पाकिस्तान में कई सालों तक खुफिया ऑपरेशन और पुलिस सेवा में रहते हुए कीर्ति चक्र से सम्मानित और वर्तमान में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे अजीत डोभाल का आज जन्मदिन है।
नई दिल्ली: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल आज अपना 81वां जन्मदिन मना रहे हैं। 20 जनवरी को जन्मे अजीत डोभाल को भारत की सुरक्षा नीति का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता है। दशकों तक खुफिया तंत्र, आतंकवाद विरोधी अभियानों और कूटनीतिक मोर्चों पर अहम भूमिका निभाने वाले डोभाल को उनकी साहसिक कार्यशैली के कारण भारत का ‘जेम्स बॉन्ड’ कहा जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल अजीत डोभाल ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सुरक्षा को नई दिशा देने में निर्णायक योगदान दिया है।
सैन्य परिवार से IPS तक का सफर
अजीत डोभाल का जन्म उत्तराखंड में एक सैन्य परिवार में हुआ। उनके पिता भारतीय सेना में अधिकारी थे, जिससे उन्हें बचपन से ही अनुशासन और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा मिली। उनकी मां उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा की चचेरी बहन थीं। उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और इसके बाद UPSC परीक्षा पास कर 1968 में केरल कैडर के IPS अधिकारी बने। केरल के थालास्सेरी में ASP के रूप में तैनाती के दौरान सांप्रदायिक दंगों को नियंत्रित करने में उनकी भूमिका की काफी सराहना हुई।
1972 में अजीत डोभाल इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में शामिल हुए। यहीं से उनका करियर भारत की खुफिया और सुरक्षा रणनीतियों का अहम हिस्सा बन गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, 1980 के दशक में डोभाल ने RAW एजेंट के रूप में पाकिस्तान में अंडरकवर ऑपरेशन किया और करीब छह वर्षों तक बेहद संवेदनशील जानकारियां भारत तक पहुंचाईं।
दुश्मन देश में रहकर गुप्त अभियानों को अंजाम देना, आतंकवादी संगठनों में घुसपैठ और सटीक रणनीति—इन्हीं वजहों से अजीत डोभाल को भारत का ‘जेम्स बॉन्ड’ कहा जाता है।

कीर्ति चक्र से सम्मानित पहले पुलिस अधिकारी
अजीत डोभाल भारत के उन चुनिंदा अधिकारियों में से हैं जिन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। वे असाधारण साहस के लिए यह सम्मान पाने वाले पहले पुलिस अधिकारी हैं। यह सम्मान उनकी अद्वितीय सेवा और जोखिम भरे अभियानों का प्रमाण है। अजीत डोभाल ने कई बड़े अभियानों का नेतृत्व किया या रणनीतिक मार्गदर्शन दिया, जिनमें शामिल हैं:
- ऑपरेशन ब्लैक थंडर (1988): खालिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई
- IC-814 अपहरण कांड (1999): यात्रियों की सुरक्षित रिहाई में महत्वपूर्ण भूमिका
- भारतीय उच्चायोग, पाकिस्तान: छह वर्षों तक सेवा
- IB डायरेक्टर (2004–2005): आंतरिक सुरक्षा को मजबूत किया
NSA के रूप में ऐतिहासिक फैसले
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनने के बाद अजीत डोभाल ने भारत की सुरक्षा नीति को आक्रामक और स्पष्ट दृष्टिकोण दिया। उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां:
- 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक
- 2019 का बालाकोट एयर स्ट्राइक
- इराक से 546 भारतीय नर्सों की सुरक्षित वापसी
- भारत-चीन डोकलाम गतिरोध का समाधान
- चीन और पाकिस्तान के साथ रणनीतिक संतुलन
इन फैसलों ने वैश्विक मंच पर भारत की सुरक्षा क्षमता को मजबूत किया। अजीत डोभाल सिर्फ एक अधिकारी नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा सोच के वास्तुकार माने जाते हैं। उनकी रणनीतिक स्पष्टता, जोखिम लेने की क्षमता और गोपनीय अभियानों का अनुभव उन्हें भारत के सबसे प्रभावशाली सुरक्षा विशेषज्ञों में शामिल करता है।











