नीतीश कुमार के नए आवास पर चर्चा, 7 सर्कुलर रोड से जुड़ा लालू यादव कनेक्शन, जानिए पूरा मामला

नीतीश कुमार के नए आवास पर चर्चा, 7 सर्कुलर रोड से जुड़ा लालू यादव कनेक्शन, जानिए पूरा मामला

बिहार में नीतीश कुमार के नए आवास को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कहा जा रहा है कि वह पटना के 7 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले में रह सकते हैं, जिससे वह लालू यादव के पड़ोसी बन सकते हैं।

Patna: बिहार की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद नीतीश कुमार के नए आवास को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि अब वह कहां रहेंगे। माना जा रहा है कि वह पटना के 7 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले में शिफ्ट हो सकते हैं। यह वही बंगला है जिसे उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान बनवाया था और लंबे समय तक इसका उपयोग भी किया है।

हालांकि यह मामला इतना आसान नहीं दिख रहा है क्योंकि इस बंगले को लेकर एक कानूनी पेच भी सामने आ रहा है। पटना हाईकोर्ट के पुराने आदेश के कारण यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें यह सरकारी आवास मिल पाएगा या नहीं।

लालू यादव के पड़ोसी बनने की संभावना

अगर नीतीश कुमार 7 सर्कुलर रोड के इस बंगले में रहने का फैसला करते हैं तो एक दिलचस्प राजनीतिक स्थिति बन सकती है। इस स्थिति में वह राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के पड़ोसी बन सकते हैं।

दरअसल, लालू यादव की पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का सरकारी आवास इसी इलाके में स्थित है। बताया जाता है कि राबड़ी देवी का बंगला 7 सर्कुलर रोड से करीब 200 मीटर की दूरी पर है। दोनों बंगले पटना के सर्कुलर रोड के दक्षिणी हिस्से में स्थित हैं।

अगर ऐसा होता है तो बिहार की राजनीति के दो बड़े प्रतिद्वंद्वी नेता एक ही इलाके में रहेंगे। यही कारण है कि इस संभावना को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा हो रही है।

नीतीश कुमार की पसंद का बंगला

7 सर्कुलर रोड का यह बंगला नीतीश कुमार की खास पसंद माना जाता है। इस बंगले का निर्माण उनके कार्यकाल के दौरान हुआ था और बताया जाता है कि इसके डिजाइन और निर्माण पर उन्होंने व्यक्तिगत रूप से नजर रखी थी।

बंगले को आधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार किया गया है। इसकी संरचना इस तरह बनाई गई है कि यह भूकंप के तेज झटकों को भी सहन कर सके। इसके अलावा बंगले के बड़े लॉन में खास तरह की घास लगाई गई है जो कोलकाता से मंगवाई गई थी।

यह बंगला केवल एक आवास नहीं बल्कि एक तरह से राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र भी रहा है, जहां कई महत्वपूर्ण बैठकों और रणनीतियों पर चर्चा होती रही है।

फिलहाल सीएम ऑफिस के तौर पर इस्तेमाल

वर्तमान में 7 सर्कुलर रोड स्थित इस आवास का उपयोग मुख्यमंत्री कार्यालय के रूप में किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार लंबे समय तक इस बंगले से प्रशासनिक कार्यों और बैठकों का संचालन करते रहे हैं।

2014 में भी इसी बंगले में आए थे रहने

यह पहली बार नहीं है जब नीतीश कुमार के इस बंगले में रहने की चर्चा हो रही है। वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया था। उस समय उन्होंने जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था।

मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद नीतीश कुमार इसी 7 सर्कुलर रोड के बंगले में रहने आ गए थे। इसी स्थान से उन्होंने आगे की राजनीतिक रणनीति तैयार की और अपनी राजनीतिक गतिविधियों को जारी रखा।

2015 में फिर बने मुख्यमंत्री

7 सर्कुलर रोड में रहते हुए ही नीतीश कुमार ने बाद में राजनीतिक परिस्थितियों को अपने पक्ष में मोड़ लिया था। कुछ समय बाद उन्होंने जीतन राम मांझी से मुख्यमंत्री की कुर्सी वापस ले ली।

इसके बाद 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद वह फिर से मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने आधिकारिक सीएम आवास 1 अणे मार्ग में शिफ्ट किया और वहीं से राज्य की सरकार का संचालन किया।

हाईकोर्ट के आदेश से कानूनी पेच

नीतीश कुमार के इस बंगले में शिफ्ट होने की संभावना के बीच एक कानूनी सवाल भी सामने आ रहा है। वर्ष 2019 में पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया था जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला देने की व्यवस्था को असंवैधानिक बताया गया था।

मुख्य न्यायाधीश एपी शाही की खंडपीठ ने कहा था कि पद छोड़ने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भी आम नागरिक की तरह होते हैं और उन्हें जीवन भर सरकारी आवास देना संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है।

कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध ‘लोक प्रहरी’ मामले का भी हवाला दिया था। इस फैसले के बाद बिहार में पूर्व मुख्यमंत्रियों को स्थायी सरकारी आवास देने की व्यवस्था समाप्त हो गई।

अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों पर भी पड़ा असर

पटना हाईकोर्ट के इस फैसले का असर केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था। इसका प्रभाव बिहार के कई पूर्व मुख्यमंत्रियों पर पड़ा था। इनमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, जगन्नाथ मिश्र, जीतन राम मांझी और सतीश प्रसाद सिंह जैसे नेता शामिल थे। कोर्ट ने कहा था कि सरकारी खजाने पर बोझ डालकर किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री को जीवन भर के लिए सरकारी बंगला देना उचित नहीं है।

किराये पर मिल सकता है सरकारी आवास

हालांकि बिहार में अब पूर्व मुख्यमंत्री को स्थायी सरकारी आवास देने का नियम नहीं है, लेकिन सरकार चाहे तो उन्हें किराये पर सरकारी घर उपलब्ध करा सकती है।

यही वजह है कि राजनीतिक हलकों में यह चर्चा चल रही है कि नीतीश कुमार को 7 सर्कुलर रोड का बंगला किराये पर दिया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो कानूनी रूप से भी यह व्यवस्था संभव हो सकती है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

सुरक्षा और सुविधाओं से लैस बंगला

7 सर्कुलर रोड का यह बंगला पटना के हाई सिक्योरिटी जोन में स्थित है। यहां चारों तरफ ऊंची दीवारें, सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा बल तैनात रहते हैं। बंगले के अंदर कई आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। इसमें छह वीआईपी बेडरूम, बड़ा ड्रॉइंग हॉल, मीटिंग हॉल, डाइनिंग एरिया और बड़ा लॉन शामिल है।

लॉन के बीच एक छोटा तालाब भी बनाया गया है जो इस बंगले को और आकर्षक बनाता है। यही कारण है कि इसे पटना के सबसे खास सरकारी आवासों में गिना जाता है।

नंबर 7 को लेकर खास मान्यता

नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन में नंबर 7 को खास माना जाता है। उन्होंने वर्ष 1977 में अपनी सक्रिय राजनीति की शुरुआत की थी। इसके अलावा मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने अपनी कई प्रमुख योजनाओं को ‘7 निश्चय’ नाम दिया था। इसलिए कई लोग मानते हैं कि 7 नंबर उनके लिए राजनीतिक रूप से भी खास महत्व रखता है।

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