पर जीत दर्ज की है। यह आंकड़ा भले ही पूर्ण बहुमत से दूर है, लेकिन बीजेपी को नगर निगम में सबसे बड़ी पार्टी बनाता है। यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व अब मेयर पद पर अपना दावा मजबूत मान रहा है।

बीजेपी नेताओं का मानना है कि जनता ने सबसे ज्यादा भरोसा उन्हीं पर जताया है और इसी आधार पर मेयर पद पर पहला हक भी उनका बनता है। पार्टी का तर्क है कि गठबंधन धर्म के बावजूद सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते नेतृत्व की जिम्मेदारी उसी को मिलनी चाहिए।

शिंदे गुट की आपत्ति और बढ़ता तनाव

दूसरी ओर, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना इस पद को इतनी आसानी से छोड़ने के मूड में नहीं दिख रही है। शिंदे गुट के पास 29 पार्षद हैं और पार्टी का कहना है कि गठबंधन में होने के नाते उन्हें भी सत्ता में सम्मानजनक भागीदारी मिलनी चाहिए।

हालांकि, अंदरूनी सूत्रों की मानें तो बीजेपी ने साफ कर दिया है कि मेयर पद पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यही वजह है कि दोनों दलों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है और मुंबई की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

होटल में ठहराए गए पार्षद, सियासी हलचल तेज

चुनाव नतीजे आने के तुरंत बाद शिंदे गुट के नवनिर्वाचित पार्षदों को एक होटल में ठहराया गया। पार्टी का कहना है कि यह एक मार्गदर्शन सत्र था, जिसमें पार्षदों को आगे की रणनीति समझाई जानी थी।

वहीं विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक इसे खुलकर होटल पॉलिटिक्स बता रहे हैं। उनका कहना है कि यह कदम पार्षदों को एकजुट रखने और किसी भी तरह की टूट से बचने के लिए उठाया गया है। दो दिनों से पार्षदों का होटल में रहना राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर रहा है।

मेयर चुनाव की कानूनी प्रक्रिया

बीएमसी में मेयर का चुनाव एक तय कानूनी प्रक्रिया के तहत होता है। नगर निगम की नई सभा के औपचारिक गठन के बाद ही मेयर चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जाती है। इस चुनाव में सीधे जनता वोट नहीं करती, बल्कि पार्षद अपने मतों से मेयर का चयन करते हैं।

मेयर पद आरक्षण और रोटेशन प्रणाली के अंतर्गत आता है। जब तक यह तय नहीं हो जाता कि इस बार यह पद किस श्रेणी के लिए आरक्षित होगा और इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक कोई भी पार्टी अपने उम्मीदवार का औपचारिक ऐलान नहीं कर सकती।

बीजेपी का रणनीतिक आत्मविश्वास

बीजेपी खेमे में इस समय आत्मविश्वास साफ नजर आ रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि संख्या बल, संगठनात्मक मजबूती और राजनीतिक अनुभव के आधार पर मेयर पद उसी को मिलना चाहिए। इसके अलावा पार्टी यह भी संकेत दे रही है कि मुंबई जैसे शहर में स्थिर और मजबूत नेतृत्व जरूरी है, जो केवल बीजेपी ही दे सकती है।

बीजेपी सूत्रों का कहना है कि अगर मेयर पद किसी और को दिया गया, तो इसका संदेश गलत जाएगा और पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा फैल सकती है। यही कारण है कि शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे पर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है।

गठबंधन की परीक्षा

बीएमसी मेयर चुनाव को महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन की एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। एक तरफ सत्ता में साथ चलने की मजबूरी है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई भी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर शिंदे गुट को मेयर पद नहीं मिलता है, तो आने वाले समय में दोनों दलों के रिश्तों में और खटास आ सकती है। हालांकि फिलहाल दोनों पक्ष सार्वजनिक तौर पर संयमित बयान दे रहे हैं।

30 जनवरी तक मिल सकता है नया मेयर

सूत्रों के मुताबिक, सभी औपचारिक प्रक्रियाएं समय पर पूरी हुईं तो मुंबई को 30 जनवरी तक नया मेयर मिल सकता है। इस दिन होने वाला चुनाव केवल एक पद का चयन नहीं होगा, बल्कि यह आने वाले वर्षों की नगर निगम राजनीति की दिशा भी तय करेगा।

मेयर के साथ-साथ स्थायी समिति और अन्य अहम पदों को लेकर भी राजनीतिक समीकरण बनने हैं। ऐसे में आने वाले दिन मुंबई की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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